अग्निपुराण – अध्याय 373 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ तिहत्तरवाँ अध्याय आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार का वर्णन आसनप्राणायामप्रत्याहाराः अग्निदेव कहते हैं — मुने। पद्मासन आदि नाना प्रकार के ‘आसन’ बताये गये हैं। उनमें से कोई भी आसन बाँधकर परमात्मा का चिन्तन करना चाहिये। पहले किसी पवित्र स्थान… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 372 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ बहत्तरवाँ अध्याय यम और नियमों की व्याख्या; प्रणव की महिमा तथा भगवत् पूजन का माहात्म्य यमनियमाः अग्निदेव कहते हैं — मुने। अब मैं ‘अष्टाङ्गयोग’ का वर्णन करूँगा, जो जगत्‌ के त्रिविध ताप से छुटकारा दिलाने का साधन है।… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 371 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ इकहत्तरवाँ अध्याय प्राणियों की मृत्यु, नरक तथा पापमूलक जन्म का वर्णन नरकनिरूपणम् अग्निदेव कहते हैं — मुने! मैं यमराज के मार्ग की पहले चर्चा कर चुका हूँ, इस समय मनुष्यों की मृत्यु के विषय में कुछ निवेदन करूँगा… Read More


अग्निपुराण — अध्याय 370 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सत्तरवाँ अध्याय शरीर के अवयव शरीरावयवविभागवर्णनं अग्निदेव कहते हैं – वसिष्ठजी ! कान, त्वचा, नेत्र, जिह्वा और नासिका — ये ज्ञानेन्द्रियाँ हैं । आकाश सभी भूतों में व्यापक है । शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध – ये… Read More


अग्निपुराण — अध्याय 369 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ उनहत्तरवाँ अध्याय आत्यन्तिक प्रलय एवं गर्भ की उत्पत्ति का वर्णन आत्यन्तिकलयगर्भोत्पत्तिनिरूपणम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठजी ! अब मैं ‘आत्यन्तिक प्रलय’ का वर्णन करूँगा । जब जगत् के आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक संतापों को जानकर मनुष्य को अपने… Read More


अग्निपुराण — अध्याय 368 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ अड़सठवाँ अध्याय नित्य, नैमित्तिक और प्राकृत प्रलय का वर्णन नित्यनैमित्तिकप्राकृतप्रलयाः अग्निदेव कहते हैं — मुनिवर ! ‘प्रलय’ चार प्रकार का होता है — नित्य, नैमित्तिक, प्राकृत और आत्यन्तिक । जगत् में उत्पन्न हुए प्राणियों की जो सदा ही… Read More


अग्निपुराण — अध्याय 367 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सड़सठवाँ अध्याय सामान्य नाम—लिङ्ग सामान्यनामलिङ्गानि अग्निदेव कहते हैं — मुनिवर ! अब मैं सामान्यतः नामलिङ्गों का वर्णन करूँगा ( इस प्रकरण में आये हुए शब्द प्रायः ऐसे होंगे, जो अपने विशेष्य के अनुसार तीनों लिङ्गों में प्रयुक्त हो… Read More


अग्निपुराण — अध्याय 366 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ छाछठवाँ अध्याय क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र-वर्ग क्षत्रविट्‌शूद्रवर्गाः अग्निदेव कहते हैं — मूर्धाभिषिक्त, राजन्य बाहुज, क्षत्रिय और विराट् — ये क्षत्रिय के वाचक हैं । जिस राजा के सामने सभी सामन्त— नरेश मस्तक झुकाते हैं, उसे अधीश्वर कहते हैं… Read More


अग्निपुराण — अध्याय 365 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ पैंसठवाँ अध्याय ब्रह्म-वर्ग ब्रह्मवर्गः अग्निदेव कहते हैं — वंश, अन्ववाय, गोत्र, कुल, अभिजन और अन्वय— ये वंश के नाम हैं । मन्त्र की व्याख्या करने वाले ब्राह्मण को आचार्य कहते हैं । जिसने यज्ञ में व्रत की दीक्षा… Read More


अग्निपुराण — अध्याय 364 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ चौसठवाँ अध्याय मनुष्य-वर्ग नृब्रह्मक्षत्रविट्शूद्रवर्गाः अग्निदेव कहते हैं — अब मैं नाम—निर्देशपूर्वक मनुष्यवर्ग, ब्राह्मण वर्ग, क्षत्रिय वर्ग, वैश्य वर्ग और शूद्रवर्ग का क्रमशः वर्णन करूँगा । ना, नर, पञ्चजन और मर्त्य — ये मनुष्य एवं पुरुष के वाचक हैं… Read More