ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 35 February 16, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 35 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पैंतीसवाँ अध्याय राजा को युद्ध के लिये उद्यत देख मनोरमा का योग द्वारा शरीर त्याग, राजा का विलाप और आकाशवाणी सुनकर उसकी अन्त्येष्टि-क्रिया करना, युद्धयात्रा के समय नाना प्रकार के अपशकुन देखना, कार्तवीर्य और परशुराम का युद्ध तथा कार्तवीर्य का वध, नारायण द्वारा… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 34 February 16, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 34 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौंतीसवाँ अध्याय परशुराम का कार्तवीर्य के पास दूत भेजना, दूत की बात सुनकर राजा का युद्ध के लिये उद्यत होना और रानी मनोरमा से स्वप्नदृष्ट अपशकुन का वर्णन करना, रानी का उन्हें परशुराम की शरण ग्रहण करने को कहना, परंतु राजा का मनोरमा… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 33 February 16, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 33 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तैंतीसवाँ अध्याय पुष्कर में जाकर परशुराम का तपस्या करना, श्रीकृष्ण द्वारा वर-प्राप्ति, आश्रम पर मित्रों के साथ उनका विजय यात्रा करना और शुभ शकुनों का प्रकट होना, नर्मदा तट पर रात्रि में परशुराम को स्वप्न में शुभ शकुनों का दिखलायी देना श्रीनारायण कहते… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 32 February 16, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 32 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बतीसवाँ अध्याय शिवजी का परशुराम को मन्त्र, ध्यान, पूजा-विधि और स्तोत्र प्रदान करना परशुराम ने कहा — नाथ ! जो सम्पूर्ण अङ्गों की रक्षा करनेवाला, सुखदायक, मोक्षप्रद, सार-सर्वस्व तथा शत्रुओं के संहार का कारण है, वह कवच तो मुझे प्राप्त हो गया ।… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 31 February 16, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 31 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इकतीसवाँ अध्याय शिवजी का प्रसन्न होकर परशुराम को त्रैलोक्यविजय नामक कवच प्रदान करना नारद ने पूछा — भगवन्! अब मेरी यह सुनने की इच्छा है कि भगवान् शंकर ने दयावश परशुराम को कौन-सा मन्त्र तथा कौन-सा स्तोत्र और कवच दिया था ? उस… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 30 February 15, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 30 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसवाँ अध्याय परशुराम का शिवजी से अपना अभिप्राय प्रकट करना, उसे ‘सुनकर भद्रकाली का कुपित होना, परशुराम का रोने लगना, शिवजी का कृपा करके उन्हें नाना प्रकार के दिव्यास्त्र एवं शस्त्रास्त्र प्रदान करना [ तदनन्तर महादेवजी के पूछने पर ] परशुराम ने कहा… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 29 February 15, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 29 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उनतीसवाँ अध्याय परशुराम का शिवलोक में जाकर शिवजी के दर्शन करके उनकी स्तुति करना नारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर परशुराम ने ब्रह्मा की बात सुनकर उन जगद्गुरु को प्रणाम किया और उनसे वरदान पाकर वे सफल-मनोरथ हो शिवलोक को चले । वायु… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 28 February 15, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 28 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अट्ठाइसवाँ अध्याय रेणुका- भृगु-संवाद, रेणुका का पति के साथ सती होना, परशुराम का पिता की अन्त्येष्टि क्रिया करके ब्रह्मा के पास जाना और अपनी प्रतिज्ञा सुनाना, ब्रह्मा का उन्हें शिवजी के पास भेजना रेणुका ने पूछा — ब्रह्मन् ! अब मैं अपने प्राणनाथ… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 27 February 15, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 27 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सत्ताईसवाँ अध्याय जमदग्नि-कार्तवीर्य युद्ध, कार्तवीर्य द्वारा दत्तात्रेय दत्त शक्ति के प्रहार से जमदग्नि का वध, रेणुका का विलाप, परशुराम का आना और क्षत्रियवध की प्रतिज्ञा करना, भृगु का आकर उन्हें सान्त्वना देना नारायण कहते हैं — नारद! राजा घर लौट तो गया पर… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 26 February 15, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 26 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छब्बीसवाँ अध्याय ब्रह्मा द्वारा जमदग्नि और कार्तवीर्य युद्ध का शमन नारायण कहते हैं — नारद! भूपाल के वचन को सुनकर मुनिवर ने श्रीहरि का स्मरण करके जो हितकर, सत्य और नीति का साररूप था, ऐसा वचन कहना आरम्भ किया । मुनि ने कहा… Read More