श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय सुकन्या की पतिसेवा तथा वन में अश्विनीकुमारों से भेंट का वर्णन अश्विनीकुमारयोः सुकन्यां प्रति बोधवचनवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे जनमेजय !] राजा शर्याति के चले जाने पर सुकन्या अपने पति च्यवन-मुनि की सेवामें संलग्न हो गयी… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय अश्विनीकुमारों का च्यवनमुनि को नेत्र तथा नवयौवन से सम्पन्न बनाना अश्विभ्यां च्यवनद्वारा सोमपानाय प्रतिज्ञावर्णनम् व्यासजी बोले — उन अश्विनीकुमारों की वह बात सुनकर मितभाषिणी राजपुत्री सुकन्या थर-थर काँपने लगी और धैर्य धारण करके उनसे बोल — ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय सुकन्या का च्यवनमुनि के साथ विवाह च्यवनसुकन्ययोर्गार्हस्थ्यवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! इस घटना से अत्यन्त चिन्तित राजा शर्याति ने उन सबसे पूछने के पश्चात् शान्ति तथा उग्रतापूर्वक भी अपने बन्धुजनों से पूछा ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय सूर्यवंश के वर्णन के प्रसंग में सुकन्या की कथा की उत्पत्ति शर्यातिराजवर्णनम् जनमेजय बोले — हे महाभाग ! आप मुझसे राजाओं के वंश का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये और विशेषरूप से सूर्यवंश में उत्पन्न धर्मज्ञ राजाओं के वंश… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय पितामह ब्रह्मा की मानसी सृष्टि का वर्णन, नारदजी का दक्ष के पुत्रों को सन्तानोत्पत्ति से विरत करना और दक्ष का उन्हें शाप देना, दक्षकन्याओं से देवताओं और दानवों की उत्पत्ति सोमसूर्यवंशवर्णने दक्षप्रजापतिवर्णनं सूतजी बोले — [ हे… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-31 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-एकत्रिंशोऽध्यायः इकतीसवाँ अध्याय व्यासजी का राजा जनमेजय से भगवती की महिमा का वर्णन करना भगवतीमाहात्म्यवर्णनम् व्यासजी बोले — हे महाराज! मैंने नारदजी से योगमाया के पवित्र अक्षरों वाले जिस माहात्म्य को सुना है, उसे कहता हूँ; आप सुनें ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय राजा तालध्वज का विलाप और ब्राह्मणवेशधारी भगवान् विष्णु के प्रबोधन से उन्हें वैराग्य होना, भगवान् विष्णु का नारद से माया के प्रभाव का वर्णन करना मायाप्राबल्यवर्णनम् नारदजी बोले — मुझ विप्ररूप नारद को देखकर वे राजा तालध्वज… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-28 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-अष्टाविंशोऽध्यायः अट्ठाईसवाँ अध्याय भगवान् विष्णु का नारदजी से माया की अजेयता का वर्णन करना, मुनि नारद को मायावश स्त्री रूप की प्राप्ति तथा राजा तालध्वज का उनसे प्रणय निवेदन करना नारदेन स्वस्त्रीत्वप्राप्तिवर्णनम् नारदजी बोले — हे मुनिवर ! अब आप… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-29 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-एकोनत्रिंशोऽध्यायः उनतीसवाँ अध्याय राजा तालध्वज से स्त्रीरूपधारी नारदजी का विवाह, अनेक पुत्र -उत्पत्ति और युद्ध में उन सबकी मृत्यु, नारदजी का शोक और भगवान् विष्णु की कृपा से पुनः स्वरूपबोध नारदस्य पुनः स्वरूपप्राप्तिवर्णनम् नारदजी बोले — हे विशाम्पते! राजा तालध्वज… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-27 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-सप्तविंशोऽध्यायः सत्ताईसवाँ अध्याय वानरमुख नारद से दमयन्ती का विवाह, नारद तथा पर्वत का परस्पर शापमोचन नारदस्य मायादमयन्त्या सह विवाहवर्णनम् नारदजी बोले — धात्री के मुख से अपनी कन्या का वह वचन सुनकर राजा संजय पास ही बैठी सुन्दर नेत्रोंवाली अपनी… Read More