अग्निपुराण – अध्याय 046 अग्निपुराण – अध्याय 046 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छियालीसवाँ अध्याय शालग्राम-मूर्तियों के लक्षण शालग्रामादिमूर्तिनां लक्षणानि भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं शालग्रामगत भगवन् मूर्तियों का वर्णन आरम्भ करता हूँ, जो भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। जिस शालग्राम शिला के द्वार में दो चक्र… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 045 अग्निपुराण – अध्याय 045 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय पिण्डिका आदि के लक्षण का वर्णन पिण्डिकालक्षणकथनम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं पिण्डिका का लक्षण बता रहा हूँ। पिण्डिका लंबाई में प्रतिमा के समान ही होती है, परंतु उसकी ऊँचाई प्रतिमा से आधी होती… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 044 अग्निपुराण – अध्याय 044 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौवालीसवाँ अध्याय वासुदेव आदि की प्रतिमाओं के लक्षण का वर्णन वासुदेवादिप्रातिमालक्षणविधिः भगवान् हयग्रीव बोले — ब्रह्मन् ! अब मैं तुम्हें वासुदेव आदि की प्रतिमा के लक्षण बताता हूँ सुनो। मन्दिर के उत्तर भाग में शिला को पूर्वाभिमुख अथवा उत्तराभिमुख रखकर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 043 अग्निपुराण – अध्याय 043 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय मन्दिर के देवता की स्थापना और भूतशान्ति आदि का कथन का वर्णन प्रासाददेवतास्थापनम् भूतशान्त्यादिकथनम् हयग्रीवजी कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं मन्दिर में स्थापित करने योग्य देवताओं का वर्णन करूँगा, आप सुनें। पञ्चायतन मन्दिर में जो बीच… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 042 अग्निपुराण – अध्याय 042 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बयालीसवाँ अध्याय प्रासाद लक्षण वर्णन प्रासादलक्षणकथनम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं सर्वसाधारण प्रासाद (देवालय) का वर्णन करता हूँ, सुनो। विद्वान् पुरुष को चाहिये कि जहाँ मन्दिर का निर्माण कराना हो, वहाँ के चौकोर क्षेत्र के सोलह… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 041 अग्निपुराण – अध्याय 041 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इकतालीसवाँ अध्याय शिलान्यास की विधि शिलादिन्यासविधानम् भगवान् हयग्रीव बोले — अब मैं शिलान्यास स्वरूपा पाद-प्रतिष्ठा का वर्णन करूंगा। पहले मण्डप बनाना चाहिये; फिर उसमें चार कुण्ड बनावे। वे कुण्ड क्रमशः कुम्भन्यास[^1] , इष्टकान्यास[^2] , द्वार और खम्भे के शुभ आश्रय… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 040 अग्निपुराण – अध्याय 040 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चालीसवाँ अध्याय वास्तुमण्डलवर्ती देवताओं के स्थापन, पूजन, अर्घ्यदान तथा बलिदान आदि की विधि वास्तुमण्डलदेवतास्थापनपूजनार्घ्य-दानबलिदानादिविधानादिकथनम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! पूर्वकाल में सम्पूर्ण भूत-प्राणियों के लिये भयंकर एक महाभूत था। देवताओं ने उसे भूमि में निहित कर दिया। उसी… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 039 अग्निपुराण – अध्याय 039 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उन्तालीसवाँ अध्याय विष्णु आदि देवताओं की स्थापना के लिये भूपरिग्रह का विधान विष्ण्वादिदेवताप्रतिष्ठाने भूपरिग्रहविधानम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं विष्णु आदि देवताओं की प्रतिष्ठा के विषय में कहूँगा, ध्यान देकर सुनिये। इस विषय में मेरे द्वारा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 038 अग्निपुराण – अध्याय 038 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अड़तीसवाँ अध्याय देवालय निर्माण से प्राप्त होनेवाले फल आदि का वर्णन देवालयनिर्माणफलादि अग्निदेव कहते हैं — मुनिवर वसिष्ठ ! भगवान् वासुदेव आदि विभिन्न देवताओं के निमित्त मन्दिर का निर्माण कराने से जिस फल आदि की प्राप्ति होती है, अब मैं… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 037 अग्निपुराण – अध्याय 037 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सैंतीसवाँ अध्याय संक्षेप से समस्त देवताओं के लिये साधारण पवित्रारोपण की विधि का वर्णन संक्षेपतः सर्वदेवसाधारणः पवित्रारोपणविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुने! अब संक्षेप से समस्त देवताओं के लिये पवित्रारोपण की विधि सुनो। पहले जो चिह्न कहे गये हैं, उन्हीं… Read More