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रक्षा-पाल का मन्त्र
मन्त्रः- “जागो रघुवीर । जागो पौणाहारी । जाग पवना-हारी । जाग गुर पहाड़िया गुर – नाम सहाई, जिसकी महिमा किसी नहीं पाई । जागो पवन । जाग जोतांवालों, तेरे दर ते खड़े ने सवाली । धरती जागे, अम्बर जागे – जागे तिन्न लोक, तैंतीस करोड़ देवता जागे । जागे ब्रह्मा, जागे विष्णु, जागै शिव भण्डार । गुरु को बन्दगी, बन्दगी मानूँ जहां पवनाहारी द्वार । घट-घट में बसो, रोम-रोम में वास । जय बाबा, बारम्बार नमस्कार ।।”
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विधि –
उक्त मन्त्र का प्रातः-सायं प्रति-दिन ‘धूपं’-ज्योति जलाकर १० माला ‘जप’ करे । यदि ‘श्रद्धा’ और लगन – पूर्वक ‘जप’ किया जाए, तो रक्ष – पाल ४१ दिन के भीतर मनोमिलाषित वरदान देते हैं । अगर इतना ‘जप’ न कर सके, तो एक ‘माला’ प्रति- दिन छ: मास तक ‘जप’ करे । इससे परिवार के सभी प्रकार के कलह – क्लेशों से छुटकारा मिलता है और सुख – सम्पत्ति में वृद्धि होती है ।

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