ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 11 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ ग्यारहवाँ अध्याय तृणावर्त का उद्धार तथा उसके पूर्वजन्म का परिचय भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! एक दिन गोकुल में सती साध्वी नन्दरानी यशोदा बालक को गोद लिये घर के कामकाज में लगी हुई थीं। उस समय गोकुल में बवंडर का रूप धारण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 10 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दसवाँ अध्याय आकाशवाणी सुनकर कंस का पूतना को गोकुल में भेजना, पूतना का श्रीकृष्ण के मुख में विषमिश्रित स्तन देना और प्राणों से हाथ धोकर श्रीकृष्ण की कृपा से माता की गति को प्राप्त हो गोलोक में जाना भगवान् नारायण कहते हैं —… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 09 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ नौवाँ अध्याय श्रीकृष्ण की अनिर्वचनीय महिमा, धरा और द्रोणकी तपस्या, अदिति और कद्रूका पारस्परिक शापसे देवकी तथा रोहिणीके रूपमें भूतलपर जन्म, हलधर और श्रीकृष्णके जन्मका उत्सव नारदजी ने पूछा — भगवन् ! गोकुल में यशोदा-भवन के भीतर श्रीकृष्ण को रखकर जब वसुदेवजी ने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 08 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ आठवाँ अध्याय जन्माष्टमी-व्रत के पूजन, उपवास तथा महत्त्व आदि का निरूपण नारदजी बोले — भगवन् ! जन्माष्टमी-व्रत समस्त व्रतों में उत्तम कहा गया है। अतः आप उसका वर्णन कीजिये। जिस जन्माष्टमी व्रत में जयन्ती नामक योग प्राप्त होता है, उसका फल क्या है… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 07 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सातवाँ अध्याय श्रीकृष्णजन्म-वृत्तान्त-आकाशवाणी से प्रभावित हो देवकी के वध के लिये उद्यत हुए कंस को वसुदेवजी का समझाना, कंस द्वारा उसके छः पुत्रों का वध, सातवें गर्भ का संकर्षण, आठवें गर्भ में भगवान् ‌का आविर्भाव – देवताओं द्वारा स्तुति, भगवान्‌ का दिव्य रूप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 06 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छठा अध्याय देवताओं द्वारा तेजःपुञ्ज में श्रीकृष्ण और राधा के दर्शन तथा स्तवन, श्रीकृष्ण द्वारा देवताओं का स्वागत तथा उन्हें आश्वासन-दान, भगवद्भक्त के महत्त्व का वर्णन, श्रीराधासहित गोप-गोपियों को व्रज में अवतीर्ण होने के लिये श्रीहरि का आदेश, सरस्वती और लक्ष्मीसहित वैकुण्ठवासी नारायण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 05 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पाँचवाँ अध्याय श्रीराधा के विशाल भवन एवं अन्तःपुर की शोभा का वर्णन, ब्रह्मा आदि को दिव्य तेजःपुञ्ज के दर्शन तथा उनके द्वारा उन तेजोमय परमेश्वर की स्तुति भगवान् नारायण कहते हैं — सम्पूर्ण गोलोक का दर्शन करके उन तीनों देवताओं के मन में… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 04 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौथा अध्याय पृथ्वी का देवताओं के साथ ब्रह्मलोक में जाकर अपनी व्यथा-कथा सुनाना, ब्रह्माजी का उन सबके साथ कैलासगमन, कैलास से ब्रह्मा, शिव तथा धर्म का वैकुण्ठ में जाकर श्रीहरि की आज्ञा से गोलोक में जाना और वहाँ विरजा-तट, शतशृङ्ग-पर्वत, रासमण्डल एवं वृन्दावन… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 03 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसरा अध्याय श्रीदामा और राधा का परस्पर शाप नारायण बोले — हे मुने ! राधा ने रति-गृह में जाकर भगवान् को नहीं देखा और विरजा का नदी रूप देखकर अपने भवन लोट गयीं । अनन्तर श्रीकृष्ण ने अपनी प्रेयसी विरजा को नदी रूप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 02 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दूसरा अध्याय श्रीराधा और श्रीकृष्ण के गोकुल में अवतार लेने का कारण नारायण बोले — जिसकी प्रार्थनावश भगवान् श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये और पृथ्वी पर जो-जो कार्य करके अपने लोक को चले गये; जैसे पृथ्वी का भार उतारना, दुष्टों के वध तथा पृथ्वी… Read More