बैरि-नाशक हनुमान ग्यारहवाँ विधिः- दूसरे से माँगे हुए मकान में, रक्षा-विधान, कलश-स्थापन, गणपत्यादि लोकपालों का पूजन कर हनुमान जी की प्रतिमा-प्रतिष्ठा करे। नित्य ११ या १२१ पाठ, ११ दिन तक करे। ‘प्रयोग’ भौमवार से प्रारम्भ करे। ‘प्रयोग’-कर्त्ता रक्त-वस्त्र धारण करे और किसी के साथ अन्न-जल न ग्रहण करे।… Read More


सुख-शान्ति-दायक महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपञ्च-दश-ऋचस्य श्री-सूक्तस्य श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषयः, अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दांसि, श्रीमहालक्ष्मी देवताः, श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषिभ्यो नमः शिरसि। अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दोभ्यो नमः मुखे। श्रीमहालक्ष्मी देवताय नमः हृदि। श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे।… Read More


श्री महा-विपरीत-प्रत्यंगिरा स्तोत्र नमस्कार मन्त्रः- श्रीमहा-विपरीत-प्रत्यंगिरा-काल्यै नमः। ।।पूर्व-पीठिका-महेश्वर उवाच।। श्रृणु देवि, महा-विद्यां, सर्व-सिद्धि-प्रदायिकां। यस्याः विज्ञान-मात्रेण, शत्रु-वर्गाः लयं गताः।। विपरीता महा-काली, सर्व-भूत-भयंकरी। यस्याः प्रसंग-मात्रेण, कम्पते च जगत्-त्रयम्।। न च शान्ति-प्रदः कोऽपि, परमेशो न चैव हि। देवताः प्रलयं यान्ति, किं पुनर्मानवादयः।। पठनाद्धारणाद्देवि, सृष्टि-संहारको भवेत्। अभिचारादिकाः सर्वेया या साध्य-तमाः क्रियाः।। स्मरेणन महा-काल्याः, नाशं जग्मुः सुरेश्वरि, सिद्धि-विद्या महा काली,… Read More


श्री हनुमान लहरी दोहा गुरु पद पंकज धारि उर , सुर नर शीश नवाय । मारूत सुत बलवीर कहं , ध्यावत चित मन लाय ॥ प्रथम वन्दि सियराम पद , अवध नारि नर संग । वन्दौ चरण सुध्यान धरि , हनुमत कंचन रंग ॥ मन चित देइ सुनौ विनै , हौं तुम दीन दयाल ।… Read More


मृत्य्वष्टकम् ।। मार्कण्डेय उवाच ।। नारायणं सहस्राक्षं पद्मनाभं पुरातनम् । प्रणतोऽस्मि हृषीकेशं किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। १ गोविन्दं पुण्डरीकाक्षमनन्तमजमव्ययम् । केशवं च प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। २ वासुदेवं जगद्योनिं भानुवर्णमतीन्द्रियम् । दामोदरं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ३… Read More


श्री शिव-शत-नाम ।। पूर्व-पीठिका ।। ।। श्री देव्युवाच ।। देव-देव महादेव ! संसारार्णवतारक ! शिव-लिंगार्चनं देव ! कृपया कथय प्रभो ! ।। श्री शंकर उवाच ।। श्रृणु देवि ! प्रवक्ष्यामि, यन्मत्त्वं परि-पृच्छसि । मम नाम-शतं चैव, कलौ पुण्य-फल-प्रदम् ।। यस्य स्मरण-मात्रेण, संसारान्मुच्यते नरः ।। अति गुह्यं महा-पुण्यं, यव स्नेहात् प्रकाशितं । गोपनीयं प्रयत्नेन, न प्रकाश्यं… Read More


सौभाग्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्र किसी भी श्रद्धा-विश्वास-युक्त स्त्री के द्वारा स्नानादि से शुद्ध होकर सूर्योदय से पहले नीचे लिखे मन्त्र की १० माला प्रतिदिन जप किये जाने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है तथा उसका सौभाग्य बना रहता है। किसी शुभ दिन जप का आरम्भ करना चाहिये तथा प्रतिवर्ष चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में विधिपूर्वक… Read More


ॐ सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र ॐ गं गणपतये नमः। सर्व-विघ्न-विनाशनाय, सर्वारिष्ट निवारणाय, सर्व-सौख्य-प्रदाय, बालानां बुद्धि-प्रदाय, नाना-प्रकार-धन-वाहन-भूमि-प्रदाय, मनोवांछित-फल-प्रदाय रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।। ॐ गुरवे नमः, ॐ श्रीकृष्णाय नमः, ॐ बलभद्राय नमः, ॐ श्रीरामाय नमः, ॐ हनुमते नमः, ॐ शिवाय नमः, ॐ जगन्नाथाय नमः, ॐ बदरीनारायणाय नमः, ॐ श्री दुर्गा-देव्यै नमः।। ॐ सूर्याय नमः, ॐ चन्द्राय नमः, ॐ… Read More


विरह-ज्वर-विनाशकं ब्रह्म-शक्ति स्तोत्रम् ।।श्रीशिवोवाच।। ब्राह्मि ब्रह्म-स्वरूपे त्वं, मां प्रसीद सनातनि ! परमात्म-स्वरूपे च, परमानन्द-रूपिणि !।। ॐ प्रकृत्यै नमो भद्रे, मां प्रसीद भवार्णवे। सर्व-मंगल-रूपे च, प्रसीद सर्व-मंगले !।। विजये शिवदे देवि ! मां प्रसीद जय-प्रदे। वेद-वेदांग-रूपे च, वेद-मातः ! प्रसीद मे।। शोकघ्ने ज्ञान-रूपे च, प्रसीद भक्त वत्सले। सर्व-सम्पत्-प्रदे माये, प्रसीद जगदम्बिके!।। लक्ष्मीर्नारायण-क्रोडे, स्रष्टुर्वक्षसि भारती। मम क्रोडे… Read More


शत्रु-विध्वंसिनी-स्तोत्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशत्रु-विध्वंसिनी-स्तोत्र-मन्त्रस्य ज्वाला-व्याप्तः ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीशत्रु-विध्वंसिनी देवता, श्रीशत्रु-जयार्थे (उच्चाटनार्थे नाशार्थे वा) जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- शिरसि ज्वाला-व्याप्त-ऋषये नमः। मुखे अनुष्टुप छन्दसे नमः, हृदि श्रीशत्रु-विध्वंसिनी देवतायै नमः, अञ्जलौ श्रीशत्रु-जयार्थे (उच्चाटनार्थे नाशार्थे वा) जपे विनियोगाय नमः।।… Read More