श्री नारायण कवच न्यासः- सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा भगवान नारायण को नमस्कार करके नीचे लिखे प्रकार से न्यास करें। अगं-न्यासः- ॐ ॐ नमः — पादयोः ( दाहिने हाँथ की तर्जनी व अंगुठा — इन दोनों को मिलाकर दोनों पैरों का स्पर्श करें)। ॐ नं नमः — जानुनोः ( दाहिने हाँथ की तर्जनी व अंगुठा —… Read More


परशुराम-कृत श्रीदुर्गा-स्तोत्र ।। परशुराम उवाच ।। श्रीकृष्णस्य च गो-लोके-परिपूर्णतमस्य चः । आविर्भूता विग्रहतः, परा सृष्ट्युन्मुखस्य च ।। सूर्य-कोटि-प्रभा-युक्ता, वस्त्रालंकार-भूषिता । वह्नि-शुद्धांशुकाधाना सुस्मिता, सुमनोहरा ।। नव-यौवन-सम्पन्ना सिन्दूर-विन्दु-शोभिता । ललितं कबरीभारं मालती-माल्य-मण्डितम् ।। अहोऽनिर्वचनीया त्वं, चारुमूर्ति च बिभ्रती । मोक्षप्रदा मुमुक्षूणां, महाविष्णोर्विधिः स्वयम् ।। मुमोह क्षणमात्रेण दृष्ट्वा, त्वां सर्वमोहिनीम् । बालैः सम्भूय सहसा, सस्मिता धाविता पुरा ।।… Read More


शीघ्र फल-दायक सिद्ध शाबर मन्त्र Quick remedy shabar mantra ‘साबर’ का प्रतीक अर्थ होता है ग्राम्य, अपरिष्कृत । ‘साबर-तन्त्र’ – तन्त्र की ग्राम्य-शाखा है । इसके प्रवर्तक भगवान् शंकर प्रत्यक्ष-तया नहीं है, किन्तु जिन सिद्धों ने इसका आविष्कार किया, वे परम-शिव-भक्त अवश्य थे । गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मछन्दर नाथ ‘साबर-मन्त्र’ के जनक माने जाते… Read More


मोहिनी शाबर मन्त्र मन्त्रः- “हेरो सरसुआ फेरो बहिनी, जब देखों तो बाँस के रहनी, नथे बैल बनियन बँधो, परके तेल माथे पे लगाऊ रहिया, मोहिनी धुँआ धरनी, जरवा जोहिनी भैया मोहिनी, कहाँ की मोहिनी, भेड़ा-घाट की मोहिनी, लग जाय री मोहिनी, उस्ताज मोहिनी, चल रे मोहनिया । फिर जहाँ फटकारों, तहाँ वचन न परै खाली… Read More


मोहिनी शाबर मन्त्र मन्त्रः- “कहे कमिख्या सुनहु ललजार जर ! पेड़ पात सब तुमरो मलिनौ, पाल पात जराय के भस्मत कीनो । पुन वह क्षार महा-देव ने लई । अब तुमको प्रतिष्ठा भई । ग्रह विचार बेगे तुम आए, जिमि क्षार लगावो धाए । छिन इक में बस होय हमारे, तन-मन ते पग परत विचारे… Read More


मोहिनी शाबर मन्त्र मन्त्रः- “रँजेखुरा सिर हिरदै लावे । मेरी लीला को जग मोहे । जप मोहे देवी काल । नरसिंह की आस्ति नरसिंह, नये ठग मोहिनी । हाट मोहे, बाट मोहे, दौरे दीवान मोहे, भैया-वन्धु मोहे, वैरी-दुश्मन मोहे, रुठो भाखता यो काल मोहे । वैरी शत्रु देहरी बैठ बात बनाई । बाट सिंहा है… Read More


नवाक्षर गणपति-विद्या का जप ‘विरभद्रोड्डीश तन्त्र’ के अनुसार कुम्हार के चाक की मिट्टी से ‘गणेश-प्रतिमा’ बनाकर पञ्चोपचार (गन्ध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य) से पूजाकर प्रति-दिन ‘नवाक्षर’ गणपति-विद्या ‘ॐ गं गणपतये नमः का १००० जप करे, तो बुद्धि का विकास होता है। एक मास जप करे, तो स्त्री-लाभ होता है। छः मास जप करे, तो… Read More


ऋण-मुक्ति श्रीभैरव-मन्त्र मन्त्रः- “ॐ ऐं क्लीं ह्रीं मम् भैरवाय मम ऋण-विमोचनाय मह्यं महाधन-प्रदाय क्लीं स्वाहा ।” विधिः- रविवार को शुक्ल पक्ष में ‘पुष्य’ या ‘हस्त’ नक्षत्र हो तो उस दिन संकल्प-पूर्वक उक्त मन्त्र का जाप प्रारम्भ करके प्रतिदिन बारह माला २१ तक लगातार करें । रविवार एवं मंगलवार को कन्याओं एवं छोटे बच्चों को मीठा… Read More


ऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- भगवान् शुक्राचार्य ऋषये नमः शिरसि, ऋण-मोचन-गणपति देवतायै नमः हृदि, मम-ऋण-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ।… Read More


ऋण-हरण श्री गणेश-मन्त्र प्रयोग यह धन-दायी प्रयोग है। यदि प्रयोग नियमित करना हो तो साधक अपने द्वारा निर्धारित वस्त्र में कर सकता है किन्तु, यदि प्रयोग पर्व विशेष मात्र में करना हो, तो पीले रंग के आसन पर पीले वस्त्र धारण कर पीले रंग की माला या पीले सूत में बनी स्फटिक की माला से… Read More