श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-31 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इकतीसवाँ अध्याय कुमार कार्तिकेय का तारकासुर के विनाश के लिए ससैन्य उद्यत होना, ब्रह्माजी द्वारा उन्हें वाहन के रूप में “मयूर” तथा अमोघ शक्ति प्रदान करना, कार्तिकेय को देवसेना का सेनापतित्व प्राप्त होने आदि का वर्णन अथः एकत्रिंशत्तमोऽध्यायः तारकासुर संग्रामे कुमारागमनवर्णनं नारदजी बोले — महादेव… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-30 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तीसवाँ अध्याय देवताओं द्वारा देवी पार्वती की स्तुति, भगवान् शंकर के तेज से षण्मुख कार्तिकेय का प्रादुर्भाव, देवताओं के हर्षोल्लास का वर्णन अथः त्रिंशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे कार्तिकेयजन्मवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — मुने ! तदनन्तर देवतागण अत्यन्त आश्चर्यचकित होकर जगत् के प्राणियों में लज्जारूप से विराजमान जगदम्बा पार्वती… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-29 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उनतीसवाँ अध्याय शिव-पार्वती का एकान्त-विहार है, पृथ्वी देवी का गोरूप धारण कर देवताओं के साथ ब्रह्माजी के पास जाना, ब्रह्माजी का उन्हें आश्वस्त करना और कुमार कार्तिकेय के प्रादुर्भाव होने की बात बताना अथः एकोनत्रिंशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीशिवपार्वती विहारवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — [मुने !] पार्वती… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-28 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अठ्ठाईसवाँ अध्याय हिमालय द्वारा बारात का यथोचित सत्कार करना है, शिव-पार्वती के माङ्लिक विवाहोत्सव का वर्णन, शिव-पार्वती के विवाहोत्सव के पाठ की महिमा अथः अष्टाविंशतितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीशिवस्य हिमालयपुर आगमनं श्रीमहादेवजी बोले — इसके बाद महेश्वर को आया हुआ जानकर गिरिराज हिमालय ने वहाँ आकर उनकी… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-27 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सत्ताईसवाँ अध्याय ब्रह्मा, विष्णु तथा रति द्वारा प्रार्थना करने पर भगवान् शंकर का कामदेव को पुनः जीवित करना, ब्रह्माजी के निवेदन पर भगवान् शंकर का विवाह के लिए सौम्यरूप धारण करना और बड़े उल्लास के साथ शिव-बारात के प्रस्थान का वर्णन अथः सप्तविंशतितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीशिवस्य… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-26 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छब्बीसवाँ अध्याय हिमालय के घर में विवाह का उपक्रम प्रारम्भ, भगवान् शंकर के यहाँ सभी देवताओं के आगमन पर हर्षोल्लास अथः षडविंशतितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे शिवविवाहोत्सवे देवतासमागमः श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! उसके बाद गिरिराज हिमालय के नगर में संसार का आनन्दवर्धन करने वाला पार्वती-विवाहोत्सव प्रारम्भ हो… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-25 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पचीसवाँ अध्याय मरीचि आदि महर्षियों द्वारा भगवान् शंकर का विवाह – स्वीकृति का शुभ समाचार सुनाना, विवाह के लिये वैशाख शुक्लपक्ष की पञ्चमी तिथि निश्चित होना, देवर्षि नारद द्वारा ब्रह्मादि देवताओं को विवाह का निमन्त्रण देना अथः पञ्चविंशोऽध्यायः शिवविवाहे ब्रह्मादिदेवतानिमन्त्रणं श्रीमहादेवजी बोले — गिरिराज का… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-24 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौबीसवाँ अध्याय भगवान् शंकर द्वारा पार्वती के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखना है, मरीचि आदि ऋषियों का हिमालय के पास जाकर अपनी पुत्री भगवान् शंकर को समर्पित करने का परामर्श देना तथा हिमालय द्वारा इसकी स्वीकृति देना अथ चर्तुविंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे पार्वतीविवाहोपक्रमः श्रीमहादेवजी बोले — तब… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-23 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तेईसवाँ अध्याय भगवती का काली रूप में भगवान् शंकर को दर्शन देना, भगवान् शंकर द्वारा काली के चरण कमलों को हृदय में धारण कर उनका ध्यान करना तथा सहस्रनाम (ललितासहस्रनामस्तोत्र) — द्वारा देवी की स्तुति अथ त्रयोविंशोध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे शिववक्त्रनिर्गतं ललितासहस्रनामस्तोत्रं श्रीमहादेवजी बोले — नारद !… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-22 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बाईसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का तारकासुर से पीड़ित देवताओं को भगवान् शंकर के पुत्र द्वारा उसके वध की बात बतलाना, इन्द्र द्वारा भगवान् शंकर की तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव को हिमालय पर भेजना और भगवान् शंकर की नेत्राग्नि से उसका भस्म होना अथ… Read More