श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -013 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -013 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ तेरहवाँ अध्याय पीतवासाकल्प में शिवस्वरूप भगवान् तत्पुरुष का प्रादुर्भाव तथा उनका माहात्म्य श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे त्रयोदशोऽध्यायः तत्पुरुषमाहात्म्यं सूतजी बोले — इकतीसवाँ कल्प ‘पीतवासा’ कल्प नाम वाला कहा गया है, जिसमें महाभाग ब्रह्मा ने पीला वस्त्र धारण किया था ॥ १ ॥ पुत्र प्राप्ति की कामना से परमेश्वर के ध्यान… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -012 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -012 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ बारहवाँ अध्याय रक्तकल्प में शिवस्वरूप भगवान् वामदेव का प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे द्वादशोऽध्यायः वामदेवमाहात्म्यं सूतजी बोले — तीसवाँ कल्प रक्तकल्प के नाम से प्रसिद्ध है। महान् तेजस्वी ब्रह्मा ने उस कल्प में रक्तवर्ण धारण किया था ॥ १ ॥ पुत्र की कामना से ध्यानरत परमेष्ठी ब्रह्माजी… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -011 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -011 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ ग्यारहवाँ अध्याय श्वेतलोहितकल्प में शिवस्वरूप भगवान् सद्योजात का प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकादशोऽध्यायः सद्योजातमाहात्म्यं ऋषिगण बोले — [ हे सूतजी !] ब्रह्माजी ने सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर तथा ईशानसंज्ञक सनातन पुरुषोत्तम महेश्वर शिव को किस प्रकार देखा ? आप हमें यथावत् रूप से यह बताने की… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -010 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -010 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ दसवाँ अध्याय योगसिद्धि प्राप्त पुरुषों के लक्षण, साधुधर्म का स्वरूप, भगवान् शिव के साक्षात्कार के उपायों का वर्णन तथा भक्तिभाव में श्रद्धा की महत्ता श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे दशमोऽध्यायः भक्तिभावकथनं सूतजी बोले — हे उत्तम ब्राह्मणो ! संत, जितेन्द्रिय, साक्षात् द्विजाति (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य ), धर्मज्ञ, साधु, आचार्य, शिवात्मा, दयावान्,… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -009 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -009 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ नौवाँ अध्याय योगसाधना के अन्तराय ( विघ्न), योग से प्राप्त होने वाली विघ्नरूप विभिन्न सिद्धियाँ तथा ऐश्वर्य, गुणवैतृष्ण्य तथा वैराग्य से पाशुपतयोग की प्राप्ति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे नवमोऽध्यायः योगान्तरायकथनं सूतजी बोले — [ हे मुनीश्वरो ! ] योगसाधन के काल में पहले आलस्य तथा बाद में व्याधिपीड़ा उत्पन्न होती… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -008 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -008 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ आठवाँ अध्याय शरीर में स्थित योगस्थानों (चक्रों) का वर्णन, योग का स्वरूप, अष्टांगयोग का वर्णन, विषयभोगों की निस्सारता, प्राणायाम की महिमा, सदाशिव के ध्यान का स्वरूप श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे अष्टमोऽध्यायः अष्टाङ्ग योग निरूपणं सूतजी बोले — हे द्विजो ! अब मैं भगवान् शंकर के द्वारा जगत् के हितार्थ कल्पित… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -007 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -007 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सातवाँ अध्याय माहेश्वर योग का प्रतिपादन, अट्ठाईस व्यासों तथा चौदह मनुओं की नामावली, विभिन्न युगों में हुए माहेश्वर योगावतारों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे सप्तमोऽध्यायः मनुव्यासयोगेश्वरतच्छिष्यकथनं सूतजी बोले — [ हे मुनीश्वरो ! ] अब मैं संक्षेप में अमित तेजवाले, सर्वतत्त्वदर्शी भगवान् शंकर के रहस्य तथा श्रेष्ठ प्रभाव का… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -006 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -006 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ छठा अध्याय अग्नि तथा पितरों के वंश का वर्णन, ब्रह्माजी से रुद्रों का प्रादुर्भाव, परमेष्ठी सदाशिव की महिमा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे षष्ठोऽध्यायः शङ्कर माहात्म्य सृष्टि वर्णनं सूतजी बोले — अग्नि[^1] के वे तीन पुत्र पवमान, पावक तथा शुचि नाम से विख्यात हुए । अरणी आदि में घर्षण से पवमान,… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -005 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -005 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ पाँचवाँ अध्याय ब्रह्माजी द्वारा पंचपर्वा अविद्या की सृष्टि, नौ प्रकार की सृष्टि ( नवविध सर्ग ) – की संरचना, मरीचि आदि ऋषियों की उत्पत्ति, मनु – शतरूपा का प्रादुर्भाव तथा दक्षप्रजापति की कन्याओं का वंश वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे पञ्चमोऽध्यायः प्रजासृष्टिवर्णनं सूतजी बोले — हे ब्राह्मणो ! जब ब्रह्माजी… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -004 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -004 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ चौथा अध्याय ब्रह्माजी की आयु का परिमाण, काल का स्वरूप, कल्प, मन्वन्तर एवं युगादि का मान तथा ब्रह्माजी द्वारा विभिन्न लोकों की संरचना श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे चतुर्थोऽध्यायः सृष्टिप्रारम्भवर्णनं सूतजी बोले — ब्रह्मा की प्राकृत सृष्टि का जो समय है, वही उनका दिन है तथा उतने ही परिमाण की उनकी… Read More