अग्निपुराण – अध्याय 029 अग्निपुराण – अध्याय 029 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उन्तीसवाँ अध्याय मन्त्र-साधन-विधि, सर्वतोभद्रादि मण्डलों के लक्षण मंत्रसाधनविधिः सर्वतोभद्रादिमण्डललक्षणानि च नारदजी कहते हैं — मुनिवरो! साधक को चाहिये कि वह देव मन्दिर आदि में मन्त्र की साधना करे। घर के भीतर शुद्ध भूमि पर मण्डल में परमेश्वर श्रीहरि का विशेष… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 028 अग्निपुराण – अध्याय 028 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अट्ठाईसवाँ अध्याय आचार्य के अभिषेक का विधान अभिषेकविधानम् नारदजी कहते हैं — महर्षियो! अब मैं आचार्य के अभिषेक का वर्णन करूँगा, जिसे पुत्र अथवा पुत्रोपम श्रद्धालु शिष्य सम्पादित कर सकता है। इस अभिषेक से साधक सिद्धि का भागी होता है… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 027 अग्निपुराण – अध्याय 027 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सत्ताईसवाँ अध्याय शिष्यों को दीक्षा देने की विधि का वर्णन शिष्येभ्यो दीक्षादानविधिः नारदजी कहते हैं — महर्षिगण ! अब मैं सब कुछ देनेवाली दीक्षा का वर्णन करूँगा। कमलाकार मण्डल में श्रीहरि का पूजन करे। दशमी तिथि को समस्त यज्ञ सम्बन्धी… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 026 अग्निपुराण – अध्याय 026 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छब्बीसवाँ अध्याय मुद्राणां लक्षणानि नारदजी कहते हैं — मुनिगण! अब मैं मुद्राओं का लक्षण बताऊँगा। सांनिध्य [^1] (संनिधापिनी) आदि [^2] मुद्रा के प्रकार-भेद हैं। पहली मुद्रा अञ्जलि [^3] है, दूसरी वन्दनी [^4] है और तीसरी हृदयानुगा है। बायें हाथ की… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 025 अग्निपुराण – अध्याय 025 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पचीसवाँ अध्याय वासुदेव, संकर्षण आदि के मन्त्रों का निर्देश तथा एक व्यूह से लेकर द्वादश व्यूह तक के व्यूहों का एवं पञ्चविंश और षड्विंश व्यूह का वर्णन वासुदेवादिमन्त्राणां लक्षणानि नारदजी कहते हैं — ऋषियो ! अब मैं वासुदेव आदि के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 024 अग्निपुराण – अध्याय 024 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौबीसवाँ अध्याय कुण्ड-निर्माण एवं अग्नि-स्थापन-सम्बन्धी कार्य आदि का वर्णन कुण्डनिर्माणाद्यग्निकार्यादिकथनम् नारदजी कहते हैं — महर्षियो ! अब मैं अग्नि- सम्बन्धी कार्य का वर्णन करूँगा, जिससे मनुष्य सम्पूर्ण मनोवाञ्छित वस्तुओं का भागी होता है। चौबीस अङ्गुल की चौकोर भूमि को सूत… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 023 अग्निपुराण – अध्याय 023 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तेईसवाँ अध्याय देवताओ तथा भगवान् विष्णु की सामान्य पूजा-विधि सामान्य आदिमूर्त्यादिदेवतानां पूजाविधिः नारदजी बोले — ब्रह्मर्षियो! अब मैं पूजा की विधि का वर्णन करूँगा, जिसका अनुष्ठान करके मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओं को प्राप्त कर लेता है। हाथ-पैर धोकर, आसन पर बैठकर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 022 अग्निपुराण – अध्याय 022 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बाईसवाँ अध्याय पूजा के अधिकार की सिद्धि के लिये सामान्यतः स्नान विधि पूजाधिकारार्थं सामान्यः स्नानविधिः नारदजी बोले — विप्रवरो! पूजन आदि क्रियाओं के लिये पहले स्नान विधि का वर्णन करता हूँ। पहले नृसिंह-सम्बन्धी बीज या मन्त्र से [^1] मृत्तिका हाथ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 021 अग्निपुराण – अध्याय 021 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इक्कीसवाँ अध्याय विष्णु आदि देवताओं की सामान्य पूजा का विधान विष्ण्वादिदेवतानां सामान्यपूविधाजानम् नारदजी बोले — अब मैं विष्णु आदि देवताओं की सामान्य पूजा का वर्णन करता हूँ तथा समस्त कामनाओं को देने वाले पूजा-सम्बन्धी मन्त्रों को भी बतलाता हूँ। भगवान्… Read More
मुद्रा लक्षण – मुद्रा प्रकरण मुद्रा लक्षण – प्रकरणम् अर्चने जपकाले च ध्याने काम्ये च कर्मणि । स्नाने चावाहने शङ्खे प्रतिष्ठाया च रक्षणे ॥ १ ॥ नैवेद्ये च तान्यत्र तत्तत्कल्पप्रकाशिते । स्थाने मुद्राः प्रदष्टव्या स्वस्वलक्षणसंयुताः ॥ २ ॥ आवाहनादि मुद्रा नव साधारणी मताः । तथा षडङ्गमुद्राश्च सर्वमन्त्रेषु योजयेत् ॥ ३ ॥ एकोनविंशतिर्मुद्रा विष्णोरुक्ता मनीषिभिः । काममुद्रा परा ख्याता शिवस्य दश… Read More