भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ८ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ८ सहदेव अंश देवसिंह का जन्म सूत जी बोले — जम्बूक नामक राजा ने भयभीत होकर अपने पुत्र कालिय (करिया) को साथ लेकर नर्मदा के तट पर देवाधिदेव पिनाकपाणि शिव की आराधना… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ७ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ७ राजागणों द्वारा अपने इष्टदेवों की आराधना सूत जी बोले — भीष्मसिंह ने गंगा जी के तट पर इन्द्र की पूजा करना आरम्भ किया । पश्चात् इन्द्र को सूर्यमय जानकर तप द्वारा… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ६ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ६ संयोगिनी का अपहरण सूत जी बोले — एक बार रत्नभानु (रतीमान्) ने पृथ्वीराज के राज्य के दक्षिणी प्रदेश पर विजय प्राप्तकर उसके कोष (खजाने) का अपहरण कर लिया था । उसे… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ५ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ५ पृथ्वीराज व जयचन्द्र सूत जी बोले — इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली) के राजा अनंगपाल ने पुत्रार्थ (पुत्रेष्टि नामक) यज्ञ का सविधान अनुष्ठान आरम्भ किया । भगवान् शिव की प्रसन्नता से चन्द्रकान्ति और कीर्तिमालिनी,… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ४ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ४ देशराज एवं वत्सराज आदि राजाओं का आविर्भाव सूतजी ने कहा — भोजराज के स्वर्गारोहण के पश्चात् उनके वंश में सात राजा हुए, किंतु अल्पायु होने के नाते उन भाग्यहीनों का राजकाल… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ३ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ३ राजा भोज और महामद की कथा सूतजी ने कहा — शालिवाहन के वंश में दश राजाओं ने क्रमशः जन्म ग्रहणकर पाँच सौ वर्ष तक राज्य का उपभोग किया है । पश्चात्… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय २ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – २ राजा शालिवाहन तथा ईशामसीह की कथा सूतजीने कहा — ऋषियों ! प्रातःकाल में पुत्रशोक से पीड़ित सभी पाण्डव प्रेतकार्य कर पितामह भीष्म के पास आये । उनसे उन्होंने राजधर्म, मोक्षधर्म और… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १ आल्हा-खण्ड (आल्हा-ऊदल की कथा) का उपक्रम विशेषः- भविष्यपुराण के प्रतिसर्गपर्व का तीसरा खण्ड रामांश और कृष्णांश अर्थात् आल्हा और ऊदल (उदयसिंह)- के चरित्र जयचन्द्र एवं पृथ्वीराज चौहान की वीरगाथाओं से परिपूर्ण… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ३५ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ३५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – ३५ श्रीदुर्गासप्तशती के उत्तरचरित्र की महिमा के प्रसंग में योगाचार्य महर्षि पतञ्जलि का चरित्र सूतजी बोले — अनेक धातुओं के द्वारा चित्रित रमणीय चित्रकूट पर्वतपर महाविद्वान् उपाध्याय पतञ्जलि मुनि रहते थे ।… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ३४ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ३४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – ३४ श्रीदुर्गासप्तशती के मध्यमचरित्र का माहात्म (कात्यायन तथा मगध के राजा महानंद की कथा) सूतजी बोले — शौनक ! उज्जयिनी नगरी में एक हिंसापरायण मद्य-मांस-भक्षी भीमवर्मा नाम का क्षत्रिय रहता था ।… Read More