अग्निपुराण – अध्याय 013 अग्निपुराण – अध्याय 013 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तेरहवाँ अध्याय महाभारत की संक्षिप्त कथा कुरुपाण्डवोत्पत्यादिकथनम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं श्रीकृष्ण की महिमा को लक्षित कराने वाला महाभारत का उपाख्यान सुनाता हूँ, जिसमें श्रीहरि ने पाण्डवों को निमित्त बनाकर इस पृथ्वी का भार उतारा था । भगवान्… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 012 अग्निपुराण – अध्याय 012 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय १२ श्रीहरिवंश का वर्णन एवं श्रीकृष्णावतार की संक्षिप्त कथा अग्निदेव कहते हैं — अब मैं हरिवंश का वर्णन करूँगा। श्रीविष्णु के नाभि-कमल से ब्रह्माजी का प्रादुर्भाव हुआ। ब्रह्माजी से अत्रि, अत्रि से सोम, सोम से [बुध एवं बुध से]… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 011 अग्निपुराण – अध्याय 011 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय ११ उत्तरकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — जब रघुनाथजी अयोध्या के राजसिंहासन पर आसीन हो गये, तब अगस्त्य आदि महर्षि उनका दर्शन करने के लिये गये। वहाँ उनका भली भाँति स्वागत-सत्कार हुआ। तदनन्तर उन ऋषियों ने कहा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 010 अग्निपुराण – अध्याय 010 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय १० युद्धकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — तदनन्तर श्रीरामचन्द्रजी के आदेश से अङ्गद रावण के पास गये और बोले — ‘रावण! तुम जनककुमारी सीता को ले जाकर शीघ्र ही श्रीरामचन्द्रजी को सौंप दो अन्यथा मारे जाओगे ।’… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 009 अग्निपुराण – अध्याय 009 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय ९ सुन्दरकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — सम्पाति की बात सुनकर हनुमान् और अङ्गद आदि वानरों ने समुद्र की ओर देखा। फिर वे कहने लगे — ‘कौन समुद्र को लाँघकर समस्त वानरों को जीवन दान देगा?’ ॥… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 008 अग्निपुराण – अध्याय 008 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय ८ किष्किन्धाकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — श्रीरामचन्द्रजी पम्पा- सरोवर पर जाकर सीता के लिये शोक करने लगे। वहाँ वे शबरी से मिले। फिर हनुमान् जी से उनकी भेंट हुई। हनुमान् जी उन्हें सुग्रीव के पास ले… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 007 अग्निपुराण – अध्याय 007 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सातवाँ अध्याय अरण्यकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — मुने! श्रीरामचन्द्रजी ने महर्षि वसिष्ठ तथा माताओं को प्रणाम करके उन सबको भरत के साथ विदा कर दिया । तत्पश्चात् महर्षि अत्रि तथा उनकी पत्नी अनसूया को, शरभङ्गमुनि को, सुतीक्ष्ण… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 006 अग्निपुराण – अध्याय 006 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छठा अध्याय अयोध्याकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — भरत के ननिहाल चले जाने पर [लक्ष्मणसहित ] श्रीरामचन्द्रजी ही पिता- माता आदि के सेवा-सत्कार में रहने लगे। एक दिन राजा दशरथ ने श्रीरामचन्द्रजी से कहा — ‘ रघुनन्दन !… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 005 अग्निपुराण – अध्याय 005 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पाँचवाँ अध्याय श्रीरामावतार-वर्णन के प्रसङ्ग में रामायण – बालकाण्ड की संक्षिप्त कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं ठीक उसी प्रकार रामायण का वर्णन करूँगा, जैसे पूर्वकाल में नारदजी ने महर्षि वाल्मीकिजी को सुनाया था। इसका पाठ भोग और… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 004 अग्निपुराण – अध्याय 004 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौथा अध्याय वराह, नृसिंह, वामन और परशुराम अवतारकी कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं वराहावतार की पापनाशिनी कथा का वर्णन करता हूँ। पूर्वकाल में ‘हिरण्याक्ष’ नामक दैत्य असुरों का राजा था। वह देवताओं को जीतकर स्वर्ग में… Read More