श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-प्रथमःस्कन्धः-अध्याय-02 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-प्रथमःस्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-प्रथमःस्कन्धः-अथ द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय सूतजी द्वारा श्रीमद्देवीभागवत के स्कन्ध, अध्याय तथा श्लोक संख्या का निरूपण और उसमें प्रतिपादित विषयों का वर्णन ग्रन्थसंख्याविषयवर्णनम् ॥ सूत उवाच ॥ धन्योऽहमतिभाग्योऽहं पावितोऽहं महात्मभिः । यत्पृष्टं सुमहत्पुण्यं पुराणं वेदविश्रुतम् ॥ १ ॥ तदहं सम्प्रवक्ष्यामि सर्वश्रुत्यर्थसम्मतम् । रहस्यं… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-प्रथमःस्कन्धः-अध्याय-01 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-प्रथमःस्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-प्रथमःस्कन्धः-अथ प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय महर्षि शौनक का सूतजी से श्रीमद्देवीभागवतपुराण सुनाने की प्रार्थना करना शौनकप्रश्नः ॐ सर्वचैतन्यरूपां तां आद्यां विद्यां च धीमहि । बुद्धिं या नः प्रचोदयात् ॥ १ ॥ ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाभाग धन्योऽसि पुरुषर्षभ । यदधीतास्त्वया सम्यक्… Read More
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-05 श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय श्रीमद्देवीभागवत पुराण की श्रवण विधि, श्रवणकर्ता के लिये पालनीय नियम, श्रवणके फल तथा माहात्म्य का वर्णन देवीभागवत-श्रवणविधिवर्णनम् ॥ ऋषय ऊचुः ॥ सूत सूत महाभाग श्रुतं माहात्म्यमुत्तमम् । अधुना श्रोतुमिच्छामः पुराणश्रवणे विधिम् ॥ १ ॥ ॥ सूत… Read More
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-04 श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ चतुर्थोध्याय: श्रीमद्देवीभागवत के माहात्म्य के प्रसंग में रेवती नक्ष त्रके पतन और पुनः स्थापन की कथा तथा श्रीमद्देवीभागवत के श्रवण से राजा दुर्दम को मन्वन्तराधिप-पुत्र की प्राप्ति रैवत नामक मनुपुत्रोत्पत्तिवर्णनम् ॥ सूतउवाच ॥ इति श्रुत्वा कथां दिव्यां विचित्रां कुम्भसम्भवः… Read More
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-03 श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ तृतीयोध्यायः श्रीमदेवीभागवत के माहात्म्य के प्रसंग में राजा सुद्युम्न की कथा नवाहश्रवणाद् इलायाः पुंस्त्वप्राप्तिवर्णनम् ॥ सूत उवाच ॥ अथेतिहासमन्यच्च शृणुध्वं मुनिसत्तमाः । देवीभागवतस्यास्य माहात्म्यं यत्र गीयते ॥ १ ॥ एकदा कुम्भयोनिस्तु लोपामुद्रापतिर्मुनिः । गत्वा कुमारमभ्यर्च्य पप्रच्छ विविधाः कथाः ॥… Read More
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-02 श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ द्वितीयोऽध्यायः श्रीमद्देवीभागवत के माहात्म्य के प्रसंग में स्यमन्तकमणि की कथा अथ द्वितीयोऽध्यायः ॥ ऋषय ऊचुः ॥ वसुदेवो महाभागः कथं पुत्रमवाप्तवान् । प्रसेनः कुत्र कृष्णेन भ्रमताऽन्वेषितः कथम् ॥ १ ॥ विधिना केन कस्माच्च देवीभागवतं श्रुतम् । वसुदेवेन सुमते वद सूत… Read More
श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्यम् अध्याय 01 श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्यम् अध्याय 01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ प्रथमोऽध्यायः सूतजी के द्वारा ऋषियों के प्रति श्रीमद्देवीभागवत के श्रवण की महिमा का कथन सृष्टौ या सर्गरूपा जगदवनविधौ पालनी या च रौद्री संहारे चापि यस्या जगदिदमखिलं क्रीडनं या पराख्या । पश्यन्ती मध्यमाथो तदनु भगवती वैखरी वर्णरूपा सास्मद्वाचं प्रसन्ना विधिहरिगिरिशा-राधितालङ्करोतु… Read More
श्रीमद्देवीभागवत की पाठविधि श्रीमद्देवीभागवत की पाठविधि देवीभागवतं नाम पुराणं परमोत्तमम् । त्रैलोक्यजननी साक्षाद् गीयते यत्र शाश्वती ॥ श्रीमद्भागवतं यस्तु पठेद्वा शृणुयादपि । श्लोकार्थं श्लोकपादं वा स याति परमां गतिम् ॥ श्रीमद्देवीभागवत नामक पुराण सभी पुराणों में अतिश्रेष्ठ है, जिसमें तीनों लोकों की जननी साक्षात् सनातनी भगवती की महिमा गायी गयी है। जो श्रीमद्देवीभागवत के आधे श्लोक या चौथाई… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 133 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 133 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ तैंतीसवाँ अध्याय पुराणों के लक्षण और उनकी श्लोक संख्या का निरूपण, ब्रह्मवैवर्तपुराण के पठन-श्रवण के माहात्म्य का वर्णन करके सूतजी का सिद्धाश्रम को प्रयाण शौनकजी ने कहा — वत्स ! ब्रह्मवैवर्त-पुराण में जिस फल का निरूपण हुआ है, वह निर्विघ्नतापूर्वक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 132 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 132 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ बतीसवाँ अध्याय सम्पूर्ण कथा का संक्षेप तथा अनुक्रमणिका शौनक बोले — हे धर्मेश ! मैंने सब कुछ सुन लिया। कुछ अवशिष्ट नहीं है । हे महाभाग ! मुझ ब्राह्मण से पुनः पुराण का कथन करें । जन्म से ही मैंने… Read More