श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-075 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पचहत्तरवाँ अध्याय दैत्यराज सिन्धु का आख्यान, सिन्धु द्वारा दिग्विजय से सम्पूर्ण पृथ्वी को विजित करना, अमरावती पर आधिपत्य और स्वयं इन्द्रासन पर विराजमान होना अथः पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः सुरपराजय ब्रह्माजी बोले — अपने पुत्र को बुद्धिसम्पन्न और भगवान् सूर्य से प्राप्त वरदानों के कारण गर्वित जानकर उसके पिता राजा चक्रपाणि ने उसे… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-074 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौहत्तरवाँ अध्याय राजा चक्रपाणि के पुत्र सिन्धु द्वारा भगवान् सूर्य की आराधना और उनसे विभिन्न वरों की प्राप्ति अथः चतुःसप्ततितमोऽध्यायः वरप्रदानं ब्रह्माजी बोले — राजा चक्रपाणि की रानी के द्वारा समुद्र में उस गर्भ के छोड़ दिये जाने पर उस गर्भ से एक बालक उत्पन्न हुआ, जो महान् बलशाली, तेजसम्पन्न,… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-073 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तिहत्तरवाँ अध्याय गण्डकी नगराधिपति राजा चक्रपाणि का आख्यान, निःसंतान राजा को महर्षि शौनक द्वारा पुत्रप्राप्ति के लिये सौरव्रत के अनुष्ठान का उपदेश करना, राजा-रानी द्वारा सम्यग् रूप से सौरव्रत के नियमों का पालन, भगवान् सूर्य द्वारा स्वप्न में रानी को पुत्र की प्राप्ति, रानी द्वारा गर्भ के ताप को सहन… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-072 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बहत्तरवाँ अध्याय विनायक का पिता कश्यप के आश्रम में आगमन, काशिराज द्वारा विनायक की महिमा का कथन, काशिराज का काशी में प्रत्यागमन तथा दुण्डिविनायक की स्थापना, माता अदिति तथा कश्यप को आश्वासन देकर विनायक का निजलोकगमन अथः द्विसप्ततितमोऽध्यायः विनायकचरित्रकथनं ब्रह्माजी बोले — काशिराज के दूत ने विनायक की माता देवी… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-071 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इकहत्तरवाँ अध्याय काशिराज का अपने सभासदों से वार्तालाप, मगधराज की कन्या के साथ काशिराज के पुत्र का विवाह, विनायक को साथ लेकर काशिराज का महर्षि कश्यप के आश्रम में गमन, पुरवासियों का वियोग में व्यथित होना तथा विनायक द्वारा उन्हें पुनः आने का आश्वासन देना अथः एकसप्ततितमोऽध्यायः विनायकाश्रमं प्रतिगमनं ब्रह्माजी… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-070 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सत्तरवाँ अध्याय देवान्तक-वध अथः सप्ततितमोऽध्यायः बालचरिते पुरप्रवेश ब्रह्माजी बोले — भय से भ्रमित बुद्धि वाला वह देवान्तक जब ऐसा कह रहा था, तभी विनायकदेव ने उसे छोटे बालक के समान उठाकर अपनी गोद में ले लिया ॥ १ ॥ तदनन्तर गणों के स्वामी विनायक ने अपने प्रभाव से सुन्दर पद्मासन… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-069 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनहत्तरवाँ अध्याय विनायक और देवान्तक के युद्ध का वर्णन अथः एकोनसप्ततितमोऽध्यायः मायाप्रदर्शनं ब्रह्माजी कहते हैं — तब देवान्तक अत्यन्त विस्मित होकर अपने मन में विचार करने लगा कि इस विनायक का निवारण करने के लिये मैं जैसे-जैसे माया का प्रयोग कर रहा हूँ, वैसे-वैसे ही यह बालक भी अपने पुरुषार्थ… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-068 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अड़सठवाँ अध्याय विनायक और देवान्तक के युद्ध का वर्णन अथः अष्टषष्टितमोऽध्यायः भयानकास्त्रयुद्ध ब्रह्माजी कहते हैं —तदनन्तर दैत्य देवान्तक ने दो बाणों को आदरपूर्वक अभिमन्त्रित किया। उसने एक बाण को निद्रास्त्र से तथा दूसरे को गन्धर्वास्त्र से अभिमन्त्रित किया ॥ १ ॥ उसने बायें घुटने को आगेकर और धनुष की डोरी… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-067 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सड़सठवाँ अध्याय विनायक और देवान्तक का युद्ध अथः सप्तषष्टितमोऽध्यायः अस्त्रयुद्धं ब्रह्माजी कहते हैं — उस सम्पूर्ण वृत्तान्त को जानकर विनायक अपने मन में महान् आश्चर्य करने लगे। तब वे क्रोधित तथा युद्ध के लिये उद्यत होकर सिंह पर सवार हुए। तदनन्तर उन्होंने अपने गर्जन से आकाश और दिशाओं को ध्वनित… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-066 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छाछठवाँ अध्याय देवान्तक का अघोरमन्त्र से हवनकर दिव्य अश्व पाना और उस पर आरूढ़ हो रणक्षेत्र में जाना तथा सिद्धियों की सम्पूर्ण सेना का संहार कर डालना अथः षट्षष्टितमोऽध्यायः सिद्धिपराजय ब्रह्माजी कहते हैं — शारदा और रौद्रकेतु ने अपने पुत्र देवान्तक को रात में अकेले [लौटा हुआ] देखकर उसका आलिंगनकर… Read More