अग्निपुराण – अध्याय 106 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छठा अध्याय नगर आदि वास्तु का वर्णन नगरादिवास्तुः भगवान् महेश्वर कहते हैं — कार्तिकेय ! अब मैं राज्यादि की अभिवृद्धि के लिये नगर–वास्तु का वर्णन करता हूँ। नगर-निर्माण के लिये एक योजन या आधी योजन भूमि ग्रहण करे।… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 105 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पाँचवाँ अध्याय नगर, गृह आदि की वास्तु-प्रतिष्ठा विधि गृहादिवास्तु भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! नगर, ग्राम तथा दुर्ग आदि में गृहों और प्रासादों की वृद्धि हो, इसकी सिद्धि के लिये इक्यासी पदों का वास्तुमण्डल बनाकर उसमें… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 104 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चारवाँ अध्याय मंदिर प्रासाद के लक्षण सामान्यप्रासादलक्षणं भगवान् शंकर कहते हैं — ध्वजा में मयूर का चिह्न धारण करनेवाले स्कन्द ! अब मैं प्रासाद – सामान्य का लक्षण कहता हूँ। चौकोर क्षेत्र के चार क्षेत्र के भाग करके… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 103 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तीनवाँ अध्याय शिवलिङ्ग आदि के जीर्णोद्धार की विधि जीर्णोद्धार विधि भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! जीर्ण आदि लिङ्गों के विधिवत् उद्धार का प्रकार बता रहा हूँ। जिसका चिह्न मिट गया हो, जो टूट-फूट गया हो, मैल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 102 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ दोवाँ अध्याय ध्वजारोपण की विधि ध्वजारोपणम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! देव- मन्दिर में शिखर, ध्वजदण्ड एवं ध्वज की प्रतिष्ठा जिस प्रकार बतायी गयी है, उसका तुमसे वर्णन करता हूँ। शिखर के आधे भाग में शूल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 101 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ एकवाँ अध्याय प्रासाद-प्रतिष्ठा की विधि प्रासादप्रतिष्ठाकथनम् भगवान शिव कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं प्रासाद (मन्दिर) की स्थापना का वर्णन करता हूँ। उसमें चैतन्य का सम्बन्ध दिखा रहा हूँ। जहाँ मन्दिर के गुंबज की समाप्ति होती है,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 100 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सौवाँ अध्याय द्वार प्रतिष्ठा की विधि द्वारप्रतिष्ठाकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं द्वारगत प्रतिष्ठा की विधि का वर्णन करूँगा। द्वार के अङ्गभूत उपकरणों का कसैले जल आदि से संस्कार करके उन्हें शय्या पर रखे। द्वार के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 099 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ निन्यानबेवाँ अध्याय सूर्यदेव की स्थापना की विधि सूर्यप्रतिष्ठाकथनं भगवान् शिव बोले — स्कन्द ! अब मैं सूर्यदेव की प्रतिष्ठा का वर्णन करूंगा। पूर्ववत् मण्डप-निर्माण और स्नान आदि कार्य का सम्पादन करके, पूर्वोक्त विधि से विद्या तथा साङ्ग सूर्यदेव का आसन… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 098 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अट्ठानबेवाँ अध्याय गौरी प्रतिष्ठा की विधि गौरीप्रतिष्ठाकथनम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं पूजासहित गौरी की प्रतिष्ठा का वर्णन करूँगा, सुनो। पूर्ववत् मण्डप आदि की रचना करके देवी की स्थापना एवं शय्याधिवासन करे। पूर्वोक्त मन्त्रों और मूर्त्यादिकों… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 097 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सत्तानबेवाँ अध्याय शिव प्रतिष्ठा की विधि शिवप्रतिष्ठाकथनम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! प्रातः काल नित्य कर्म के अनन्तर द्वार देवताओं का पूजन करके मण्डप में प्रवेश करे। पूर्वोक्त विधि से देहशुद्धि आदि का अनुष्ठान करे। दिक्पालों का शिव-… Read More