॥ भगवती दुर्गा ॥ एकाक्षर:- भगवती दुर्गा का एकाक्षरी बीजमंत्र “दुं” है । दां दीं दूं दें दौं दः से अङ्गन्यास करे । ॥ अथ अष्टाक्षर मंत्र प्रयोगः ॥ भगवती दुर्गा का अष्टाक्षर मंत्र प्रधान हैं ।… Read More


॥ भगवती गौरी ॥ चतुरक्षर मन्त्रः- “ह्रीं भवान्यै नमः” मंत्र के अज ऋषि, छन्द अनुष्टप, देवता गौरी हैं । बालार्काऽभां त्रिनयनां खड्गखेटवराभयान् । दोर्भिदधानां सिंहस्थां भवानीं भावयेत् सदा ॥… Read More


॥ दुर्गाभुवनवर्णनम् ॥ ॥ श्री भैरव उवाच ॥ तंत्रादौ देवि वक्ष्येऽहं दुर्गाभुवनमद्भुतम् । जयं नाम महादिव्यं बहुविस्तारविस्तृतम् । नानारत्न समाकीर्णं सूर्यकोटिसमप्रभम् ॥ १७ ॥ इन्द्रगोपकवर्णं च चन्द्रकोटिमनोहरम् । अप्रमेयमसंख्यैयमगम्यं सर्ववादिनाम् ॥ १८ ॥… Read More


पीरों के पीर गौस ए आजम पीरों के पीर शेख सैय्यद अबू मोहम्मद अब्दुल कादिर जीलनी रहमतुल्लाह अलैह से निस्बत रखता है। जिन्हें गौस ए आजम के नाम से जाना जाता है। आपका नाम ” अब्दुल कादिर जिलानी ” है ! आप ” शेख अबू सईद मरमक दूमी ” के पुत्र थे ! आपका जन्म… Read More


दुश्मन ज़बानबंदी / दुश्मन को बेअसर करना विधि – मंगलवार अथवा किसी भी दिन दोपहर दो बजे से चार बजे के मध्य सफेद कागज पर काली स्याही के पेन से खानों में बायें नीचे कोनों में दिये गये अंक की चाल के अनुसार यन्त्र बनायें । ध्यान रहे गोले में दिये गये अंकों को नहीं… Read More


दो लोगों के बीच लड़ाई करवाकर अलग करने का टोटका विद्वेषण यन्त्र प्रयोग – 1 किसी भी दिन सफेद कागज पर काली स्याही अथवा कोयले से नीचे दिये गये यन्त्र को लिख कर दीया बाती करने के उपरान्त जलाकर राख को घर से बाहर फेंक दें ।… Read More


॥ पितृसूक्त ॥ ऋग्वेदके १० वें मण्डलके १५वें सूक्तकी १-१४ ऋचाएँ ‘पितृसूक्त’ के नामसे ख्यात हैं । पहली आठ ऋचाओं में विभिन्न स्थानों में निवास करनेवाले पितरों को हविर्भाग स्वीकार करने के लिये आमन्त्रित किया गया है । अन्तिम छः ऋचाओं में अग्नि से प्रार्थना की गयी है कि वे सभी पितरों को साथ लेकर… Read More


॥ वेदोक्त पितृसूक्त ॥  शुक्लयजुर्वेद के अध्याय 35 में पितृसूक्त दिया गया है। इसका नियमित पाठ करने से पितृदोष की शान्ति होती है। यह सूक्त निम्नलिखित है –  अपेतो यन्तु पणयोऽसुम्ना देवपीयवः ।  अस्य लोकः सुतावतः ।  द्युभिरहोभिरक्तुभिर्व्यक्तं यमो ददात्ववसानमस्मै ॥ १ ॥  सविता ते शरीरेभ्यः पृथिव्याँल्लोकमिच्छतु ।  तस्मै युज्यन्तामुस्रियाः ॥ २ ॥  वायुः पुनातु… Read More


॥ पुराणोक्त पितृस्तोत्र ॥ मनोकामनाओं की पूर्ति करते है । यहाँ मार्कण्डेय पुराण (04/1-13) में वर्णित चमत्कारी पितस्तोत्र दिया जा रहा है । इसका नियमित पाठ करना चाहिए । ॥ रुचिरुवाच ॥ (सप्तार्चिस्तपम्) अमूर्त्तानां च मूर्त्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ॥ नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् । इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ॥… Read More