श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय इक्ष्वाकुवंश के शेष राजाओं का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! कुश का पुत्र हुआ अतिथि, उसका निषध, निषध के नभ, नभ का पुण्डरीक और पुण्डरीक का क्षेमधन्वा ॥ १ ॥ क्षेमधन्वा का देवानीक, देवानीक… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय भगवान् श्रीराम की शेष लीलाओं का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीराम ने गुरु वसिष्ठजी को अपना आचार्य बनाकर उत्तम सामग्रियों से युक्त यज्ञों के द्वारा अपने-आप ही अपने सर्वदेवस्वरूप स्वयंप्रकाश आत्मा का… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय भगवान् श्रीराम की लीलाओं का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! खट्वाङ्ग के पुत्र दीर्घबाहु और दीर्घबाहु के परम यशस्वी पुत्र रघु हुए । रघु के अज़ और अज के पुत्र महाराज दशरथ हुए ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय भगीरथ-चरित्र और गङ्गावतरण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अंशुमान् ने गङ्गाजी को लाने की कामना से बहुत वर्षों तक घोर तपस्या की । परन्तु उन्हें सफलता नहीं मिली, समय आने पर उनकी मृत्यु हो गयी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय सगर-चरित्र श्रीशुकदेवजी कहते हैं — रोहित का पुत्र था हरित । हरित से चम्प हुआ । उसी ने चम्पापुरी बसायी थी । चम्प से सुदेव और उसका पुत्र विजय हुआ ॥ १ ॥ विजय का भरुक,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय राजा त्रिशङ्कु और हरिश्चन्द्रकी कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! मैं वर्णन कर चुका हूँ कि मान्धाता के पुत्रों में सबसे श्रेष्ठ अम्बरीष थे । उनके दादा युवनाश्व ने उन्हें पुत्र रूप में स्वीकार कर… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय इक्ष्वाकु के वंश का वर्णन, मान्धाता और सौभरि ऋषि की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अम्बरीष के तीन पुत्र थे — विरूप, केतुमान् और शम्भु । विरूप से पृषदश्च और उसका पुत्र रथीतर हुआ… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय दुर्वासाजी की दुःखनिवृत्ति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब भगवान् ने इस प्रकार आज्ञा दी, तब सुदर्शन चक्र की ज्वाला से जलते हुए दुर्वासा लौटकर राजा अम्बरीष के पास आये और उन्होंने अत्यन्त दुखी होकर… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय नाभाग और अम्बरीष की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! मनुपुत्र नभग का पुत्र था नाभाग । जब वह दीर्घकाल तक ब्रह्मचर्य पालन करके लौटा, तब बड़े भाइयों ने अपने छोटे किन्तु विद्वान् भाई को… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय महर्षि च्यवन और सुकन्या का चरित्र, राजा शर्याति का वंश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! मनुपुत्र राजा शर्याति वेदों का निष्ठावान् विद्वान् था । उसने अङ्गिरा गोत्र के ऋषियों के यज्ञ में दूसरे दिन का… Read More