श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-145 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-145 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ पैंतालीसवाँ अध्याय श्रीगणेशजी का राजा वरेण्य को अपने विराट्रूप का दर्शन कराना अथः पञ्चचत्वारिंशादधिकशततमोऽध्यायः गणेशगीता – “विश्वरूपदर्शनन्नाम” अष्टमोऽध्यायः वरेण्य बोले — हे भगवन्! नारदजी के मुख से मैंने आपकी अनेक विभूतियों का श्रवण किया है, उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उन (विभूतियों में कुछ)- को जानता हूँ, समस्त… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-144 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-144 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ चौवालीसवाँ अध्याय गणेशगीता – श्रीगणेशजी का राजा वरेण्य से उपासना-योग का वर्णन करना चतुर्थोचत्वारिंशादधिकशततमोऽध्यायः । गणेशगीता – “उपासना योगो” नाम सप्तमोऽध्याय वरेण्य बोले — हे गजानन ! शुक्ला गति और कृष्णा गति किसको कहते हैं, ब्रह्म क्या है और संसृति क्या है, यह सब आप मुझसे कृपाकर कहिये… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-143 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-143 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ तैंतालीसवाँ अध्याय गणेशगीता – श्रीगणेशजी का राजा वरेण्य को अपने तात्त्विक स्वरूप का परिचय देना अथः त्रिचत्वारिंशादधिकशततमोऽध्यायः । गणेशगीता – “बुद्धियोगो” नाम षष्टोऽध्यायः श्रीगणेशजी बोले — [ हे राजन् ! ] इस प्रकार मुझमें मन लगाकर मेरा वह तत्त्व जानो, जिसको जानने से मुझे सर्वगत और यथार्थ जानकर… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-142 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-142 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ बयालीसवाँ अध्याय गणेशगीता – योगावृत्ति की प्रशंसा अथः द्वेचत्वारिंशादधिकशततमोऽध्यायः गणेशगीता – योगावृत्ति प्रशंसनायोगोनाम पञ्चमोऽध्याय श्रीगणेशजी बोले — हे राजन्! जो श्रुति और स्मृति में कहे हुए कर्मों को फल की इच्छा न करके करता है, वह योगी कर्म का त्याग करने वाले योगियों से श्रेष्ठ है। हे महाभुज!… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-141 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-141 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ इकतालीसवाँ अध्याय गणेशगीता – संन्यासयोग अथः एकचत्वारिंशादधिकशततमोऽध्यायः गणेशगीता – “`कर्मसंन्यास” योगोनाम चतुर्थोऽध्यायः वरेण्य बोले — हे भगवन्! आप कर्मसंन्यास (अर्थात् निष्कामभाव से कर्म करते-करते विशुद्ध चित्त होने पर कर्मत्याग करने) – को ज्ञान का कारण कहकर फिर कर्मयोग को ज्ञान का कारण कहते हैं, इन दोनों में जो… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-140 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-140 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ चालीसवाँ अध्याय गणेशगीता – ज्ञानयोग अथः चत्वारिंशादधिकशततमोऽध्यायः गणेशगीता – ब्रह्मार्पणयोगोनाम तृतीयोऽध्यायः श्रीगणेशजी बोले — पूर्वकाल में, सृष्टिरचना के अवसर पर [ब्रह्म-विष्णु-रुद्रात्मक] तीन स्वरूपों वाले मुझ गणपति ने [ब्रह्मरूप से] त्रिगुणात्मक जगत्प्रपंच का निर्माण करने के अनन्तर [जगत् पालक] विष्णु को इस उत्तम योग का उपदेश किया था ॥… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-139 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-139 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ उनतालीसवाँ अध्याय गणेशगीता – कर्मयोग अथः नवत्रिशदधिकशततमोऽध्यायः गणेशगीता – कर्मयोगोनाम द्वितीयोऽध्यायः वरेण्य ने कहा — हे भगवन्! आपने ज्ञाननिष्ठा और कर्मनिष्ठा दोनों का वर्णन किया, आप दोनों में से एक निश्चयकर जो कल्याणदायक हो, उसे कहिये ॥ १ ॥ श्रीगजानन बोले — हे प्रिय ! मेरे द्वारा पूर्वकाल… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-138 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-138 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ अड़तीसवाँ अध्याय सूत-शौनक-संवाद में गणेशगीता का उपक्रम अथः अष्टत्रिशदधिकशततमोऽध्यायः साङ्ख्ययोग सारार्थयोगो नाम प्रथमोऽध्यायः ब्रह्माजी बोले — इसी प्रकार पूर्वकाल में महात्मा शौनक के पूछने पर सूतजी ने [तत्कालीन] व्यासजी के मुख से श्रवण की हुई गीता का वर्णन किया था ॥ १ ॥ सूतजी बोले — हे भगवन्!… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-137 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-137 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ सैंतीसवाँ अध्याय युद्धभूमि में गजानन का सिन्दूर को मारकर उसके रक्त का अपने शरीर में लेपन करना और देवताओं, ऋषियों तथा राजाओं का वहाँ आकर गजानन का पूजन-स्तवनादि करना अथः सप्तत्रिशदधिकशततमोऽध्यायः वरेण्योपदेश ब्रह्माजी बोले — बालक गजानन को देखकर अहंकार से उन्मत्त सिन्दूर कहने लगा — ‘अरे मन्द… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-136 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-136 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ छत्तीसवाँ अध्याय गजानन का सिन्दूर के साथ युद्धार्थ प्रस्थान, सिन्दूर के दूतों से गजानन का संवाद एवं सिन्दूर का युद्ध हेतु आगमन अथः षट्त्रिंशोत्तरशततमोऽध्यायः बालचरिते सिन्दूरनिर्गम ब्रह्माजी बोले — एक दिन की बात है, जनता के दुखों का अनुभव करते हुए गजाननदेव ने महाभाग मुनिश्रेष्ठ पराशरजी से कहा… Read More