ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 04 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः चौथा अध्याय सावित्री, कामदेव, रति, अग्नि, अग्निदेव, जल, वरुणदेव, स्वाहा, वरुणानी, वायुदेव, वायवी देवी तथा मेदिनी के प्राकट्य का वर्णन सौति कहते हैं – शौनक जी! तत्पश्चात् श्रीकृष्ण की जिह्वा के अग्रभाग से शुद्ध स्फटिक के समान उज्ज्वल वर्ण वाली एक मनोहारिणी देवी… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 03 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः तीसरा अध्याय श्रीकृष्ण से सृष्टि का आरम्भ, नारायण, महादेव, ब्रह्मा, धर्म, सरस्वती, महालक्ष्मी और प्रकृति –का प्रादुर्भाव तथा इन सबके द्वारा पृथक-पृथक श्रीकृष्ण का स्तवन सौति कहते हैं – भगवान ने देखा कि सम्पूर्ण विश्व शून्यमय है। कहीं कोई जीव-जन्तु नहीं है। जल… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 02 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः दूसरा अध्याय परमात्मा के महान उज्ज्वल तेजःपुञ्ज, गोलोक, वैकुण्ठलोक और शिवलोक की स्थिति का वर्णन तथा गोलोक में श्यामसुन्दर भगवान् श्रीकृष्ण के परात्पर स्वरूप का निरूपण शौनक जी ने पूछा — सूतनन्दन ! आपने कौन-सा परम अद्भुत, अपूर्व और अभीष्ट पुराण सुना है,… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-ब्रह्मखण्ड-अध्याय 01 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः पहला अध्याय मङ्गलाचरण, नैमिषारण्य में आये हुए सौति से शौनक के प्रश्न तथा सौति द्वारा ब्रह्मवैवर्तपुराण का परिचय देते हुए इसके महत्त्व का निरूपण गणेशब्रह्मेशसुरेशशेषाः सुराश्च सर्वे मनवो मुनीन्द्राः । सरस्वतीश्रीगिरिजादिकाश्च नमन्ति देव्यः प्रणमामि तं विभुम् ॥ १ ॥ गणेश, ब्रह्मा, महादेवजी, देवराज इन्द्र, शेषनाग आदि सब… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 41 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] इकतालीसवाँ अध्याय मेरुगिरिके स्कन्द-सरोवरके तटपर मुनियोंका सनत्कुमारजीसे मिलना, भगवान् नन्दीका वहाँ आना और दृष्टिपातमात्रसे पाशछेदन एवं ज्ञानयोगका उपदेश करके चला जाना, शिवपुराणकी महिमा तथा ग्रन्थका उपसंहार सूतजी कहते हैं – वहाँ [मेरुपर्वतपर] सागरके समान एक विशाल सरोवर… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 40 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] चालीसवाँ अध्याय वायुदेवका अन्तर्धान होना, ऋषियोंका सरस्वतीमें अवभृथ – स्नानऔर काशीमें दिव्य तेजका दर्शन करके ब्रह्माजीके पास जाना, ब्रह्माजीका उन्हें सिद्धि प्राप्तिकी सूचना देकर मेरुके कुमारशिखरपर भेजना सूतजी कहते हैं – इस प्रकार क्रोधको जीतनेवाले उपमन्युसे यदुकुलनन्दन… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 39 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] उनतालीसवाँ अध्याय ध्यान और उसकी महिमा, योगधर्म तथा शिवयोगीका महत्त्व, शिवभक्त या शिवके लिये प्राण देने अथवा शिवक्षेत्रमें मरणसे तत्काल मोक्ष – लाभका कथन उपमन्यु कहते हैं— श्रीकृष्ण ! श्रीकण्ठनाथका स्मरण करनेवाले लोगोंके सम्पूर्ण मनोरथोंकी सिद्धि तत्काल… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 38 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] अड़तीसवाँ अध्याय योगमार्गके विघ्न, सिद्धि-सूचक उपसर्ग तथा पृथ्वीसे लेकर बुद्धितत्त्वपर्यन्त ऐश्वर्यगुणोंका वर्णन, शिव – शिवाके ध्यानकी महिमा उपमन्यु कहते हैं— श्रीकृष्ण ! आलस्य, तीक्ष्ण व्याधियाँ, प्रमाद, स्थान- संशय, अनवस्थितचित्तता, अश्रद्धा, भ्रान्ति-दर्शन, दुःख, दौर्मनस्य और विषय – लोलुपता-… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 37 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] सैंतीसवाँ अध्याय योगके अनेक भेद, उसके आठ और छः अंगोंका विवेचन – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, दशविध प्राणोंको जीतनेकी महिमा, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधिका निरूपण श्रीकृष्णने कहा— भगवन् ! आपने ज्ञान, क्रिया और चर्याका संक्षिप्त सार… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 36 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] छत्तीसवाँ अध्याय शिवलिंग एवं शिवमूर्तिकी प्रतिष्ठाविधिका वर्णन श्रीकृष्ण बोले – [ हे भगवन् ! ] मैं लिंग तथा मूर्तिकी उत्तम प्रतिष्ठाविधिको सुनना चाहता हूँ, जिसे शिवजीने कहा था ॥ १ ॥ उपमन्यु बोले— [हे कृष्ण ! ]… Read More