अग्निपुराण – अध्याय 096 अग्निपुराण – अध्याय 096 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छियानबेवाँ अध्याय प्रतिष्ठा में अधिवास की विधि अधिवासनविधिः भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! पुरोहित को चाहिये कि वह स्नान करके प्रातः काल और मध्याह्नकाल, दोनों समय का नित्यकर्म सम्पन्न करके मूर्तिरक्षक सहायक ब्राह्मणों के साथ यज्ञमण्डप को पधारे।(मूर्तिभिर्जापिभिर्विप्रैः… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 095 अग्निपुराण – अध्याय 095 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पंचानबेवाँ अध्याय प्रतिष्ठा सामग्री की विधि प्रतिष्ठासामग्रीविधानम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं मन्दिर में लिङ्ग स्थापना की विधि का वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष को देने वाली है। यदि मुक्ति के लिये लिङ्ग प्रतिष्ठा करनी… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 094 अग्निपुराण – अध्याय 094 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौरानबेवाँ अध्याय शिलान्यास की विधि शिलाविन्यासविधानम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! ईशान आदि कोणों में वास्तुमण्डल के बाहर पूर्ववत् चर की आदि का पूजन करे। प्रत्येक देवता के लिये क्रमशः तीन-तीन आहुतियाँ दे । भूतबलि देकर नियत लग्न… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 093 अग्निपुराण – अध्याय 093 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तिरानबेवाँ अध्याय वास्तु पूजा विधि वास्तुपूजादिविधानम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! तदनन्तर प्रासाद को आसूत्रित करके वास्तुमण्डल की रचना करे । समतल चौकोर क्षेत्र में चौंसठ कोष्ठ बनावे। कोनों में दो वंशों का विन्यास करे। विकोणगामिनी आठ रज्जुएँ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 092 अग्निपुराण – अध्याय 092 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बानबेवाँ अध्याय प्रतिष्ठा के अङ्गभूत शिलान्यास की विधि का वर्णन प्रतिष्ठाविधिकथनम् भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं संक्षेप से और क्रमशः प्रतिष्ठा का वर्णन करूँगा । पीठ शक्ति है और लिङ्ग शिव। इन दोनों (पीठ और लिङ्ग… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 091 अग्निपुराण – अध्याय 091 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इक्यानबेवाँ अध्याय देवार्चन की महिमा तथा विविध मन्त्र एवं मण्डल का कथन विविधमन्त्रादिकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! अभिषेक हो जाने पर दीक्षित पुरुष शिव, विष्णु तथा सूर्य आदि देवताओं का पूजन करे। जो शङ्ख, भेरी आदि वाद्यों… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 090 अग्निपुराण – अध्याय 090 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ नब्बेवाँ अध्याय अभिषेक आदि की विधि का वर्णन अभिषेकादिकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द! शिव का पूजन करके गुरु शिष्य आदि का अभिषेक करे । इससे शिष्य को श्री की प्राप्ति होती है। ईशान आदि आठ दिशाओं में आठ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 089 अग्निपुराण – अध्याय 089 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ नवासीवाँ अध्याय एकतत्त्व – दीक्षा की विधि एकतत्त्वदीक्षाकथनम् [^1] भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! अब लघु होने के कारण एकतात्त्वि की दीक्षा का उपदेश दिया जाता है। यथावसर यथोचित रीति से स्वकीय मन्त्र द्वारा सूत्रबन्ध आदि कर्म करे।… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 088 अग्निपुराण – अध्याय 088 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अठासीवाँ अध्याय निर्वाण–दीक्षा की अवशिष्ट विधि का वर्णन निर्वाणदीक्षाकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! विशुद्ध शान्तिकला के साथ शान्त्यतीतकला का संधान करे। उसमें भी पूर्ववत् तत्त्व और वर्ण आदि का चिन्तन करना चाहिये, जैसा कि नीचे बताया जाता… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 087 अग्निपुराण – अध्याय 087 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सतासीवाँ अध्याय निर्वाण–दीक्षा के अन्तर्गत शान्तिकला का शोधन शान्तिशोधनकथनम् भगवान् शंकर कहते हैं — स्कन्द ! पूर्वोक्त मार्ग से विद्याकला का शान्तिकला के साथ विधिपूर्वक संधान करे। उसके लिये मन्त्र है — ॐ हां हूं हां।’ शान्तिकला में दो तत्त्व… Read More