श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय राजा तालध्वज का विलाप और ब्राह्मणवेशधारी भगवान् विष्णु के प्रबोधन से उन्हें वैराग्य होना, भगवान् विष्णु का नारद से माया के प्रभाव का वर्णन करना मायाप्राबल्यवर्णनम् नारदजी बोले — मुझ विप्ररूप नारद को देखकर वे राजा तालध्वज… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-28 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-अष्टाविंशोऽध्यायः अट्ठाईसवाँ अध्याय भगवान् विष्णु का नारदजी से माया की अजेयता का वर्णन करना, मुनि नारद को मायावश स्त्री रूप की प्राप्ति तथा राजा तालध्वज का उनसे प्रणय निवेदन करना नारदेन स्वस्त्रीत्वप्राप्तिवर्णनम् नारदजी बोले — हे मुनिवर ! अब आप… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-29 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-एकोनत्रिंशोऽध्यायः उनतीसवाँ अध्याय राजा तालध्वज से स्त्रीरूपधारी नारदजी का विवाह, अनेक पुत्र -उत्पत्ति और युद्ध में उन सबकी मृत्यु, नारदजी का शोक और भगवान् विष्णु की कृपा से पुनः स्वरूपबोध नारदस्य पुनः स्वरूपप्राप्तिवर्णनम् नारदजी बोले — हे विशाम्पते! राजा तालध्वज… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-27 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-सप्तविंशोऽध्यायः सत्ताईसवाँ अध्याय वानरमुख नारद से दमयन्ती का विवाह, नारद तथा पर्वत का परस्पर शापमोचन नारदस्य मायादमयन्त्या सह विवाहवर्णनम् नारदजी बोले — धात्री के मुख से अपनी कन्या का वह वचन सुनकर राजा संजय पास ही बैठी सुन्दर नेत्रोंवाली अपनी… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-26 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-षड्‌विंशोऽध्यायः छब्बीसवाँ अध्याय देवर्षि नारद और पर्वतमुनि का एक-दूसरे को शाप देना, राजकुमारी दमयन्ती का नारद से विवाह करने का निश्चय दमयन्तीविवाहप्रस्ताववर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन्!] तब परमार्थवेत्ता नारदजी मेरी बात सुनने के पश्चात् मोह का कारण पूछने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-25 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-पञ्चविंशोऽध्यायः पचीसवाँ अध्याय पाण्डु और विदुर के जन्म की कथा, पाण्डवों का जन्म, पाण्डु की मृत्यु, द्रौपदी स्वयंवर, राजसूय यज्ञ, कपटद्यूत तथा वनवास और व्यासजी के मोह का वर्णन व्यासस्वकीयमोहवर्णनम्  व्यासजी बोले — मेरी वह बात सुनकर वासवराजकुमारी सत्यवती चकित… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय धृतराष्ट्र के जन्म की कथा अम्बिकायाः नियोगात्पुत्रोत्पादनाय गर्भधारणवर्णनम् राजा बोले — हे भगवन्! आपके मुखारविन्द से निर्गत इस अमृततुल्य दिव्य कथारस का निरन्तर पान करते रहने पर भी मैं तृप्त नहीं हो पा रहा हूँ ॥ १… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय भगवती के सिद्धिप्रदायक मन्त्र से दीक्षित एकवीर द्वारा कालकेतु का वध, एकवीर और एकावली का विवाह तथा हैहयवंश की परम्परा एकवीरैकावल्योर्विवाहवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! उस यशोवती की बात सुनकर लक्ष्मीपुत्र प्रतापी एकवीर का मुखारविन्द… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय यशोवती का एकवीर से कालकेतु द्वारा एकावली के अपहृत होने की बात बताना हैहयैकवीराय यशोवत्यैकावलीमोचनाय देवीस्वप्नवर्णनम् यशोवती बोली — एक बार वह सुन्दरी एकावली प्रातः काल उठकर अपनी सखियों के साथ चल दी। वह बहुत-से रक्षकों से… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-21 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-एकविंशोऽध्यायः इक्कीसवाँ अध्याय आखेट के लिये वन में गये राजा से एकावली की सखी यशोवती की भेंट, एकावली के जन्म की कथा राजपुत्र्याः एकावल्याः वर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! तत्पश्चात् राजा हरिवर्मा ने बालक के जातकर्म आदि संस्कार… Read More