कुत्ते का महत्त्व 21वीं सदी में शकुन की बात करना पिछड़ापन-सा अवश्य लगता है, किन्तु जो परम्परा और रिवाज हमारे समाज में शताब्दियों से चली आ रही है, वे वैज्ञानिक मान्यता के बिना भी अपना वजूद कायम रखे हैं । हमारे देश में ज्योतिष को बहुत महत्त्व दिया जाता है, किन्तु महिलाओं में ‘सूण-सायण’ एक… Read More


दशरथकृत शनि स्तोत्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशनि-स्तोत्र-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, सौरिर्देवता, शं बीजम्, निः शक्तिः, कृष्णवर्णेति कीलकम्, धर्मार्थ-काम-मोक्षात्मक-चतुर्विध-पुरुषार्थ-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः। कर-न्यासः- शनैश्चराय अंगुष्ठाभ्यां नमः। मन्दगतये तर्जनीभ्यां नमः। अधोक्षजाय मध्यमाभ्यां नमः। कृष्णांगाय अनामिकाभ्यां नमः। शुष्कोदराय कनिष्ठिकाभ्यां नमः। छायात्मजाय करतल-कर-पृष्ठाभ्यां नमः। हृदयादि-न्यासः- शनैश्चराय हृदयाय नमः। मन्दगतये शिरसे स्वाहा। अधोक्षजाय शिखायै वषट्। कृष्णांगाय कवचाय हुम्। शुष्कोदराय नेत्र-त्रयाय… Read More


चतुष्षष्टि-योगिनी नाम-स्तोत्रम् गजास्या सिंह-वक्त्रा च, गृध्रास्या काक-तुण्डिका । उष्ट्रा-स्याऽश्व-खर-ग्रीवा, वाराहास्या शिवानना ।। उलूकाक्षी घोर-रवा, मायूरी शरभानना । कोटराक्षी चाष्ट-वक्त्रा, कुब्जा च विकटानना ।। शुष्कोदरी ललज्जिह्वा, श्व-दंष्ट्रा वानरानना । ऋक्षाक्षी केकराक्षी च, बृहत्-तुण्डा सुराप्रिया ।। कपालहस्ता रक्ताक्षी च, शुकी श्येनी कपोतिका । पाशहस्ता दंडहस्ता, प्रचण्डा चण्डविक्रमा ।। शिशुघ्नी पाशहन्त्री च, काली रुधिर-पायिनी । वसापाना गर्भरक्षा, शवहस्ताऽऽन्त्रमालिका… Read More


मातृका न्यास इस न्यास के नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें मातृकाओं अर्थात् वर्णों (अक्षरों) की स्थापना शरीर के अंगों में विधि-पूर्वक की जाती है । ‘अ’ से लेकर ‘क्ष’ तक की वर्ण-माला का ही सांकेतिक नाम ‘मातृका’ है । वर्ण या अक्षर ‘शब्द-ब्रह्म’ या ‘वाग्-शक्ति’ के स्वरुप हैं । इनका सूक्ष्म रुप ‘विमर्श-शक्ति’… Read More


धनाधीश कुबेर महिर्ष पुलस्त्य के पुत्र महामुनि विश्रवा ने इलविडा (या देववर्णिणी) का पाणिग्रहण किया। उसी से कुबेर जी की उत्पत्ति हुई। भगवान् ब्रह्मा ने इन्हें समस्त सम्पत्ति का स्वामी बनाया। ये तप करके उत्तर दिशा के लोक पाल हुए। कैलास के समीप इनकी अलकापुरी है। श्वेतवर्ण, तुन्दिल शरीर, अष्ट-दन्त एवं तीन चरणों वाले, गदाधारी… Read More


हनुमान् ज्योतिष विधिः- जिज्ञासु को स्नानादि से शुद्ध होकर “ॐ रां रामाय नमः” मन्त्र का ११ बार जप कर “ॐ हनुमते नमः” का जप करना चाहिए । उसके बाद सम्पूर्ण राम दरबार का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर तर्जनी अंगुली घुमाते एवं मन-ही-मन अपने प्रश्न को दोहराते हुए किसी एक कोष्ठक पर अंगुली रोक… Read More


एक ताऊ 10 साल बाद एक मुकदमा जीत गए… जज-बधाई हो बावा आप केस जीत गए। ताऊ-शाबाश, भगवान तेरी इतनी तरक्की करे कि तू दरोगा बन जाए जज-रे ताऊ, मैं तो जज हूं, जज तो दरोगा से बड़ा होवे है… ताऊ- ना मेरी नजर में तो दरोगा बड़ा है जज-कैसे ? ताऊ-तूने केस खत्म करने में 10 साल लगा दिए,… Read More


बैंक में एक ग्राहक ने सुन्दर बैंक कर्मी से बड़ी ही शालीनता से पूछा ? ग्राहक :– मैडम जी,क्या मैं यह जान सकता हूं कि जो चेक मैंने अभी दिया है वो कितने दिन में क्लियर होगा! मैडम :– कम से कम 2 दिन लगेंगे ! ग्राहक :– लेकिन मैडम, इतना टाइम क्यों लगेगा? जिस… Read More


।। अथ घण्टाकर्ण कल्प ।। प्रस्तुत प्रयोग जैन साधक की संवत १६६१ की पाण्डुलिपि में से उद्धृत् है । प्रयोग शुभ मास, शुक्ल पक्ष तथा ५-१०-१५ तिथि सोम, बुध व गुरुवार में करें । रवि-पुष्य, हस्त व मूल नक्षत्र में हो या अन्य कोई “अमृत-सिद्धि-योग” बने तब प्रयोग करें । प्रयोग देवस्थान, नदी, तालाब के… Read More


दश महाविद्या जयन्ती १॰ श्री भुवनेश्वरी जयन्तीः- भाद्रपद शुक्ला द्वादशी, रविवार । २॰ श्री काली जयन्तीः- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को अर्द्ध-रात्रि । ३॰ श्री ललिता जयन्तीः- माघ पूर्णिमा को प्रदोष समय । ४॰ श्री तारा जयन्तीः- चैत्र शुक्ल नवमी, शनिवार को मध्य रात्रि । ५॰ श्री छिन्न-मस्ता जयन्तीः- वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को अर्द्ध-रात्रि । ६॰… Read More