भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ४८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ४८ श्रीकृष्ण-साम्ब-संवाद तथा भगवान् सूर्यनारायण कि पूजन-विधि राजा शतानीक ने कहा – ब्राह्मणश्रेष्ठ ! भगवान् सूर्यनारायण का माहात्म्य सुनते-सुनते मुझे तृप्ति नहीं हो रही है, इसलिये सप्तमी-कल्प का आप पुनः कुछ और विस्तार से वर्णन… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ४७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ४७ सप्तमी-कल्प में भगवान् सूर्य के परिवार का निरूपण एवं शाक-सप्तमी – व्रत सुमन्तु मुनि ने कहा – राजन् ! अब मैं सप्तमी-कल्प का वर्णन करता हूँ । सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य का आविर्भाव… Read More


सर्व रोग निवारक मन्त्र विधिः- शनिवार को व्रत रख कर नियमपूर्वक रहकर एक माला उपरोक्त मंत्र की जपे। इसी प्रकार सात शनिवार तक करता रहे। ऐसा करने से मन्त्र सिद्ध हो जाता है। कंखाई अदीठ, कनफेरबद (एक प्रकार का चर्म रोग), कण्ठमाला, दाढ़ का दर्द इन्हें राख से झाड़ना चहिए। डमरु को, ताप तिल्ली को… Read More


सर्व वशीकरण मन्त्र विधिः- होली अथवा दीपावली की रात्रि को सफेद तिलों के तेल की उल्टी घानी निकलवायें। उस तेल को 121 बार उपयुक्त मंत्र से अभिमंत्रित करें। इस अभिमंत्रित तेल का जो भी व्यक्ति तिलक करता है, वह सभी को आकर्षित करने की शक्ति प्राप्त कर लेता है।… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ४६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ४६ भगवान कार्तिकेय तथा उनके षष्ठी – व्रत की महिमा सुमन्तु मुनि बोले – राजन् ! भाद्रपद मास की षष्ठी तिथि बहुत उत्तम तिथि है, यह सभी पापों का हरण करनेवाली, पुण्य प्रदान करने वाली… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ४० से ४५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ४० से ४५ आचरण की श्रेष्ठता का प्रतिपादन राजा शतानीक ने कहा – मुने ! अब आप ब्राह्मण आदि के आचरण की श्रेष्ठता के विषय के बतलाने की कृपा करें । सुमन्तु मुनि… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ३९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ३९ षष्ठी – कल्प – निरूपण में स्कन्द – षष्ठी – व्रत की महिमा सुमन्तु मुनि बोले – राजन् ! अब मैं षष्ठी तिथि-कल्प का वर्णन करता हूँ । यह तिथि सभी मनोरथों को पूर्ण… Read More


॥ गायत्री स्तवराजः ॥ इस स्तव में श्लोक ४, ५, ८, १०, ११, २५, २६ में अन्य मंत्रों के प्रयोग हैं। विनियोगः- “ॐ अस्य श्री गायत्री स्तवराज मन्त्रस्य श्रीविश्वामित्रः ऋषिः सकल जननी चतुष्पदा गायत्री परमात्मा देवता। सर्वोत्कृष्टं परम धाम तत्-सवितुर्वरेण्यं बीजं भर्गो देवस्य धीमहि शक्तिः। धियो यो नः प्रचोदयात् कीलकं। ॐ भूः ॐ भुव ॐ… Read More


॥ श्रीगायत्रीसहस्रनामस्तोत्रम् श्रीमद्देवी भागवतांतर्गत ॥ विनियोगः- ॐ अस्य श्रीगायत्री अष्टोत्तर सहस्रनाम स्तोत्रस्य श्री ब्रह्मा ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः श्रीदेवी गायत्री देवता हलो बीजानि स्वराः शक्त्यः सर्वाभीष्ट सिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- श्रीब्रह्मा ऋषये नमः शिरसि । अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे । श्रीदेवी गायत्र्यै नमः हृदि । हल्भ्यो बीजेभ्यो नमः गुह्ये । स्वरेभ्यः शक्तिभ्यः नमः पादयोः ।… Read More