अग्निपुराण – अध्याय 116 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सोलहवाँ अध्याय गया में श्राद्ध की विधि गयाश्राद्धविधिः अग्निदेव कहते हैं — गायत्री मन्त्र से ही महानदी में स्नान करके संध्योपासना करे। प्रातःकाल गायत्री के सम्मुख किया हुआ श्राद्ध और पिण्डदान अक्षय होता है। सूर्योदय के समय तथा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 115 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पंद्रहवाँ अध्याय गया–यात्रा की विधि गयायात्राविधिः अग्निदेव कहते हैं — यदि मनुष्य गया जाने को उद्यत हो तो विधिपूर्वक श्राद्ध करके तीर्थयात्री का वेष धारणकर अपने गाँव की परिक्रमा कर ले: फिर प्रतिदिन पैदल यात्रा करता रहे। मन… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 114 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौदहवाँ अध्याय गया-माहात्म्य गयामाहात्म्यम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं गया के माहात्म्य का वर्णन करूँगा। गया श्रेष्ठ तीर्थों में सर्वोत्तम है। एक समय की बात है — गय नामक असुर ने बड़ी भारी तपस्या आरम्भ की। उससे… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 113 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तेरहवाँ अध्याय नर्मदा माहात्म्य नर्मदादिमाहात्म्यम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं नर्मदा आदि का माहात्म्य बताऊँगा । नर्मदा श्रेष्ठ तीर्थ है। गङ्गा का जल स्पर्श करने पर मनुष्य को तत्काल पवित्र करता है, किंतु नर्मदा का जल दर्शनमात्र… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 112 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बारहवाँ अध्याय वाराणसी माहात्म्य वाराणसीमाहात्म्यम् अग्निदेव कहते हैं — वाराणसी परम उत्तम तीर्थ है। जो वहाँ श्रीहरि का नाम लेते हुए निवास करते हैं, उन सबको वह भोग और मोक्ष प्रदान करता है। महादेवजी ने पार्वती से उसका… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 111 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ ग्यारहवाँ अध्याय प्रयाग-माहात्म्य प्रयागमाहात्म्यं अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं प्रयाग का माहात्म्य बताता हूँ, जो भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाला तथा उत्तम है। प्रयाग में ब्रह्मा, विष्णु आदि देवता तथा बड़े-बड़े मुनिवर निवास करते हैं।… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 110 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ दसवाँ अध्याय गङ्गाजी की महिमा गङ्गामाहात्म्यं अग्निदेव कहते हैं — अब गङ्गा का माहात्म्य बतलाता हूँ। गङ्गा का सदा सेवन करना चाहिये । वह भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। जिनके बीच से गङ्गा बहती हैं, वे… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 109 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ नौवाँ अध्याय तीर्थ माहात्म्य तीर्थमाहात्म्यम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं सब तीर्थों का माहात्म्य बताऊँगा, जो भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला है। जिसके हाथ, पैर और मन भली-भाँति संयम में रहें तथा जिसमें विद्या, तपस्या और… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 108 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ आठवाँ अध्याय भुवनकोश-वर्णन के प्रसंग में भूमण्डल के द्वीप आदि का परिचय भुवनकोषः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! जम्बू, प्लक्ष, महान् शाल्मलि, कुश, क्रौञ्च, शाक और सातवाँ पुष्कर — ये सातों द्वीप चारों ओर से खारे जल, इक्षुरस,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 107 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सातवाँ अध्याय भुवनकोष (पृथ्वी-द्वीप आदि) -का तथा स्वायम्भुव सर्ग का वर्णन स्वायम्भुवसर्गः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं भुवनकोष तथा पृथ्वी एवं द्वीप आदि के लक्षणों का वर्णन करूँगा । आग्नीध्र, अग्निबाहु, वपुष्मान्, द्युतिमान्, मेधा, मेधातिथि,… Read More