अग्निपुराण – अध्याय 026 अग्निपुराण – अध्याय 026 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छब्बीसवाँ अध्याय मुद्राणां लक्षणानि नारदजी कहते हैं — मुनिगण! अब मैं मुद्राओं का लक्षण बताऊँगा। सांनिध्य [^1] (संनिधापिनी) आदि [^2] मुद्रा के प्रकार-भेद हैं। पहली मुद्रा अञ्जलि [^3] है, दूसरी वन्दनी [^4] है और तीसरी हृदयानुगा है। बायें हाथ की… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 025 अग्निपुराण – अध्याय 025 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पचीसवाँ अध्याय वासुदेव, संकर्षण आदि के मन्त्रों का निर्देश तथा एक व्यूह से लेकर द्वादश व्यूह तक के व्यूहों का एवं पञ्चविंश और षड्विंश व्यूह का वर्णन वासुदेवादिमन्त्राणां लक्षणानि नारदजी कहते हैं — ऋषियो ! अब मैं वासुदेव आदि के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 024 अग्निपुराण – अध्याय 024 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौबीसवाँ अध्याय कुण्ड-निर्माण एवं अग्नि-स्थापन-सम्बन्धी कार्य आदि का वर्णन कुण्डनिर्माणाद्यग्निकार्यादिकथनम् नारदजी कहते हैं — महर्षियो ! अब मैं अग्नि- सम्बन्धी कार्य का वर्णन करूँगा, जिससे मनुष्य सम्पूर्ण मनोवाञ्छित वस्तुओं का भागी होता है। चौबीस अङ्गुल की चौकोर भूमि को सूत… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 023 अग्निपुराण – अध्याय 023 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तेईसवाँ अध्याय देवताओ तथा भगवान् विष्णु की सामान्य पूजा-विधि सामान्य आदिमूर्त्यादिदेवतानां पूजाविधिः नारदजी बोले — ब्रह्मर्षियो! अब मैं पूजा की विधि का वर्णन करूँगा, जिसका अनुष्ठान करके मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओं को प्राप्त कर लेता है। हाथ-पैर धोकर, आसन पर बैठकर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 022 अग्निपुराण – अध्याय 022 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बाईसवाँ अध्याय पूजा के अधिकार की सिद्धि के लिये सामान्यतः स्नान विधि पूजाधिकारार्थं सामान्यः स्नानविधिः नारदजी बोले — विप्रवरो! पूजन आदि क्रियाओं के लिये पहले स्नान विधि का वर्णन करता हूँ। पहले नृसिंह-सम्बन्धी बीज या मन्त्र से [^1] मृत्तिका हाथ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 021 अग्निपुराण – अध्याय 021 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इक्कीसवाँ अध्याय विष्णु आदि देवताओं की सामान्य पूजा का विधान विष्ण्वादिदेवतानां सामान्यपूविधाजानम् नारदजी बोले — अब मैं विष्णु आदि देवताओं की सामान्य पूजा का वर्णन करता हूँ तथा समस्त कामनाओं को देने वाले पूजा-सम्बन्धी मन्त्रों को भी बतलाता हूँ। भगवान्… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 020 अग्निपुराण – अध्याय 020 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बीसवाँ अध्याय सर्ग का वर्णन जगत्सर्गवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — मुने ! (प्रकृति से) पहले महत्तत्त्व की सृष्टि हुई, इसे ब्राह्मसर्ग समझना चाहिये। दूसरी तन्मात्राओं की सृष्टि हुई, इसे भूतसर्ग कहा गया है। तीसरी वैकारिक सृष्टि है, इसे ऐन्द्रियकसर्ग कहते… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 019 अग्निपुराण – अध्याय 019 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उन्नीसवाँ अध्याय कश्यप आदि के वंश का वर्णन कश्यपवंशवर्णनम् अग्निदेव बोले — हे मुने! अब मैं अदिति आदि दक्ष कन्याओं से उत्पन्न हुई कश्यपजी की सृष्टि का वर्णन करता हूँ — चाक्षुष मन्वन्तर में जो तुषित नामक बारह देवता थे,… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 018 अग्निपुराण – अध्याय 018 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अठारहवाँ अध्याय स्वायम्भुव मनु के वंश का वर्णन स्वायम्भुववंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — मुने! स्वायम्भुव मनु से उनकी तपस्विनी भार्या शतरूपा ने प्रियव्रत और उत्तानपाद नामक दो पुत्र और एक सुन्दरी कन्या उत्पन्न की। वह कमनीया कन्या (देवहूति) कर्दम ऋषि… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 017 अग्निपुराण – अध्याय 017 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सत्रहवाँ अध्याय जगत् की सृष्टि का वर्णन सृष्टिविषयकवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं जगत् की सृष्टि आदि का, जो श्रीहरि की लीलामात्र है, वर्णन करूँगा; सुनो। श्रीहरि ही स्वर्ग आदि के रचयिता हैं। सृष्टि और प्रलय आदि… Read More