श्री महा-विपरीत-प्रत्यंगिरा स्तोत्र श्री महा-विपरीत-प्रत्यंगिरा स्तोत्र नमस्कार मन्त्रः- श्रीमहा-विपरीत-प्रत्यंगिरा-काल्यै नमः। ।।पूर्व-पीठिका-महेश्वर उवाच।। श्रृणु देवि, महा-विद्यां, सर्व-सिद्धि-प्रदायिकां। यस्याः विज्ञान-मात्रेण, शत्रु-वर्गाः लयं गताः।। विपरीता महा-काली, सर्व-भूत-भयंकरी। यस्याः प्रसंग-मात्रेण, कम्पते च जगत्-त्रयम्।। न च शान्ति-प्रदः कोऽपि, परमेशो न चैव हि। देवताः प्रलयं यान्ति, किं पुनर्मानवादयः।। पठनाद्धारणाद्देवि, सृष्टि-संहारको भवेत्। अभिचारादिकाः सर्वेया या साध्य-तमाः क्रियाः।। स्मरेणन महा-काल्याः, नाशं जग्मुः सुरेश्वरि, सिद्धि-विद्या महा काली,… Read More
गुरु गोरखनाथ का सरभंगा (जञ्जीरा) मन्त्र गुरु गोरखनाथ का सरभंगा (जञ्जीरा) मन्त्र “ॐ गुरुजी में सरभंगी सबका संगी, दूध-मास का इक-रणगी, अमर में एक तमर दरसे, तमर में एक झाँई, झाँई में परछाई दरसे, वहाँ दरसे मेरा साँई। मूल चक्र सर-भंग आसन, कुण सर-भंग से न्यारा है, वाँहि मेरा श्याम विराजे। ब्रह्म तन्त से न्यारा है, औघड़ का चेला-फिरुँ अकेला, कभी… Read More
भ॰ गहिनीनाथ परम्परा के शाबर मन्त्र भ॰ गहिनीनाथ परम्परा के शाबर मन्त्र १॰ “ॐ निरञ्जन जट-स्वाही तरङ्ग ह्राम् ह्रीम् स्वाहा” २॰ “ॐ रा रा ऋतं रौभ्यं स्तौभ्यं रिष्टं तथा भगम्। धियं च वर्धमानाय सूविर्याय नमो नमः।।” विधि- नित्य प्रातःकाल स्नान के बाद उक्त मन्त्र का १०८ बार जप करें। ऐसा ८ दिन करने से मन्त्र सिद्ध होते हैं। बाद में नित्य… Read More
रोग-पीड़ा निवारक टोटके रोग-पीड़ा निवारक टोटके १॰ यदि पर्याप्त उपचार करने पर भी रोग-पीड़ा शांत नहीं हो रही हो अथवा बार-बार एक ही रोग प्रकट होकर पीड़ित कर रहा हो तथा उपचार करने पर शांत हो जाता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने वजन के बराबर गेहूँ का दान रविवार के दिन करना चाहिए। गेहूँ का दान जरुरतमंद एवं… Read More
हनुमान लहरी श्री हनुमान लहरी दोहा गुरु पद पंकज धारि उर , सुर नर शीश नवाय । मारूत सुत बलवीर कहं , ध्यावत चित मन लाय ॥ प्रथम वन्दि सियराम पद , अवध नारि नर संग । वन्दौ चरण सुध्यान धरि , हनुमत कंचन रंग ॥ मन चित देइ सुनौ विनै , हौं तुम दीन दयाल ।… Read More
परीक्षा में सफलता, स्मरण-शक्ति-वर्द्धन प्रयोग परिक्षा में सफलता, स्मरण-शक्ति-वर्द्धन प्रयोग “एक-दन्त महा-बुद्धिः, सर्व-सौभाग्य-दायक। सर्व-सिद्धि-करो देवो, गौरी-पुत्र विनायकः।।” १॰ उक्त मन्त्र का जप ‘परीक्षा’ आरम्भ होने के १५ दिन पहले जो बुधवार हो, उस दिन से आरम्भ करे तथा परीक्षा का परिणाम निकलने तक नियमित करे।… Read More
श्रीवगला सिद्ध शाबर मन्त्र श्रीवगला सिद्ध शाबर मन्त्र (१) श्री वगलामुखी के निम्न मन्त्र का अयुत (दस सहस्त्र) जप करने से सिद्धि मिलती है। हल्दी, हड़ताल, मालकांगनी (ज्योतिष्मती) को कूट कर कटु-तैलाक्त निम्ब-काष्ठ, बदरी-काष्ठ या खदिर-काष्ठ की समिधा द्वारा नित्य अष्टोत्तर-शत हवन करें। अर्थात् दस माला मन्त्र-जप और एक माला से हवन किया करे। दस दिनों में अभीष्ट सिद्धि… Read More
आर्थिक समृद्धि के लिए अनुभूत प्रयोग आर्थिक समृद्धि के लिए अनुभूत प्रयोग १॰ सोमवार के दिन या दीपावली के दिन अशोक वृक्ष के पत्ता तोड़कर “ॐ नमो नारायणाय” जपते रहें। अशोक के पत्ते को गंगाजल से धोकर उसके ऊपर हल्दी दही मिलाकर अनामिका अंगुली से वर्ग बनाकर वर्ग के बीच में “ह्रीं” लिखें। अगले सोमवार को पत्ता किसी पवित्र जगह पर… Read More
आत्म-ज्योति-साधना आत्म-ज्योति-साधना श्रीमद्-भगवद्-गीता में व्यवहार और अध्यात्म के प्रत्येक पक्ष का वर्णन है। दैनन्दिन जीवन में गीता उपयोगी मार्ग-दर्शन करती है। साधना-क्षेत्र में गीता सहज ही अग्रसर करती है। मन्त्र-शास्त्र की दृष्टि से गीता का प्रत्येक श्लोक दिव्य मन्त्र है। साहित्य तथा तत्त्व-ज्ञान में गीता श्रेष्ठ है। यहाँ मुमुक्षु जनों के लिए अति गोपनीय साधना पहली… Read More
मृत्य्वष्टकम् मृत्य्वष्टकम् ।। मार्कण्डेय उवाच ।। नारायणं सहस्राक्षं पद्मनाभं पुरातनम् । प्रणतोऽस्मि हृषीकेशं किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। १ गोविन्दं पुण्डरीकाक्षमनन्तमजमव्ययम् । केशवं च प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। २ वासुदेवं जगद्योनिं भानुवर्णमतीन्द्रियम् । दामोदरं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ३… Read More