हनुमान अष्टादशाक्षर मन्त्र-प्रयोग July 27, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री हनुमान अष्टादशाक्षर मन्त्र-प्रयोग मन्त्रः- “ॐ नमो हनुमते आवेशय आवेशय स्वाहा ।” विधिः- सबसे पहले हनुमान जी की एक मूर्त्ति रक्त-चन्दन से बनवाए । किसी शुभ मुहूर्त्त में उस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कर उसे रक्त-वस्त्रों से सु-शोभित करे । फिर रात्रि में स्वयं रक्त-वस्त्र धारण कर, रक्त आसन पर पूर्व की तरफ मुँह करके बैठे… Read More
हनुमद्-बीसा July 27, 2015 | aspundir | Leave a comment हनुमद्-बीसा ।।दोहा।। राम भक्त विनती करूँ, सुन लो मेरी बात । दया करो कुछ मेहर उपाओ, सिर पर रखो हाथ ।। ।।चौपाई।। जय हनुमन्त, जय तेरा बीसा, कालनेमि को जैसे खींचा ।।१ करुणा पर दो कान हमारो, शत्रु हमारे तत्क्षण मारो ।।२ राम भक्त जय जय हनुमन्ता, लंका को थे किये विध्वंसा ।।३ सीता खोज… Read More
एकादशमुखी हनुमान कवच July 27, 2015 | aspundir | Leave a comment एकादशमुखी हनुमान कवच ।। श्रीगणेशाय नम: ।। ।। लोपामुद्रोवाच ।। कुम्भोद्भवदया सिन्धो श्रुतं हनुमंत: परम् । यंत्रमंत्रादिकं सर्वं त्वन्मुखोदीरितं मया ।।१।। दयां कुरु मयि प्राणनाथ वेदितुमुत्सहे । कवचं वायुपुत्रस्य एकादशखात्मन: ।।२।। इत्येवं वचनं श्रुत्वा प्रियाया: प्रश्रयान्वितम् । वक्तुं प्रचक्रमे तत्र लोपामुद्रां प्रति प्रभु: ।।३।। ।। अगस्त उवाच ।। नमस्कृत्वा रामदूतं हनुमन्तं महामतिम् । ब्रह्मप्रोक्तं तु… Read More
एक-मुखी-हनुमत्-कवचम् July 27, 2015 | aspundir | Leave a comment एक-मुखी-हनुमत्-कवचम् यह कवच भोजपत्र के ऊपर, ताड़पत्र पर या लाल रंग के रेशमी वस्त्र पर त्रिगन्ध की स्याही से लिखकर कण्ठ या भुजा पर धारण करना चाहिये । इसे त्रिलोह के ताबीज में भर कर धारण करना लाभकारी रहता है । रविवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर इसका पाठ करने से धन… Read More
आञ्जनेयास्त्रम् July 27, 2015 | aspundir | Leave a comment ।। अथ आञ्जनेयास्त्रम् ।। अधुना गिरिजानन्द आञ्जनेयास्त्रमुत्तमम् । समन्त्रं सप्रयोगं च वद मे परमेश्वर ।।१।। ।।ईश्वर उवाच।। ब्रह्मास्त्रं स्तम्भकाधारि महाबलपराक्रम् । मन्त्रोद्धारमहं वक्ष्ये श्रृणु त्वं परमेश्वरि ।।२।। आदौ प्रणवमुच्चार्य मायामन्मथ वाग्भवम् । शक्तिवाराहबीजं व वायुबीजमनन्तरम् ।।३।। विषयं द्वितीयं पश्चाद्वायु-बीजमनन्तरम् । ग्रसयुग्मं पुनर्वायुबीजं चोच्चार्य पार्वति ।।४।। स्फुर-युग्मं वायु-बीजं प्रस्फुरद्वितीयं पुनः । वायुबीजं ततोच्चार्य हुं फट् स्वाहा… Read More
मनोवांछित वर-प्राप्ति प्रयोग July 26, 2015 | aspundir | Leave a comment मनोवांछित वर-प्राप्ति प्रयोग १॰ भगवती सीता ने गौरी की उपासना निम्न मन्त्र द्वारा की थी, जिसके फलस्वरुप उनका विवाह भगवान् श्रीराम से हुआ। अतः कुमारी कन्याओं को मनोवाञ्छित वर पाने के लिये इसका पाठ करना चाहिए। “ॐ श्रीदुर्गायै सर्व-विघ्न-विनाशिन्यै नमः स्वाहा। सर्व-मङ्गल-मङ्गल्ये, सर्व-काम-प्रदे देवि, देहि मे वाञ्छितं नित्यं, नमस्ते शंकर-प्रिये।। दुर्गे शिवेऽभये माये, नारायणि सनातनि,… Read More
देवशयनी एकादशी July 26, 2015 | aspundir | Leave a comment देवशयनी एकादशी हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर २६ हो जाती है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं इस तिथि को ‘पद्मनाभा’ भी कहते हैं। सूर्य… Read More
अभीष्ट फल-दायक सदा-शिव-कवच July 26, 2015 | aspundir | Leave a comment अभीष्ट फल-दायक सदा-शिव-कवच भगवान् शिव का प्रस्तुत कल्याणकारी कवच अत्यन्त छोटा है और प्रायः अनुभूत है । आशा है, भक्त-जन इसका प्रातः-काल नित्य-पाठ कर इससे लाभ उठाएँगे । इस कवच के पाठ से सभी कामनाओं की पूर्ति एवं सर्व प्रकार से रक्षा होती है । ।।श्रीदेवी उवाच।। भगवन् देव-देवेश ! सर्वाम्नाय-प्रपूजित! सर्वं मे कथितं देव… Read More
दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र July 26, 2015 | aspundir | Leave a comment दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र शाण्डिल्य मुनि ने एक दरिद्र पुत्र की माता से कहा- ‘शिवजी की प्रदोषकाल के अन्तर्गत की गयी पूजा का फल श्रेष्ठ होता है। जो प्रदोषकाल में शिव की पूजा करते हैं, वे इसी जन्म में धन-धान्य, कुल-सम्पत्ति से समृद्ध हो जाते हैं। ब्राह्मणी ! तुम्हारा पुत्र पूर्व-जन्म में ब्राह्मण था। इसने… Read More
शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग July 26, 2015 | aspundir | Leave a comment शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग शत्रु-बाधा निवारक ‘दारूण-सप्तक’ जब हिरण्यकश्यप को भगवान् नृसिंह ने अपनी गोद में रखकर अपने खर-तर नखों से उसके उदर को सर्वथा विदीर्ण कर चीर दिया और प्रह्लाद का दुःख दूर हो गया । तदनन्तर श्री भगवान् नृसिंह का वह क्रोध शान्त न हुआ, तब भगवान् विष्णु के आग्रह पर भगवान् रुद्र… Read More