श्री परशुराम प्रयोग श्री परशुराम प्रयोग भगवान् परशुराम की उपासना के फल-स्वरुप साधक अपनी विविध कामनाओं की पूर्ति करते है। यथा-सन्तान, विवाह, कृषि, वर्षा, ऐश्वर्य, वाक्-सिद्धि, स`र्व-शत्रुओं का नाश, रोगों का निवारण आदि।… Read More
शोक (दुःख) नाशक मन्त्र शोक (दुःख) नाशक मन्त्र मन्त्र:- “जब तें राम ब्याहि घर आए । नित नव मंगल मोद बधाए ।।”… Read More
विघ्न दूर करने का मन्त्र विघ्न दूर करने का मन्त्र मन्त्र:- “सकल विघ्न ब्यापहिं नहिं ताही । राम सुकृपाँ बिलोकहिं जाही ।।”… Read More
भूत भगाने का मन्त्र भूत भगाने का मन्त्र मन्त्र:- “हनुमान अंगद रन गाजे । हाँक सुनत रजनीचर भाजे ।।”… Read More
शत्रु को स्तम्भित करने का मन्त्र शत्रु को स्तम्भित करने का मन्त्र मन्त्र:- “बयरु न कर काहू सन कोई । राम प्रताप विषमता खोई ।।”… Read More
रोग नाशक मन्त्र रोग नाशक मन्त्र मन्त्र:- “दैहिक दैविक भौतिक तापा । राम राज नहिं काहुहिं ब्यापा ।।”… Read More
विपत्ति नाशक व सुख-प्राप्ति का मन्त्र विपत्ति नाशक व सुख-प्राप्ति का मन्त्र मन्त्र:- “राजिव नयन धरें धनुसायक । भगति बिपति भंजन सुखदायक ।।”… Read More
अपनी रक्षा के लिए मन्त्र अपनी रक्षा के लिए मन्त्र मन्त्र:- “ममाभिरक्षय रघुकुल नायक । धृतबरचाप रुचिकर सायक ।। मोरे हित हरि सम नहीं कोऊ । ऐहि अवसर सहाय सोइ होऊ ।।”… Read More
क्लेश-हरण-मर्यादा-रक्षक मन्त्र क्लेश-हरण-मर्यादा-रक्षक मन्त्र मन्त्र:- “हरन कठिन कलि कलुष कलेषु । महामोह निसि दलन दिनेसू ।।”… Read More
श्रुतिका मांगलिक स्तवन श्रुतिका मांगलिक स्तवन नमस्ते गणपतये । त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि । त्वमेव केवलं कर्तासि । त्वमेव केवलं धर्तासि । त्वमेव केवलं हर्तासि । त्वमेव सर्व खल्विदं ब्रह्मासि । त्यं साक्षादात्मासि नित्यम् ।। गणपति को नमस्कार है, तुम्हीं प्रत्यक्ष तत्त्व हो, तुम्हीं केवल कर्ता, तुम्हीं केवल धारणकर्ता और तुम्हीं केचल संहारकर्ता हो, तुम्हीं केवल समस्त विश्वरूप ब्रह्म… Read More