ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 25 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पच्चीसवाँ अध्याय जमदग्नि और कार्तवीर्य का युद्ध तथा ब्रह्मा द्वारा उसका निवारण नारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर कार्तवीर्य ने दुःखी हृदय से श्रीहरि का स्मरण किया और कुपित हो मुनि के पास दूत भेजकर कहलवाया- ‘मुनिश्रेष्ठ ! युद्ध कीजिये अथवा मुझ अतिथि… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 24 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौबीसवाँ अध्याय गणेश के एकदन्त-वर्णन-प्रसङ्ग में जमदग्नि के आश्रम पर कार्तवीर्य का स्वागत सत्कार, कार्तवीर्य का बलपूर्वक कामधेनु को हरण करने की इच्छा प्रकट करना, कामधेनु द्वारा उत्पन्न की हुई सेना के साथ कार्तवीर्य की सेना का युद्ध नारदजी ने पूछा — हरि… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 23 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तेईसवाँ अध्याय देवताओं के स्तवन करने पर महालक्ष्मी का प्रकट होकर देवों और मुनियों के समक्ष अपने निवास-योग्य स्थान का वर्णन करना नारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर इन्द्र गुरु बृहस्पति तथा अन्यान्य देवों को साथ लेकर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिये प्रसन्न-मन… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 22 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बाईसवाँ अध्याय श्रीहरि का इन्द्र को लक्ष्मी-कवच तथा लक्ष्मी स्तोत्र प्रदान करना नारदजी ने पूछा — तपोधन ! लक्ष्मीपति श्रीहरि ने प्रकट होकर इन्द्र को महालक्ष्मी का कौन-सा स्तोत्र और कवच प्रदान किया था, वह मुझे बतलाइये । नारायण ने कहा — नारद!… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 21 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इक्कीसवाँ अध्याय इन्द्र का बृहस्पति के साथ ब्रह्मा के पास जाना, ब्रह्मा द्वारा दिये गये नारायणस्तोत्र, कवच और मन्त्र के जप से पुनः श्री प्राप्त करना नारद ने पूछा — प्रभो ! किस ब्रह्मशाप के कारण वे सभी देवता श्रीभ्रष्ट हो गये थे… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 20 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बीसवाँ अध्याय भगवान् नारायण के निवेदित पुष्प की अवहेलना से इन्द्र का श्रीभ्रष्ट होना नारद बोले — आप भगवान् के अंश से उत्पन्न एवं बुद्धि, तेज और विक्रम में उन्हीं के समान हैं, अतः मेरा प्रश्न सुनने की कृपा करें । मैंने विघ्ननाशक… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 19 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उन्नीसवाँ अध्याय ब्रह्मा द्वारा माली-सुमाली को सूर्य के कवच और स्तोत्र की प्राप्ति तथा सूर्य की कृपा से उन दोनों का नीरोग होना नारदजी के पूछने पर नारायण बोले — नारद! मैं श्रीसूर्य के पूजन का क्रम तथा सम्पूर्ण पापों और व्याधियों से… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 18 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अठारहवाँ अध्याय गणेश शिरश्छेदन के वर्णन के प्रसङ्ग में शंकर द्वारा सूर्य का मारा जाना, कश्यप का शिव को शाप देना, सूर्य का जीवित होना और माली-सुमाली की रोगनिवृत्ति नारद ने पूछा — महाभाग नारायण ! आप तो वेदवेदाङ्गों के पारगामी विद्वान् हैं… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 17 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सत्रहवाँ अध्याय कार्तिकेय का अभिषेक तथा देवताओं द्वारा उन्हें उपहार प्रदान श्रीनारायणजी कहते हैं — नारद ! तदनन्तर जगदीश्वर विष्णु प्रसन्नमन से शुभ मुहूर्त निश्चय करके कार्तिकेय को एक रमणीय रत्नसिंहासनप र बैठाया और कौतुकवश नाना प्रकार के झाँझ- मँजीरा तथा यन्त्रमय बाजे… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 16 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सोलहवाँ अध्याय कार्तिकेय का नन्दिकेश्वर के साथ कैलास पर आगमन, स्वागत, सभा में जाकर विष्णु आदि देवों को नमस्कार करना और शुभाशीर्वाद पाना श्रीनारायणजी कहते हैं — नारद! शंकरसुवन कार्तिकेय नन्दिकेश्वर से यों कहकर शीघ्र ही कृत्तिकाओं को समझाते हुए नीतियुक्त वचन बोले… Read More