श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-25 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-25 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पचीसवाँ अध्याय मरीचि आदि महर्षियों द्वारा भगवान् शंकर का विवाह – स्वीकृति का शुभ समाचार सुनाना, विवाह के लिये वैशाख शुक्लपक्ष की पञ्चमी तिथि निश्चित होना, देवर्षि नारद द्वारा ब्रह्मादि देवताओं को विवाह का निमन्त्रण देना अथः पञ्चविंशोऽध्यायः शिवविवाहे ब्रह्मादिदेवतानिमन्त्रणं श्रीमहादेवजी बोले — गिरिराज का… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-24 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-24 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौबीसवाँ अध्याय भगवान् शंकर द्वारा पार्वती के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखना है, मरीचि आदि ऋषियों का हिमालय के पास जाकर अपनी पुत्री भगवान् शंकर को समर्पित करने का परामर्श देना तथा हिमालय द्वारा इसकी स्वीकृति देना अथ चर्तुविंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे पार्वतीविवाहोपक्रमः श्रीमहादेवजी बोले — तब… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-23 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-23 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तेईसवाँ अध्याय भगवती का काली रूप में भगवान् शंकर को दर्शन देना, भगवान् शंकर द्वारा काली के चरण कमलों को हृदय में धारण कर उनका ध्यान करना तथा सहस्रनाम (ललितासहस्रनामस्तोत्र) — द्वारा देवी की स्तुति अथ त्रयोविंशोध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे शिववक्त्रनिर्गतं ललितासहस्रनामस्तोत्रं श्रीमहादेवजी बोले — नारद !… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-22 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-22 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बाईसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का तारकासुर से पीड़ित देवताओं को भगवान् शंकर के पुत्र द्वारा उसके वध की बात बतलाना, इन्द्र द्वारा भगवान् शंकर की तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव को हिमालय पर भेजना और भगवान् शंकर की नेत्राग्नि से उसका भस्म होना अथ… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-21 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-21 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इक्कीसवाँ अध्याय शंकर जी का सती को पुनः पत्नी रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर तपस्या में स्थित होना, दोनों सखियों के साथ देवी पार्वती को लेकर हिमालय का वहाँ जाना अथ एकविंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे शिवतपोवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — उन मुनिश्रेष्ठ के चले जाने… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-20 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-20 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बीसवाँ अध्याय भगवती का विविध बालोचित लीलाओं द्वारा हिमालय तथा मेना को आनन्दित करना, देवर्षि नारद द्वारा देवी के माहात्म्य का वर्णन अथ विंशतितमोऽध्यायः महादेवनारदसंवादे नारदजी बोले — हिमवान् के घर में रहती हुई भगवती परमेश्वरी ने लीलापूर्वक योग-ध्यान में तत्पर रहने वाले भगवान् शिव… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-19 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-19 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उन्नीसवाँ अध्याय हिमालय को तत्त्व ज्ञान का उपदेश प्रदान कर देवी का सामान्य बालिका की भाँति क्रीडा करना है, गिरिराज द्वारा जन्म—महोत्सव, षष्ठी—महोत्सव तथा नामकरण आदि उत्सवों को संपादित करना है, भगवती गीता (पार्वती गीता) — के पाठ की महिमा अथ एकोनविंशतितमोऽध्यायः श्रीभगवतीगीता माहात्म्यवर्णनं श्रीमहादेवजी… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-18 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-18 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अठारहवाँ अध्याय भगवती गीता के वर्णन में मोक्ष योग का उपदेश, देवी के स्थूल स्वरुपों में दस महाविद्याओं का वर्णन है, इन स्वरुपों की आराधना से मोक्ष की प्राप्ति, अनन्य शरणागति की महिमा अथ अष्टादशोऽध्यायः श्रीपार्वतीहिमालयसंवादे मोक्षयोगोपदेशवर्णनं हिमालय बोले — देवि ! यदि आपका आश्रय… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-17 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-17 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सत्रहवाँ अध्याय भगवती गीता के वर्णन में ब्रह्मयोग का उपदेश, पाञ्चभौतिक देह, गर्भस्थ जीव का स्वरुप तथा गर्भ में की गयी जीव की प्रतिज्ञा, माया से आबद्ध जीव का गर्भ से बाहर आने पर अपने वास्तविक स्वरुप को भूल जाना, विषय भोगों की दुःखमूलता तथा… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-16 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-16 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सोलहवाँ अध्याय भगवती गीता के वर्णन में ब्रह्मविद्या का उपदेश, आत्मा का स्वरूप, अनात्मपदार्थों में आत्मबुद्धि का परित्याग, शरीर की नश्वरता का प्रतिपादन तथा अनासक्त योग का वर्णन अथ षोडशोऽध्यायः श्रीपार्वतीहिमालयसंवादे ब्रह्मविद्योपदेशवर्णनं हिमालय बोले — माता ! वह कैसी विद्या है, जिससे मुक्ति प्राप्त होती… Read More