अग्निपुराण – अध्याय 146 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छियालीसवाँ अध्याय त्रिखण्डी – मन्त्र का वर्णन, पीठस्थान पर पूजनीय शक्तियों तथा आठ अष्टक देवियों का कथन अष्टाष्टकदेव्यः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश्वर से सम्बन्ध रखनेवाली त्रिखण्डी का वर्णन करूँगा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 145 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पैंतालीसवाँ अध्याय मालिनी आदि नाना प्रकार के मन्त्र और उनके षोढा-न्यास मालिनीनानामन्त्राः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं छः प्रकार के न्यासपूर्वक नाना प्रकार के मन्त्रों का वर्णन करूँगा। ये छहों प्रकार के न्यास ‘शाम्भव’,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 144 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौंवालीसवाँ अध्याय कुब्जिका की पूजा-विधि का वर्णन कुब्जिकापूजा भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं धर्म, अर्थ, काम तथा विजय प्रदान करने वाली श्रीमती कुब्जिकादेवी के मन्त्र का वर्णन करूंगा। परिवारसहित मूलमन्त्र से उनकी पूजा करनी… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 143 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तैंतालीसवाँ अध्याय कुब्जिका सम्बन्धी न्यास एवं पूजन की विधि कुब्जिकापूजा महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं कुब्जिका की क्रमिक पूजा का वर्णन करूँगा, जो समस्त मनोरथों को सिद्ध करने वाली है। ‘कुब्जिका’ वह शक्ति है, जिसकी… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 142 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बयालीसवाँ अध्याय चोर और जातक का निर्णय, शनि दृष्टि, दिन-राहु, फणि-राहु, तिथि-राहु तथा विष्टि-राहु के फल और अपराजिता-मन्त्र एवं ओषधि का वर्णन मन्त्रौषधादिः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं मन्त्र- चक्र तथा औषध चक्रों का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 141 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इकतालीसवाँ अध्याय छत्तीस कोष्ठों में निर्दिष्ट ओषधियों के वैज्ञानिक प्रभाव का वर्णन षट्त्रिंशत्पदकज्ञानम् महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं छत्तीस पदों (कोष्ठकों) में स्थापित की हुई ओषधियों का फल बताता हूँ। इन ओषधियों के सेवन से… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 140 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चालीसवाँ अध्याय वश्य आदि योगों का वर्णन वश्यादियोगाः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं वशीकरण आदि के योगों का वर्णन करूँगा। निम्नाङ्कित ओषधियों को सोलह कोष्ठवाले चक्र में अङ्कित करे — भृङ्गराज (भँगरैया), सहदेवी (सहदेइया),… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 139 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ उन्तालीसवाँ अध्याय साठ संवत्सरों में मुख्य-मुख्य के नाम एवं उनके फल-भेद का कथन षष्टिसंवत्सराः भगवान् महेश्वर कहते हैं — पार्वति! अब मैं साठ संवत्सरों (में से कुछ) के शुभाशुभ फल को कहता हूँ, ध्यान देकर सुनो। ‘प्रभव’ संवत्सर… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 138 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अड़तीसवाँ अध्याय तन्त्रविषयक छः कर्मों का वर्णन षट्कर्माणि महादेवजी कहते हैं — पार्वती! सभी मन्त्रों के साध्यरूप से जो छः कर्म कहे गये हैं, उनका वर्णन करता हूँ, सुनो। शान्ति, वश्य, स्तम्भन, द्वेष, उच्चाटन और मारण — ये… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 137 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सैंतीसवाँ अध्याय महामारी विद्या का वर्णन युद्धजयार्णवे महामारी महेश्वर कहते हैं — देवि ! अब मैं महामारी-विद्या का वर्णन करूँगा, जो शत्रुओं का मर्दन करनेवाली है ॥ १ ॥ महामारीविद्या मंत्र ॐ ह्रीं महामारि रक्ताक्षि कृष्णवर्णे यमस्याज्ञाकारिणि सर्वभूतसंहारकारिणि… Read More