शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 09 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता नौवाँ अध्याय भैरवावतारलीलावर्णन नन्दीश्वर बोले – हे सनत्कुमार! हे सर्वज्ञ ! अब आप महादोषोंको दूर करनेवाली और भक्तिको बढ़ानेवाली दूसरी भैरवी कथाको प्रेमपूर्वक सुनिये ॥ १ ॥ काशीका सान्निध्य प्राप्तकर वे कालभैरव कालके भी भक्षक महाकाल हुए। देवदेवके आदेशसे… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 08 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता आठवाँ अध्याय भैरवावतारवर्णन नन्दीश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! हे सर्वज्ञ ! अब आप भैरवकी कथा सुनें, जिसके सुननेमात्रसे शिवभक्ति सुस्थिर हो जाती है ॥ १ ॥ भैरवजी परमात्मा शंकरके पूर्णरूप हैं, शिवजीकी मायासे मोहित मूर्खलोग उन्हें नहीं जान… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 07 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता सातवाँ अध्याय नन्दिकेश्वरका गणेश्वराधिपति पदपर अभिषेक एवं विवाह नन्दीश्वर बोले – हे मुने! मैं उस वनमें जाकर निर्जन स्थलमें आसन लगाकर धीरतापूर्वक कठोर तप करने लगा, जो मुनिजनोंके लिये भी असाध्य है ॥ १ ॥ नदीके उत्तरकी ओर पवित्र… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 06 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता छठा अध्याय  नन्दीश्वरावतारवर्णन सनत्कुमार बोले— [हे नन्दीश्वर!] आप महादेवके अंशसे किस प्रकार उत्पन्न हुए और किस प्रकार शिवत्वको प्राप्त हुए ? हे प्रभो ! मैं वह सब सुनना चाहता हूँ, अतः आप मुझे बतानेकी कृपा करें ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता पाँचवाँ अध्याय वाराहकल्पके दसवेंसे अट्ठाईसवें द्वापरतक होनेवाले व्यासों एवं शिवावतारोंका वर्णन शिवजी बोले – [ हे ब्रह्मन् ! ] दसवें द्वापरयुगमें जब त्रिधामा नामक मुनि व्यास होंगे, उस समय मैं हिमालय पर्वतके मनोहर भृगुतुंग नामक ऊँचे शिखरपर अवतार ग्रहण… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता चौथा अध्याय वाराहकल्पके प्रथमसे नवम द्वापरतक हुए व्यासों एवं शिवावतारोंका वर्णन नन्दीश्वर बोले – हे सनत्कुमार! हे सर्वज्ञ ! अब शंकरजीके जिस सुखदायक चरित्रको हर्षित होकर रुद्रने ब्रह्माजीसे प्रेमपूर्वक कहा था, [उस चरित्रको सुनें ] ॥ १ ॥ शिवजी… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 003 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता तीसरा अध्याय भगवान् शिवका अर्धनारीश्वर – अवतार एवं सतीका प्रादुर्भाव नन्दीश्वर बोले- हे तात ! हे महाप्राज्ञ ! अब मैं ब्रह्माजीकी मनोकामनाओंको पूर्ण करनेवाले शिवके उत्तम अर्धनारीश्वर नामक रूपका वर्णन कर रहा हूँ, उसे सुनें । ब्रह्माके द्वारा विरचित… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 002 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता दूसरा अध्याय भगवान् शिवकी अष्टमूर्तियोंका वर्णन नन्दीश्वर बोले — हे प्रभो ! हे तात! हे मुने ! अब महेश्वरके समस्त प्राणियोंको सुख प्रदान करनेवाले तथा लोकके सम्पूर्ण कार्योंको सम्पादित करनेवाले अन्य श्रेष्ठतम अवतारोंको सुनें ॥ १ ॥ यह सारा… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 001 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता पहला अध्याय सूतजी से शौनकादि मुनियोंका शिवावतारविषयक प्रश्न महानन्दमनन्तलीलं महेश्वरं सर्वविभुं महान्तम् । गौरीप्रियं कार्तिकविघ्नराज-समुद्भवं शङ्करमादिदेवम् ॥ मैं परम आनन्दस्वरूप, अनन्त लीलाओं से युक्त, सर्वत्र व्यापक, महान्, गौरीप्रिय, कार्तिकेय और गजानन को उत्पन्न करने वाले आदिदेव महेश्वर शंकर को… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 59 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उनसठवाँ अध्याय काशी के कन्दुकेश्वर शिवलिंग के प्रादुर्भाव में पार्वती द्वारा विदल एवं उत्पल दैत्यों के वध की कथा, रुद्रसंहिता का उपसंहार तथा इसका माहात्म्य सनत्कुमार बोले — हे व्यासजी ! अब आप प्रेमपूर्वक शिवजी के उस चरित्र को सुनिये, जिस… Read More