ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 15 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 15 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पन्द्रहवाँ अध्याय शिवजी का कृत्तिकाओं के पास दूतों को भेजना, वहाँ कार्तिकेय और नन्दी का संवाद श्रीनारायण कहते हैं — मुने ! पुत्र का समाचार मिल जाने पर जब विष्णु, देवगण, मुनिसमुदाय और पर्वतों ने पार्वतीसहित शंकरको प्रेरित किया, तब उन्होंने लाखों क्षेत्रपाल,… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 14 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 14 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौदहवाँ अध्याय पार्वती को देवताओं द्वारा कार्तिकेय का समाचार प्राप्त होना तदनन्तर, पहले शंकर का वीर्य पृथ्वी पर गिरने से कार्तिकेय के उत्पन्न होने की बात आयी थी, उसी के सम्बन्ध में बात छिड़ने पर — श्रीधर्म ने कहा — भगवन् ! प्रकोप… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 13 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 13 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तेरहवाँ अध्याय विष्णु आदि देवताओं द्वारा गणेश की अग्रपूजा, पार्वतीकृत विशेषोपचार सहित गणेशपूजन, विष्णुकृत गणेशस्तवन और ‘संसारमोहन’ नामक कवच का वर्णन श्रीनारायणजी कहते हैं — नारद! तदनन्तर विष्णु ने शुभ समय आने पर देवों तथा मुनियों के साथ सर्वश्रेष्ठ उपहारों से उस बालक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 12 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 12 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बारहवाँ अध्याय पार्वती के कहने से शनैश्चर का गणेश पर दृष्टिपात करना, गणेश के सिर का कटकर गोलोक में चला जाना, पार्वती की मूर्च्छा, श्रीहरि का आगमन और गणेश के धड़ पर हस्ती का सिर जोड़कर जीवित करना, फिर पार्वती को होश में… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 11 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 11 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ ग्यारहवाँ अध्याय गणेश को देखने के लिये शनैश्चर का आना और पार्वती के पूछने पर अपने द्वारा किसी वस्तु के न देखने का कारण बताना श्रीनारायणजी कहते हैं — नारद! इस प्रकार उस बालक को आशीर्वाद देकर श्रीहरि उस सभा में देवताओं और… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 10 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 10 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दसवाँ अध्याय शिव, पार्वती तथा देवताओं द्वारा अनेक प्रकार का दान दिया जाना, बालक को देवताओं एवं देवियों का शुभाशीर्वाद और इस मङ्गलाध्याय के श्रवण का फल श्रीनारायणजी कहते हैं — नारद! तदनन्तर उन दोनों पति-पत्नी — शिव-पार्वती ने बाहर जाकर पुत्र की… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 09 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 09 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ नौवाँ अध्याय श्रीहरि के अन्तर्धान हो जाने पर शिव-पार्वती द्वारा ब्राह्मण की खोज, आकाशवाणी के सूचित करने पर पार्वती का महल में जाकर पुत्र को देखना और शिवजी को बुलाकर दिखाना, शिव-पार्वती का पुत्र को गोद में लेकर आनन्द मनाना श्रीनारायण कहते हैं… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 08 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 08 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ आठवाँ अध्याय पार्वती की स्तुति से प्रसन्न हुए श्रीकृष्ण का पार्वती को अपने रूप के दर्शन कराना, वर प्रदान करना और बालकरूप से उनकी शय्या पर खेलना श्रीनारायण कहते हैं — नारद! पार्वती द्वारा किये गये उस स्तवन को सुनकर करुणानिधि श्रीकृष्ण ने… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 07 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 07 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सातवाँ अध्याय पार्वती द्वारा व्रतारम्भ, व्रत-समाप्ति में पुरोहित द्वारा शिव को दक्षिणारूप में माँगे जाने पर पार्वती का मूर्च्छित होना, शिवजी तथा देवताओं और मुनियों का उन्हें समझाना, पार्वती का विषाद, नारायण का आगमन और उनके द्वारा पति के बदले गोमूल्य देकर पार्वती… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 06 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 06 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छठवाँ अध्याय पार्वतीजी का व्रतारम्भ के लिये उद्योग, ब्रह्मादि देवों तथा ऋषि आदि का आगमन, शिवजी द्वारा उनका सत्कार तथा श्रीविष्णु से पुण्यक व्रत के विषय में प्रश्न, श्रीविष्णु का व्रत के माहात्म्य तथा गणेश की उत्पत्ति का वर्णन करना नारदजी ने पूछा… Read More