अग्निपुराण – अध्याय 056 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छप्पनवाँ अध्याय प्रतिष्ठा के अङ्गभूत मण्डप निर्माण, तोरण-स्तम्भ, कलश एवं ध्वज के स्थापन तथा दस दिक्पाल याग का वर्णन दिक्‌पालयागकथनम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! मैं प्रतिष्ठा के पाँच अङ्गों का वर्णन करूँगा। प्रतिमा पुरुष का प्रतीक है… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 055 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पचपनवाँ अध्याय पिण्डिका का लक्षण का वर्णन पिण्डिकालक्षणकथनम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं प्रतिमाओं की पिण्डिका का लक्षण बता रहा हूँ। पिण्डिका लंबाई में तो प्रतिमा के बराबर होनी चाहिये और चौड़ाई में उससे आधी उसकी… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 054 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौवनवाँ अध्याय लिङ्ग-मान एवं व्यक्ताव्यक्त लक्षण आदि का वर्णन लिङ्गमानादिकथनम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं दूसरे प्रकार से लिङ्ग आदि का वर्णन करता हूँ, सुनो, लवण तथा घृत से निर्मित शिवलिङ्ग बुद्धि को बढ़ाने वाला होता… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 053 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तिरपनवाँ अध्याय लिङ्ग [^1]  आदि का लक्षण का वर्णन लिङ्गलक्षणम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — कमलोद्भव ! अब मैं लिङ्ग आदि का लक्षण बताता हूँ, सुनो। लंबाई के आधे में आठ से भाग देकर आठ भागों में से तीन भाग… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 052 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बावनवाँ अध्याय चौंसठ योगिनी आदि की प्रतिमाओं के लक्षण का वर्णन देवीप्रतिमालक्षणम् श्रीभगवान् बोले — ब्रह्मन् ! अब मेँ चाँसठ योगिनियों का वर्णन करूँगा। इनका स्थान क्रमशः पूर्वदिशा से लेकर ईशानपर्यन्त है। इनके नाम इस प्रकार हैं — १. अक्षोभ्या,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 051 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इक्यावनवाँ अध्याय सूर्यादि ग्रहों तथा दिक्पाल आदि देवताओं की प्रतिमाओं के लक्षणों का वर्णन सूर्य्यादिप्रतिमालक्षणम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! सात अश्वों से जुते हुए एक पहिये वाले रथ पर विराजमान सूर्यदेव की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिये… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 050 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पचासवाँ अध्याय चण्डी आदि देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के लक्षण मत्स्यादिदशावतारप्रतिमालक्षणवर्णनम् श्रीभगवान् बोले — चण्डी बीस भुजाओं से विभूषित होती है। वह अपने दाहिने हाथों में शूल, खड्ग, शक्ति, चक्र, पाश, खेट, आयुध, अभय, डमरू और शक्ति धारण करती है। बायें… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 049 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उनचासवाँ अध्याय मत्स्यादि दशावतारों की प्रतिमाओं के लक्षणों का वर्णन मत्स्यादिदशावतारप्रतिमालक्षणवर्णनम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं तुम्हें मत्स्य आदि दस अवतार विग्रहों का लक्षण बताता हूँ। मत्स्य भगवान्‌ की आकृति मत्स्य के समान और कूर्म भगवान्‌… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 048 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय चतुर्विंशति मूर्तिस्तोत्र एवं द्वादशाक्षर स्तोत्र चतुर्विंशतिमूर्तिस्तोत्रकथनम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! ओंकारस्वरूप केशव अपने हाथों में पद्य, शङ्ख, चक्र और गदा धारण करने वाले हैं ।[^1]  नारायण शङ्ख, पद्म, गदा और चक्र धारण करते हैं, मैं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 047 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सैंतालीसवाँ अध्याय शालग्राम-विग्रहों की पूजा का वर्णन शालग्रामादिपूजाकथनम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं तुम्हारे सम्मुख पूर्वोक्त चक्राङ्कित शालग्राम-विग्रहों की पूजा का वर्णन करता हूँ, जो सिद्धि प्रदान करने वाली है। श्रीहरि की पूजा तीन प्रकार की… Read More