अग्निपुराण – अध्याय 006 अग्निपुराण – अध्याय 006 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छठा अध्याय अयोध्याकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — भरत के ननिहाल चले जाने पर [लक्ष्मणसहित ] श्रीरामचन्द्रजी ही पिता- माता आदि के सेवा-सत्कार में रहने लगे। एक दिन राजा दशरथ ने श्रीरामचन्द्रजी से कहा — ‘ रघुनन्दन !… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 005 अग्निपुराण – अध्याय 005 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पाँचवाँ अध्याय श्रीरामावतार-वर्णन के प्रसङ्ग में रामायण – बालकाण्ड की संक्षिप्त कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं ठीक उसी प्रकार रामायण का वर्णन करूँगा, जैसे पूर्वकाल में नारदजी ने महर्षि वाल्मीकिजी को सुनाया था। इसका पाठ भोग और… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 004 अग्निपुराण – अध्याय 004 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौथा अध्याय वराह, नृसिंह, वामन और परशुराम अवतारकी कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं वराहावतार की पापनाशिनी कथा का वर्णन करता हूँ। पूर्वकाल में ‘हिरण्याक्ष’ नामक दैत्य असुरों का राजा था। वह देवताओं को जीतकर स्वर्ग में… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 003 अग्निपुराण – अध्याय 003 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीसरा अध्याय समुद्र मन्थन, कूर्म तथा मोहिनी अवतार की कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं कूर्मावतारका वर्णन करूँगा। यह सुनने पर सब पापों का नाश हो जाता है। पूर्वकाल की बात है, देवासुर संग्राम में दैत्यों ने देवताओं… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 002 अग्निपुराण – अध्याय 002 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दूसरा अध्याय मत्स्यावतार की कथा वसिष्ठजी ने कहा — अग्निदेव ! आप सृष्टि आदि के कारणभूत भगवान् विष्णु के मत्स्य आदि अवतारों का वर्णन कीजिये । साथ ही ब्रह्मस्वरूप अग्निपुराण को भी सुनाइये, जिसे पूर्वकाल में आपने श्रीविष्णुभगवान् के मुख… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 001 अग्निपुराण – अध्याय 001 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पहला अध्याय मङ्गलाचरण तथा अग्नि और वसिष्ठ के संवाद-रूप से अग्निपुराण का आरम्भ श्रियं सरस्वतीं गौरीं गणेशं स्कन्दमीश्वरम् । ब्रह्माणं वह्निमिन्द्रादीन् वासुदेवं नमाम्यहम् ॥ ‘लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, महादेवजी, ब्रह्मा, अग्नि, इन्द्र आदि देवताओं तथा भगवान् वासुदेव को मैं… Read More
अग्निपुराण का संक्षिप्त परिचय अग्निपुराण का संक्षिप्त परिचय भारतीय जीवन-संस्कृति के मूलाधार ‘वेद’ हैं। वेद भगवान् के स्वाभाविक उच्छ्वास हैं, अतः वे भगवत्स्वरूप ही हैं । श्रुत ब्रह्मवाणी का संरक्षण परम्परा से ऋषियों द्वारा होता रहा, इसीलिये इसे ‘श्रुति’ कहते हैं । भगवदीय वाणी वेदों के सत्य को समझने के लिये षडङ्ग, अर्थात् शिक्षा, कल्प, व्याकरण, छन्द, निरुक्त और… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 133 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 133 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ तैंतीसवाँ अध्याय पुराणों के लक्षण और उनकी श्लोक संख्या का निरूपण, ब्रह्मवैवर्तपुराण के पठन-श्रवण के माहात्म्य का वर्णन करके सूतजी का सिद्धाश्रम को प्रयाण शौनकजी ने कहा — वत्स ! ब्रह्मवैवर्त-पुराण में जिस फल का निरूपण हुआ है, वह निर्विघ्नतापूर्वक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 132 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 132 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ बतीसवाँ अध्याय सम्पूर्ण कथा का संक्षेप तथा अनुक्रमणिका शौनक बोले — हे धर्मेश ! मैंने सब कुछ सुन लिया। कुछ अवशिष्ट नहीं है । हे महाभाग ! मुझ ब्राह्मण से पुनः पुराण का कथन करें । जन्म से ही मैंने… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 131 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 131 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ इकतीसवाँ अध्याय अग्नि तथा स्वर्ण की उत्पत्ति का प्रसङ्ग शौनक बोले — मैंने परम अद्भुत, अति गोपनीय, अत्यन्त रम्य एवं परम नवीन यह अपूर्व उपाख्यान सुना । पुराणों में क्या ही अनिर्वचनीय, कमनीय एवं मनोहर, प्राचीन तथा अति दुर्लभ कथा… Read More