मन्त्र चौकी नाहरसिंह की मन्त्र चौकी नाहरसिंह की मन्त्र:- “ॐ नमो नारसिंह, नारी का जाया । याद किया, सो जल्दी आया । पाँच पान का बीड़ा, मद्य की धार । चल-चल नाहरसिंह, कहाँ लगाई एती बार ? देसुँ केसर कूकड़ो मुर्गा को ताज । देसुँ मध की धार । आरोधा आया नहीं, कहाँ लगाई एती वार ? देसुँ नारसिंह… Read More
भूतादि भगाने का अनुभूत मन्त्र भूतादि भगाने का अनुभूत मन्त्र “ॐ गुरु जी ! काला भैरू क्या करे ? मरा मसान सेवे । मरा मसान से के क्या करे ? लाग को – लपट को, काचे को – कलवे को । झाँप को – झपट को, भूत को – प्रेत को ! जिन्द को – डाकन को, ताल को –… Read More
शाबर मन्त्र के प्रयोग शाबर मन्त्र के प्रयोग १. झाड़-फूँक के मन्त्र – (१) जै जगत्-जननी माता झाल देवी ! वीर बजरङ्ग बली की दुहाई । दुई पद और आधा, सब काम किताब से ज्यादा । पार्वती माता के अढ़ी पद-विद्या । आज मेरा फूके, मेरे गुरू जी का फूको । जब फूकू, तब जागे ।” (२) हंस गुरू… Read More
शिव-साबर शिव-साबर १. सर्प-विष-हरण मन्त्र “गौरा खेती, शिव की बारी । महादेव तेरी रखवारी । दाव चलावे, दाव बाँधे । पाव चलावें, पाव बाँधे । तलवार चलावे, धार बाँधे । अखाड चलाये, जवान बाँधे । मेरी भक्ति, गुरू की शक्ति । दोहाई नरसिंह, दोहाई गौरा पार्वती की, लाख दोहाई, हो गुरु बङ्गाली !”… Read More
शिशु-रोग-निवारक ‘श्रीराम-रक्षा झारा’ शिशु-रोग-निवारक ‘श्रीराम-रक्षा झारा’ मन्त्र :- ‘ॐ रोम-रोम की रक्षा राम जी करें । हाडन की रक्षा हर जी करें । टकान की रक्षा टीकम जी करें । पिण्डरी की रक्षा मोहन जी करें । गोड़न की रक्षा गोवर्धन जी करें । जाँघन की रक्षा जनार्दन जी करें । इन्द्री की रक्षा इन्द्र जी करें ।… Read More
नजर, बुखार में राम-बाण : शाबर नजर, बुखार में राम-बाण : शाबर मन्त्र :- ‘लोहार, लोहरवा की बेटी ! तोर बाप का करत हय ?’ ‘कोइला काटत हय ।’ ‘ओ कोइला का करी ?’ ‘छप्पन छुरा गढ़ी ।’ ‘ओ छुरा का करी ?’ ‘डीठ काटी, टोना काटी और काटी टापर ।’ दोहाई गुरु धनन्तर की । लोना चमारिन की दोहाई ।… Read More
अकाल मृत्यु नाशक मन्त्र अकाल मृत्यु नाशक मन्त्र मन्त्र:- “नाम पाहरु दिवस निसि, ध्यान तुम्हार कपाट । लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट ।।”… Read More
महामारी भगाने का मन्त्र महामारी भगाने का मन्त्र मन्त्र:- “जय रघुवंस बनज बन भानु । गहन दनुज कुल दहन कृसानू ।।”… Read More
हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग ब्राह्म-मुहूर्त में उठकर, ‘सन्ध्या-वन्दनादि’ नित्य क्रिया करने के उपरान्त साधक नदी किनारे जाए। नदी में स्नान करके, ‘तीर्थ-आवाहन’ कर आठ बार मूल-मन्त्र का जप करे। फिर मूल-मन्त्र जपते हुए बारह बार अपने मस्तक पर जल के द्वारा ‘अभिषेक’ करे। अभिषेक करने के बाद वस्त्र धारण कर नदी के किनारे बैठ- ‘ह्रां… Read More
श्रीगायत्री-मन्त्र से रोग-ग्रह-शान्ति श्रीगायत्री-मन्त्र से रोग-ग्रह-शान्ति १॰ क्रूर से क्रूर ग्रह-शान्ति में, शमी-वृक्ष की लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े कर, गूलर-पाकर-पीपर-बरगद की समिधा के साथ ‘गायत्री-मन्त्र से १०८ आहुतियाँ देने से शान्ति मिलती है। २॰ महान प्राण-संकट में कण्ठ-भर या जाँघ-भर जल में खड़े होकर नित्य १०८ बार गायत्री मन्त्र जपने से प्राण-रक्षा होती है। ३॰ घर के आँगन… Read More