आत्म-रक्षा-मन्त्र आत्म-रक्षा-मन्त्र मन्त्रः- “चन्दा बाँधों, सूरज बाँधों । बाँधों गङ्गा माई । तेंतीस कोटि के देवता बाँधों । हनुमत की राम दुहाई । मरघट का मसान बाँधों । मन चाहे लड्डू खाऊँ । पूजा करूँ गणेश की । मन चाहे जहाँ चला जाऊँ । श्री हनुमान जी की राम दुहाई ।।”… Read More
वशीकरण वशीकरण मन्त्रः- “ॐ नमो फूल सुगन्धा । फूल ही बाँधूँ सात समुद्रा । अहो फूल झटियारा, चौंसठ जोगिनी खरा प्यारा । ए फूल ए दिन पाऊँ, सूती सुवासिनी सेज बुलाऊँ । मुआ मड़ा मसान जगाऊँ, हाक करी उचाट लाऊँ । गलिहट मेरे पगे लगाऊँ । देखूँ गोरा भैरव ! तेरी शक्ति । मेरी भक्ति, गुरू… Read More
विविध कार्य-साधक अम्बिका मन्त्र विविध कार्य-साधक अम्बिका मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आठ-भुजी अम्बिका, एक नाम ओङ्कार । खट्-दर्शन त्रिभुवन में, पाँच पण्डवा सात दीप । चार खूँट नौ खण्ड में, चन्दा-सूरज दो प्रमाण । हाथ जोड़ बिनती करूँ, मम करो कल्याण ।।”… Read More
व्यापार-वर्धन व्यापार-वर्धन मन्त्रः- “भँवर वीर तू चेला मेरा, खोल दुकान कहा कर मेरा । उठै जो डण्डी बिके जो माल, भँवरवीर, सोखे नहिं जाय ।।”… Read More
विपरीत चालन शाबर-मन्त्र-वल्लरी विपरीत चालन मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरू का, एक ठौ सरसों सोला राई, मोरो पठ-वल कोरो जाई । खाय-खाय पड़ै मार, जे करै ते मरै । उलट विद्या ताही पर पड़ै । शब्द साँचा, पिण्ड काँचा, तो हनुमान का मन्त्र साँचा । फुरौ भर, ईश्वरी वाचा । दुहाई माता अञ्जनी की ।।”… Read More
विविध कीलन विविध कीलन मन्त्रः- “भय कीलूँ, भैसासुर कीलूँ । कीलूँ अपनी काया । जागता मसान कीलूँ, जिसकी बैठूँ छाया । बलिहारी मुहम्मदा बीर की, कीलूँ पवन बावरी, मन चाहे जहाँ डोलूँ, दुष्ट की मुष्ट कीलूँ । मेरे कीले न कीलै, तो अपनी माँ के सङ्ग हराम करे, दुहाई मुहम्मदा वीर की ।।”… Read More
भूत-प्रेतादि बाँधना तथा झाड़ना शाबर-मन्त्र-वल्लरी भूत-प्रेतादि बाँधना तथा झाड़ना मन्त्रः- “बाद करत बादी चले, नौ सौ ढाल मढाय । जाते मारै बादिया औ करै बदिनियाँ राँड़ ।। पाँच बरस का बालक मारे, गर्भै करै अहार । देव को बाँध, देवी को बाँध, भूत को बाँध, चुड़ैल को बाँध ।। किए-कराए को बाँध, गली-घाट को बाँध । कब्जे मे कर… Read More
भूत-प्रेत पकड़ना तथा झाड़ना शाबर-मन्त्र-वल्लरी भूत-प्रेत पकड़ना तथा झाड़ना मन्त्रः- “जभी बुलाए, तब न आए और आए आधी रात, लौंग सुपाड़ी नारियल । बीरा लेत अकास, धाय बीर आकास जाय और धाय बीर पाताल, धाय बीर चोटी गहै, भूत पकड़, देव पकड़, देवी पकड़, चड़ैल पकड़, किए कराए को पकड़, जादू – टोना को पकड़, मरही मसान को पकड़,… Read More
देवर्षि नारद देवर्षि नारद मङ्ल-मूर्ति नारदजी श्रीभगवान् के मन के अवतार हैं । कृपा-मय प्रभु जो कुछ करना चाहते हैं, सर्वज्ञ और सर्वदर्शी वीणा-पाणि नारदजी के द्वारा वैसी ही चेष्टा होती है । श्रीमद्भागवतमें कहा गया है – तृतीयमृषिसर्गं च देवर्षित्वमुपेत्य स: । तन्त्रं सात्वतमाचष्ट नैष्कर्म्यं कर्मणां यत: ।। (१ । ३ । ८)… Read More
सिर-दर्द-नाशक मन्त्र सिर-दर्द-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “लङ्का में बैठ के माथ हिलावै हनुमन्त, सो देखि के राक्षस-गण पराय तुरन्त । बैठी सीता देवी अशोक वन में, देखि हनुमान को आनन्द भई मन में । गई उर विषाद, देवी स्थिर दरशाय । अमुक के नहिं कछु पीर, नहिं कछु भार । आदेश कामाख्या हरिदासी चण्डी की दुहाई ।।”… Read More