अग्निपुराण – अध्याय 076 अग्निपुराण – अध्याय 076 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छिहत्तरवाँ अध्याय चण्ड की पूजा का वर्णन चण्डपूजाकथनम् महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! तदनन्तर शिवविग्रह के निकट जाकर साधक इस प्रकार प्रार्थना करे — ‘भगवन्! मेरे द्वारा जो पूजन और होम आदि कार्य सम्पन्न हुआ है, उसे तथा उसके… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 075 अग्निपुराण – अध्याय 075 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पचहत्तरवाँ अध्याय शिवपूजा के अङ्गभूत होम की विधि अग्निस्थापनादिप्रतिष्ठाकथनम् भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! पूजन के पश्चात् अपने शरीर को वस्त्र आदि से आवृत करके हाथ में अर्घ्यपात्र लिये उपासक अग्निशाला में जाय और दिव्यदृष्टि से यज्ञ के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 074 अग्निपुराण – अध्याय 074 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौहत्तरवाँ अध्याय शिव पूजा की विधि शिवपूजाकथनम् महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं शिव-पूजा की विधि बताऊँगा। आचमन ( एवं स्नान आदि) करके प्रणव का जप करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दे। फिर पूजा मण्डप के द्वार को… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 073 अग्निपुराण – अध्याय 073 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तिहत्तरवाँ अध्याय सूर्यदेव की पूजा-विधि का वर्णन सूर्यपूजाविधिः महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं करन्यास और अङ्गन्यासपूर्वक सूर्यदेवता के पूजन की विधि बताऊँगा। ‘मैं तेजोमय सूर्य हूँ’ — ऐसा चिन्तन करके अर्घ्य पूजन करे। लाल रंग के चन्दन… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 072 अग्निपुराण – अध्याय 072 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इकहत्तरवाँ अध्याय गणपतिपूजन की विधि गणेशपूजाविधिः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं नित्य नैमित्तिक आदि स्नान, संध्या और प्रतिष्ठा सहित पूजा का वर्णन करूँगा। किसी तालाब या पोखरे से अस्त्रमन्त्र (फट्) के उच्चारणपूर्वक आठ अङ्गुल गहरी मिट्टी… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 071 अग्निपुराण – अध्याय 071 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इकहत्तरवाँ अध्याय गणपतिपूजन की विधि गणेशपूजाविधिः भगवान् महेश्वर ने कहा — कार्तिकेय ! मैं विघ्नों के विनाश के लिये गणपतिपूजा की विधि बतलाता हूँ, जो सम्पूर्ण अभीष्ट अर्थो को सिद्ध करनेवाली है। ‘गणंजयाय स्वाहा० ‘ – हृदय, ‘एकदंष्ट्राय हुं फट्’… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 070 अग्निपुराण – अध्याय 070 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सत्तरवाँ अध्याय वृक्षों की प्रतिष्ठा की विधि वृक्षादि प्रतिष्ठाप्रकरणं श्रीभगवान् कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं वृक्षप्रतिष्ठा का वर्णन करता हूँ, जो भोग एवं मोक्ष प्रदान करने वाली है। वृक्षों को सर्वोषधिजल से लिप्त, सुगन्धित चूर्ण से विभूषित तथा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 069 अग्निपुराण – अध्याय 069 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उनहत्तरवाँ अध्याय स्नपनोत्सव के विस्तार का वर्णन स्नानविधानं अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं स्नपनोत्सव का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ। प्रासाद के सम्मुख मण्डप के नीचे मण्डल में कलशों का न्यास करे। प्रारम्भकाल में तथा सम्पूर्ण कर्मो को… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 068 अग्निपुराण – अध्याय 068 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अड़सठवाँ अध्याय उत्सव – विधि का कथन यात्रोत्सवविधिकथनं श्रीभगवान् कहते हैं — अब मैं उत्सव की विधि का वर्णन करता हूँ। देवस्थापन होने के पश्चात् उसी वर्ष में एकरात्र, त्रिरात्र या अष्टरात्र उत्सव मनावे; क्योंकि उत्सव के बिना देवप्रतिष्ठा निष्फल… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 067 अग्निपुराण – अध्याय 067 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सड़सठवाँ अध्याय जीर्णोद्धार–विधि जीर्णोद्धारविधानं श्रीभगवान् कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं जीर्णोद्धार की विधि बतलाता हूँ। आचार्य मूर्ति को विभूषित करके स्नान करावे। अत्यन्त जीर्ण, अङ्गहीन, भग्न तथा शिलामात्रावशिष्ट (विशेष चिह्न से रहित) प्रतिमा का परित्याग करे। उसके स्थान… Read More