॥ ब्रह्मचारिणी ॥ हेमवती पार्वती ने शिव को ही अपना पति मानने हेतु कठोर तपस्या की एवं प्रतिज्ञा की यदि मैं शिव को प्रसन्न करने में असफल रही तो ब्रह्मचारिणी रहूंगी । पिता ने उसे उस समय समझाया कि उ-मा अर्थात् उसे मत कर इसी से उनका नाम उमा हो गया ।… Read More


॥ अथ शैलपुत्री सहस्रनाम ॥ इसे पुराणों में काली सहस्रनाम अथवा ललिता सहस्रनाम भी कहा गया है । भगवान शंकर ने जब कामदेव को भस्म कर दिया तो पार्वतीजी ने कहा कि मुझे पत्नि रूप में प्राप्त करने के लिये ही आपने तपस्या की थी फिर कामदेव को आपने क्यों भस्म कर दिया । शिवजी… Read More


॥ हिमालयराज कृत शैलपुत्री स्तुति ॥ ॥ हिमालय उवाच ॥ मातस्त्वं कृपयागृहे मम सुता जातासि नित्यापि यद्भाग्यं मे बहुजन्मजन्मजनितं मन्ये महत्पुण्यदम् । दृष्टं रूपमिदं परात्परतरां मूर्तिं भवान्या अपि माहेशी प्रति दर्शयाशु कृपया विश्वेशि तुभ्यं नमः ॥ १ ॥… Read More


॥ शैलपुत्री ॥ कालिका पुराण के अनुसार महिषासुर वध के पूर्व कल्प में शैलपुत्री ही आदि शक्ति है । पूज्यते वैष्णवी देवी तंत्रोक्ता अष्टयोगिनीः । ताः प्रोक्ताः शैलपुत्र्याश्च पूर्व कल्पे च भैरवः ॥ शैलपुत्री ने जब हिमालयराज के यहां जन्म लिया तो हिमालयराज उनको पहचान नहीं सका जगम्दबा ने दिव्यचक्षु से पहले उग्ररूप पश्चात् शान्तरूप… Read More


॥ दुर्गम संकटनाशन स्तोत्र ॥ ॥ श्रीकृष्ण उवाच ॥ त्वमेव सर्वजननी मूलप्रकृतिरीश्वरी । त्वमेवाद्या सृष्टिविधौ स्वेच्छया त्रिगुणात्मिका ॥ कार्यार्थे सगुणा त्वं च वस्तुतो निर्गुणा स्वयम् । परब्रह्मस्वरूपा त्वं सत्या नित्या सनातनी ॥ तेजःस्वरूपा परमा भक्तानुग्रहविग्रहा । सर्वस्वरूपा सर्वेशा सर्वाधारा परात्परा ॥… Read More


॥ ब्रह्माण्डविजय दुर्गा कवचम् ॥ ॥ नारायण उवाच ॥ श्रृणु नारद वक्ष्यामि दुर्गायाः कवचं शुभम् । श्रीकृष्णेनैव यद्‍दत्तं गोलोके ब्रह्मणे पुरा ॥ ब्रह्मा त्रिपुरसंग्रामे शंकराय ददौ पुरा । जघान त्रिपुरं रुद्रो यद् धृत्वा भक्तिपूर्वकम् ॥ हरो ददौ गौतमाय पद्माक्षाय च गौतमः । यतो बभूव पद्माक्षः सप्तद्वीपेश्वरो जयी ॥ यद् धृत्वा पठनाद् ब्रह्मा ज्ञानवान् शक्तिमान् भुवि… Read More


॥ वंशवृद्धिकरं दुर्गाकवचम् अथवा वंशकवचम् ॥ भगवन् देव देवेशकृपया त्वं जगत् प्रभो । वंशाख्य कवचं ब्रूहि मह्यं शिष्याय तेऽनघ । यस्य प्रभावाद्देवेश वंश वृद्धिर्हिजायते ॥ १ ॥… Read More


॥ श्री चण्डिका मालामन्त्र प्रयोगः ॥ उक्तं चाथर्वणागमसंहितायाम् मंत्रों यथा — “ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ ह्रौं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीर्जयजय चण्डिका चामुण्डे चण्डिके त्रिदश-मुकुट-कोटि-संघट्टित-चरणारविंदे गायत्रि सावित्रि सरस्वति अहिकृताभरणे भैरव-रूप-धारिणि प्रकटित-दंष्ट्रोग्र-वदने घोरानन-नयने ज्वलज्ज्वाला-सहस्र-परिवृते महाट्टहास-धवलीकृत-दिगन्तरे सर्वयुग-परिपूर्णे कपाल-हस्ते गजाजिनोत्तरीय-भूत-वेताल-परिवृते अकंपित-धराधरे मधु-कैटभ महिषासुर-धूम्रलोचन चण्ड-मुण्ड-रक्तबीज-शुम्भनिशुम्भदैत्यनिकृन्ते कालरात्रि महामाये शिवे नित्ये ॐ ऐं ह्रीं ऐन्द्रि आग्नेयि याम्ये नैर्ऋति वारुणि वायवि… Read More


॥ सिद्धिचण्डी महाविद्या सहस्राक्षर मन्त्र ॥ वन्दे परागम-विद्यां, सिद्धि-चण्डीं सङ्गिताम् । महा-सप्तशती-मन्त्र-स्वरुपां सर्व-सिद्धिदाम् ॥ विनियोगः- ॐ अस्य सर्व-विज्ञान-महा-राज्ञी-सप्तशती रहस्याति-रहस्य-मयी-परा-शक्ति श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डिका-सहस्राक्षरी-महा-विद्या-मन्त्रस्य श्रीमार्कण्डेय-सुमेधा ऋषि, गायत्र्यादि नाना-विधानि छन्दांसि, नव-कोटि-शक्ति-युक्ता-श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डी देवता, श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डी-प्रसादादखिलेष्टार्थे जपे विनियोगः ।… Read More