भूतनाथ जी की महिमा सम्राट् अकबर के समय की घटना है । उस समय से पहले मुर्शिदाबाद और मालदा का प्रान्त गौड़ देश के अन्तर्गत था और गौड़ देश के हिन्दू राजाओं के शासन में था । यह प्रसिद्ध ही है कि अकबर गुण-ग्राही सम्राट् था और हिन्दू-मुसलमान दोनों का, गुणों के अनुसार, समान रुप… Read More


देवी भ्रमर-वासिनी (‘दुर्गा-सप्तशती’ के ग्यारहवें अध्याय में महा-माया ने अपने अवतारों की सूचना दी है, उनमें से “भ्रामरी-देवी” सर्व-शेष अवतार है । देवी का कहना है कि वे शेष-अवतार के रुप में षष्टि-तम महायुग में आविर्भूत होंगी । जिस समय अरुण नामक महाऽसुर तीनों लोकों का उत्पीड़न करेगा, उस समय वे जगज्जननी भ्रामरी-रुप से प्रकट… Read More


हनुमान् ज्योतिष विधिः- जिज्ञासु को स्नानादि से शुद्ध होकर “ॐ रां रामाय नमः” मन्त्र का ११ बार जप कर “ॐ हनुमते नमः” का जप करना चाहिए । उसके बाद सम्पूर्ण राम दरबार का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर तर्जनी अंगुली घुमाते एवं मन-ही-मन अपने प्रश्न को दोहराते हुए किसी एक कोष्ठक पर अंगुली रोक… Read More


हनुमान् वडवानल स्तोत्र यह स्तोत्र सभी रोगों के निवारण में, शत्रुनाश, दूसरों के द्वारा किये गये पीड़ा कारक कृत्या अभिचार के निवारण, राज-बंधन विमोचन आदि कई प्रयोगों में काम आता है । विधिः- सरसों के तेल का दीपक जलाकर १०८ पाठ नित्य ४१ दिन तक करने पर सभी बाधाओं का शमन होकर अभीष्ट कार्य की… Read More


श्रीहनुमत्-मन्त्र-चमत्कार-अनुष्ठान (प्रस्तुत विधान के प्रत्येक मन्त्र के ११००० ‘जप‘ एवं दशांश ‘हवन’ से सिद्धि होती है। हनुमान जी के मन्दिर में, ‘रुद्राक्ष’ की माला से, ब्रह्मचर्य-पूर्वक ‘जप करें। नमक न खाए तो उत्तम है। कठिन-से-कठिन कार्य इन मन्त्रों की सिद्धि से सुचारु रुप से होते हैं।) १॰ ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय, वायु-सुताय, अञ्जनी-गर्भ-सम्भूताय, अखण्ड-ब्रह्मचर्य-व्रत-पालन-तत्पराय, धवली-कृत-जगत्-त्रितयाय,… Read More


हनुमान सिद्धि मन्त्र मन्त्रः- “अजरंग पहनूं, बजरंग पहनूं, सबरंग रक्खू पास । दांये चले भीम सेन, बांये हनुमन्त, आगे चले काजी साहब, पीछे कुल बलारद । आतर चौकी कच्छ कुरान । आगे पीछे तूं रहमान । धड़ खुदा, सिर राखे । सुलेमान, लोहे का कोट, तांबे का ताला, करला । हंसा बीरा । करतल बसे… Read More


श्री हनुमान सिद्धि के लिए मन्त्रः- “ॐ नमो देव लोक दिविख्या देवी, जहाँ बसे इस्माईल योगी । छप्पन भैरों, हनुमन्त वीर, भूत-प्रेत दैत्य को मार, भगावें । पराई माया ल्यावें । लाडू पेड़ा बरफी सेव सिंघाड़ा पाक बताशा मिश्री घेवर बालूसाई लोंग डोडा इलायची दाना तेल देवी काली के ऊपर । हनुमन्त गाजै ।। एती… Read More


हनुमान जी के संकट-नाशक अनुष्ठान १॰ विनियोगः- ॐ अस्य श्री हनुमन्महामन्त्रस्य ईश्वर ऋषिः, गायत्री छन्दः, हनुमान देवता, हं बीजं, नमः शक्तिः, आञ्जनेयाय कीलकम् मम सर्व-प्रतिबन्धक-निवृत्ति-पूर्वकं हनुमत्प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- ईश्वर ऋषये नमः शिरसि, गायत्री छन्दसे नमः मुखे, हनुमान देवतायै नमः हृदि, हं बीजाय नमः नाभौ, नमः शक्तये नमः गुह्ये, आञ्जनेयाय कीलकाय नमः पादयो मम… Read More


सर्व सिद्धिदायक हनुमान मन्त्र श्री हनुमान् जी का यह मंत्र समस्त प्रकार के कार्यों की सिद्धि के लिए प्रयोग किया जाता है । मन्त्र सिद्ध करने के लिए हनुमान जी के मन्दिर में जाकर हनुमान जी की पंचोपचार पूजा करें और शुद्ध घृत का दीपक जलाकर भीगी हुई चने की दाल और गुड़ का प्रसाद… Read More


भूत-प्रेत-नाशक श्री हनुमान् जी का ‘झाड़ा’-मन्त्र मन्त्रः- “जयति हनुमान जी, नित ध्यान धरुँ । सेऊँ वीर हनुमान, जटा-जूट अवधुत जंग जञ्जीर ।। लँगोट गाढ़ा भूत को बस कर, प्रेत को बसकर, गदा की मार से, तेल-सिन्दूर फल-फूल पान मंगल चढ़े, आप देखें जब रोट होवे । सत्य की नाव नरसिंह खेवे, दुष्ट के लात बजरंग… Read More