अग्निपुराण – अध्याय 086 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छियासीवाँ अध्याय निर्वाण–दीक्षा के अन्तर्गत विद्याकला के शोधन विद्याविशोधनविधानम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! पूर्ववर्तिनी कला-प्रतिष्ठा के साथ विद्याकला का संधान करे तथा पूर्ववत् उसमें तत्त्व-वर्ण आदि का चिन्तन भी करे। उसके लिये मन्त्र इस प्रकार है —… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 085 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पचासीवाँ अध्याय निर्वाण–दीक्षा के अन्तर्गत प्रतिष्ठाकला के शोधन की विधि का वर्णन प्रतिष्ठाकलाशोधनोक्तिः भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! तदनन्तर शुद्ध और अशुद्ध कलाओं का शान्त और नादान्तसंज्ञक ह्रस्व-दीर्घ प्रयोग द्वारा संधान करे। संधान का मन्त्र इस प्रकार है… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 084 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौरासीवाँ अध्याय निर्वाण–दीक्षा के अन्तर्गत निवृत्तिकला शोधन की विधि निवृत्तिकलाशोधनविधिः भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! तदनन्तर प्रातः काल उठकर गुरु स्नान आदि से निवृत्त हो शिष्यों से उनके द्वारा देखे गये स्वप्न को पूछे। स्वप्न में दही, ताजा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 083 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तिरासीवाँ अध्याय निर्वाण दीक्षा के अन्तर्गत अधिवासन की विधि निर्वाणदीक्षाकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — षडानन स्कन्द ! तदनन्तर निर्वाण- दीक्षा में पाशबन्धन-शक्ति के लिये और ताड़न आदि के लिये मूल मन्त्र आदि का दीपन करे। उस समय प्रत्येक के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 082 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बयासीवाँ अध्याय समय- दीक्षा के अन्तर्गत संस्कार- दीक्षा की विधि का वर्णन संस्कारदीक्षाकथनम् भगवान् शिव कहते हैं — षडानन! अब मैं संस्कार-दीक्षा की विधि का वर्णन करूँगा, सुनो — अग्नि में स्थित महेश्वर के शिवा- शिवमय (अर्ध- नारीश्वर ) रूप… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 081 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इक्यासीवाँ अध्याय समयाचार–दीक्षा की विधि समयदीक्षाविधानम् भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं भोग और मोक्ष की सिद्धि के लिये दीक्षा की विधि बताऊँगा, जो समस्त पापों का नाश करने वाली है तथा जिसके द्वारा मल और माया… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 080 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अस्सीवाँ अध्याय दमनकारोपण की विधि दमनकारोहणाविधिः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं दमनकारोपण की विधि का वर्णन करूँगा। इसमें भी सब कार्य पूर्ववत् करने चाहिये। प्राचीन काल में भगवान् शंकर के कोप से भैरव की उत्पत्ति हुई।… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 079 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उन्यासीवाँ अध्याय पवित्रारोपण की विधि पवित्रारोहणविधिः महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! तदनन्तर प्रातः काल उठकर स्नान करके एकाग्रचित्त हो संध्या-पूजन का नियम पूर्ण करके मन्त्र-साधक यज्ञमण्डप में प्रवेश करे और जिनका विसर्जन नहीं किया गया है, ऐसे इष्टदेव भगवान्… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 078 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अठहत्तरवाँ अध्याय पवित्राधिवासन की विधि पवित्राधिवासनकथनम् भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं पवित्रारोहण का वर्णन करूँगा, जो क्रिया, योग तथा पूजा आदि में न्यूनता की पूर्ति करने वाला है। जो पवित्रारोहण कर्म नित्य किया जाता है, उसे… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 077 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सतहत्तरवाँ अध्याय घर की कपिला गाय, चूल्हा, चक्की, ओखली, मूसल, झाडू और खंभे आदि का पूजन एवं प्राणाग्निहोत्र की विधि कपिलादिपूजाविधानम् भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब कपिला पूजन के विषय में कहूँगा। निम्नाङ्कित मन्त्रों से गोमाता का… Read More