बंगाल के सिद्ध मंत्र प्रयोग काल विकाल बाण प्रयोग इस प्रयोग को करते समय देवी घट स्थापन करें, उसमें देवी का आवाहन करें । कार्तिकेय, गणेश, शिव का पूजन भी करें । दिग्-रक्षण प्रयोग स्वयं का एवं अपने स्थान का करें, यदि अन्यत्र जाके प्रयोग कर रहे हैं तो साधक पहले अपने स्थान, परिवार व… Read More


जपमाला के संस्कार कबीर जी ने कहा है – माला फेरत जुग भया, मिटा ना मन का फेर । कर का मन का छाड़ि के, मन का मनका फेर ।। माला के सम्बन्ध में शास्त्रों में बहुत विचार किया गया है । यहाँ संक्षेप में उसका कुछ थोड़ा-सा अनुमान मात्र दिया जाता है – माला… Read More


बंधी दूकान कैसे खोलें ? कभी-कभी देखने में आता है कि खूब चलती हुई दूकान भी एकदम से ठप्प हो जाती है । जहाँ पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी, वहाँ सन्नाटा पसरने लगता है । यदि किसी चलती हुई दुकान को कोई तांत्रिक बाँध दे, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, अतः इससे बचने… Read More


गोपालाक्षय कवचम् गर्भपात की आशंका होने पर या बार-बार गर्भपात होने की स्थिति में निम्न स्तोत्र का पाठ नियमित करना चाहिये । ।। श्री गणेशाय नमः ।। ।। श्रीनारद उवाच ।। इन्द्राद्यमरवर्गेषु ब्रह्मन्यत्परमाऽद्भुतम् । अक्षयं कवचं नाम कथयस्व मम प्रभो ।। १ ।। यद्धृत्वाऽऽकर्ण्य वीरस्तु त्रैलोक्य विजयी भवेत् ।… Read More


शनि साढ़े-साती निवारण १॰ किसी छोटे मिट्टी के बर्तन में या मोटा मजबूत कपड़े में २५० ग्राम तम्बाकू (बनाकर या बना हुआ खरीद कर) तथा ५०० ग्राम तेल डालकर उस बर्तन या कपड़े में नीचे एक छोटा-सा छेद करें तथा उसको शनिवार के दिन पीपल के पेड़ पर बाँध दें । फिर ५ सप्ताह तक… Read More


साधना का स्थान साधना के लिए समुचित स्थान का चयन करना प्रथम कार्य है । इस सम्बन्ध में तन्त्र-शास्त्र में स्पष्ट निर्देश मिलते हैं, जिनसे ज्ञात होता है कि दो प्रकार के ‘स्थान’ होते हैं – १॰ प्राकृतिक तथा २॰ मानव द्वारा निर्मित स्थान । इन स्थानों में से उपयुक्त स्थान को चुनकर वहाँ साधना… Read More


त्रिखल जन्म दोष क्या है ? जब किसी स्त्री के तीन लड़कियों के बाद लड़के का जन्म हो या तीन लड़कों के पश्चात् लड़की का जन्म हो तो ‘त्रिखल’ नामक दोष होता है । पुत्र जन्म हो तो पिता को भय, बीमारी और धन हानि होती है । पुत्री के जन्म होने से माता के… Read More


आप स्मार्त्त हैं या वैष्णव कभी-कभी पंचांगों में एकादशी और जन्माष्टमी के वर्तों में स्मार्त्तों के लिये और वैष्णवों के लिये – दो व्रत दो दिन लिखे रहते हैं। जनसाधारण नहीं समझ पाता कि वह व्रत किस दिन करे -पहले दिन या दूसरे दिन । ध्यान रहे – सम्पूर्ण संसार में फैले हिन्दू मात्र स्मार्त्त… Read More


ज्योतिष के परिप्रेक्ष्य में शाबर मन्त्र शाबर मन्त्रों के सम्बन्ध में कुछ लोग यह कहते हैं कि उन्होंने शाबर-मन्त्र ‘जप’ कया, किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ । वास्तव में ‘मन्त्र-सिद्धि’ न हो, तो जप दो बार या तीन बार करना चाहिए । फिर भी मन्त्र-सिद्धि न हो, तो उसके लिए अन्य कारणों को खोजना चाहिए… Read More


श्रीरामचरितमानस में स्वप्न  अभिधारणा प्रायः हर व्यक्ति स्वप्न देखता है । स्वप्न व्यक्ति को निद्रित अवस्था में ही आते हैं । निद्रा अवस्था में मन सुषुम्ना में प्रवेश कर जाता है, लेकिन देह की सभी क्रियाएँ निरन्तर जारी रहती है । हर संस्थान अपना कार्य करता है । तभी तो निद्रित अवस्था में मच्छर आदि… Read More