॥ राधोपनिषत् ॥ प्रथमः प्रपाठकः ॐ अथ सुषुप्तौ रामः स्वबोधमाधायेव किं मे देवः ? क्वासौ कृष्णो योऽयं मम भ्रातेति ? तस्य का निष्ठा ब्रूहीति । सा वै ह्युवाच । राम शृणु-भूर्भुवः स्वर्महर्जनस्तपः सत्यं तलं वितलं सुतलं रसातलं तलातलं महातलं पातालं एवं पञ्चाशत्कोटियोजनं बहुलं स्वर्णाण्डं ब्रह्माण्डमिति अनन्तकोटिब्रह्माण्डानामुपरि कारणजलोपरि महाविष्णोर्नित्यं स्थानं वैकुण्ठः ।… Read More


श्रीराधामाधव एवं उनके परिकरों आदि का परिचय (व्रज-लीला के सन्दर्भ में) श्रीकृष्ण एवं उनके लीला—सहचर पितामह — पर्जन्य। पितामही – वरीयसी। मातामह — सुमुख। मातामही – पाटला। ताऊ — उपनन्द एवं अभिनन्द। ताई — तुंगी (उपनन्द की पत्नी), पीवरी (अभिनन्द की पत्नी)। चाचा — सन्नन्द (सुनन्द) एवं नन्दन । चाची — कुवलया (सन्नन्द की पत्नी),… Read More


शाबर साधना रक्षा यदि ‘शरीर रक्षा’ का मन्त्र पढ़कर पहले से ही अपने शरीर को सुरक्षित कर लिया जाए, तो किसी मन्त्र-तंत्र का कोई प्रभाव शरीर पर नहीं होगा । यहां शरीर रक्षा, स्थान (आसन बंधन) एवं दिग बंधन से सम्बंधित मंत्रों का वर्णन है — प्रयोग 1 — नीचे लिखे मन्त्र को सबसे पहले… Read More


दरगाह-सिद्धि का शाबर मन्त्र विधि — आपत्ति, कष्ट, आपदा, विपदा, उपद्रव, बाधा, पीड़ा, तनाव – पूर्ण – स्थिति या धर्म-सङ्कट से बचने का कोई मार्ग न मिल रहा हो, तब इस ‘प्रयोग’ से ईप्सित शान्ति प्राप्त होती है । कई लोगों ने इस प्रयोग से अपने कष्टों का निवारण किया है । किसी भी पाक-साफ… Read More


शत्रु को परास्त करने का मुस्लिम शाबर मन्त्र Shabar Mantra For Enemy Overthrown विधि — निम्न मन्त्र के रिक्त स्थानों (—–) पर शत्रु का नाम लेवें । शत्रु के नाम के साथ उसकी माँ का नाम भी । उदाहरणार्थ, सलीम सलमा का बेटा या बेटी या सलमा का बेटा या बेटी सलीम, इस्लामी ‘मन्त्र’ का… Read More


संत श्री जलाराम बापा संत श्री जलाराम बापा एक हिन्दु संत थे । वे राम-भक्त थे । वे ‘बापा’ के नाम से प्रसिद्ध हैं । जलाराम बापा का जन्म सन्‌ 1799 (4 नवम्बर 1799 विक्रम सम्वत 1856, वीरपुर-(खेरडी राज्य) में गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गाँव में हुआ था । ये लोहाणा क्षत्रियकुल में… Read More


चित्रध्वज से चित्रकला प्राचीनकाल में चन्द्रप्रभ नाम के एक राजर्षि थे । भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा से उन्हें चित्रध्वज नामक सुन्दर पुत्र प्राप्त था । वह बचपन से ही भगवान् का भक्त था । जब वह बारह वर्ष का हुआ, तब राजा ने किसी ब्राह्मण के द्वारा उसे अष्टादशाक्षर (ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा)… Read More


श्रीनृसिंह पूजन विधि वैष्णव भक्तों को नृसिंह जयन्ती के दिन नृसिंह जी की षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए । इस दिन भगवान् नृसिंह की पूजा करने से उनकी विशिष्ट कृपा प्राप्त होती है । पूजन विधि:- पूजाकक्ष या किसी अन्य कक्ष में चौकी पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाकर उस पर अष्टदल कमल चावलों से… Read More


॥ नृसिंह लक्ष्मी ॥ एकत्रिंशद्वर्णो मन्त्रः- “ॐ श्रीं ह्रीं जयलक्ष्मीप्रियाय नित्यप्रमुदितचेतसे लक्ष्मीश्रितार्ध – देहाय श्रीं ह्रीं नमः ॥” विनियोगः – ॐ अस्य मन्त्रस्य पद्मोभव ऋषिः । अतिजगती छन्दः । श्रीनरकेसरी देवता । श्रीं बीजम् । ह्रीं शक्तिः ममाभीष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ऋषिन्यासः- ॐ पद्मोभव ऋषये नमः शिरसि । अति जगती छन्दसे नमः मुखे ।… Read More


॥ नृसिंह द्वात्रिंशद्वर्णात्मको मन्त्रः ॥ मन्त्रः- “ॐ उग्रंवीरं महाविष्णुं ज्वलंतं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्यं नमाम्यहम् ॥” मृत्युमृत्यु का अर्थ है मृत्यु की मृत्यु करने वाले आप काल के भी काल हैं अर्थात् कालमृत्यु आपके वश में हैं, मन्त्र में ऐसी भावना रखें । विनियोग:- ॐ अस्य मन्त्रस्य ब्रह्माऋषिः, अनुष्टप् छन्दः, श्रीनरसिंहो देवता, हं… Read More