शत्रु-पीड़ा-कारक मन्त्र शत्रु-पीड़ा-कारक मन्त्र विधि — पहले किसी मङ्लवार को हनुमान मन्दिर में जाकर तेल, सिन्दूर, लाल फूल चढ़ाए । गुड का भोग लगाकर १०८ बार उक्त मन्त्र का जप करे । प्रयोग के समय मङ्गलवार की आधी रात को उक्त मन्त्र द्वारा हनुमान जी को लाल वस्त्र, चने की दाल, गुड का भोग लगाए । फिर… Read More
शत्रु-स्तम्भन मन्त्र शत्रु-स्तम्भन मन्त्र मन्त्रः- “जल बाँधु, जल-वायु बाँधु । बाँधु जल के तीर । पाँचो काला कलवा बाँधों । बाँधु हनुमन्त वीर ! सहदेव तेरी लाकड़ी, अर्जुन तेरो बाण । ‘अमुक’ की गति थाम दे, यति हनुमत की आन । शब्द साँचा-पिण्ड काँचा, मेरे गुरू का इल्म साँचा । फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा । दुहाई गोरख-… Read More
हनुमान् जी से कार्य करवाने का मन्त्र हनुमान् जी से कार्य करवाने का मन्त्र मन्त्र:- “कवन सो काज कठिन जग माहीं । जो नहीं होई तात तुम पाहीं ।।”… Read More
रक्षा-कारक मन्त्र रक्षा-कारक मन्त्र मन्त्रः- “नागौरी से सुलतान, मुहम्मद से जोद्धा, बडे खुदाय काम । चारों चक्र हनुमान जोद्धे ने मारे । मस्तक में सिन्दूर लगाऊँ । सवा सेर का रोट चढाऊं । मैं करूँ हिन्दी का पाठ । घरेर – घार कर लगा लगाया, भेजा – भेजाया सब गुर्ज के बस में कर । पहली हक्का… Read More
शाबर मन्त्र-जाल 04 अर्श-रोग का निवारण मन्त्र:- ॐ काका कता कोरी कर्वा । ॐ करता से होय परसना । दशह्रस प्रकटे खूनी बादी बवासीर न होय । मन्त्र जान के न बतावे द्रादश बह्म-हत्या का पाप होय । लाख जप करे, तो उसके वश में न होय । शदद सांचा, पिण्ड काचा । वो हनुमान का मन्त्र सांचा… Read More
शाबर मन्त्र-जाल 03 नैत्र – रोग का शमन मन्त्र:- ॐ नमो वन बिनाई बानरी, जहाँ हनुवन्त आंखि पीड़ा कषावरि । गिहिया थनै लाइ चरिउ जाई भस्मन्तन । गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति । फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ।” नैत्र पर हाथ फिराते हुए उक्त मन्त्र को सात बार फूंके ।… Read More
शाबर मन्त्र-जाल 02 आधा-शीशी निवारण मन्त्र मन्त्र:- बन में ब्याई अञ्जनी, कच्चे बन-फल खाय । हांक मारी हनुमन्त ने, इस पिण्ड से आधा-शीशी उतर जाय ।” उक्त मन्त्र का उच्चारण कर भस्म से झाड़े ।… Read More
आकस्मिक आसन्न सङ्कट से रक्षा करनेवाला मन्त्र आकस्मिक आसन्न सङ्कट से रक्षा करनेवाला मन्त्र मन्त्र :- (१) “आवत देखो, उध-सुध बैठत, पथरा सुहान । हाथ बाँधौ, मुँह बाँधौ, आठो दन्त बन्द कराऔ । अहो नारसिंह नाथ ! इस बन से उस बन चली जाई, काल दाग को दीन्हो छिपाई । जै बजरङ्ग बली की दोहाई ।”… Read More
स्थान बाँधने का मन्त्र स्थान बाँधने का मन्त्र मन्त्र :- “उतरे पाँव परन्ते जी, सुमिरन सुग्रीव लाभा होय । चौगुना सान्से परे न जीव, धरती करो बिछौना । तम्बू तनू आकाश, सूर्य – चन्द्रमा दीपक-सुख, सोमै हरी के दास । पाँच पुतरी के रखवार, भाग-भाग रे दुष्ट ! हनुमन्त बिराजे आय । जहाँ बजी हनु- मन्त की ताली, तहाँ… Read More
हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग ब्राह्म-मुहूर्त में उठकर, ‘सन्ध्या-वन्दनादि’ नित्य क्रिया करने के उपरान्त साधक नदी किनारे जाए। नदी में स्नान करके, ‘तीर्थ-आवाहन’ कर आठ बार मूल-मन्त्र का जप करे। फिर मूल-मन्त्र जपते हुए बारह बार अपने मस्तक पर जल के द्वारा ‘अभिषेक’ करे। अभिषेक करने के बाद वस्त्र धारण कर नदी के किनारे बैठ- ‘ह्रां… Read More