ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 01 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 01 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पहला अध्याय नारदजी के प्रश्न तथा मुनिवर नारायण द्वारा भगवान् विष्णु एवं वैष्णव के माहात्म्य का वर्णन नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् । देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत् ॥ भगवान् नारायण, नरश्रेष्ठ नर तथा देवी सरस्वती को नमस्कार करके जय ( इतिहास- पुराण… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 46 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 46 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छियालीसवाँ अध्याय सबका स्तवन-पूजन और नमस्कार करके परशुराम का जाने के लिये उद्यत होना, गणेश-पूजा में तुलसी – निषेध के प्रसङ्ग में गणेश -तुलसी के संवाद का वर्णन तथा गणपति-खण्ड का श्रवण – माहात्म्य श्रीनारायण कहते हैं — नारद! इस प्रकार परशुराम ने… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 45 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 45 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय परशुराम को गौरी का स्तवन करने के लिये कहकर विष्णु का वैकुण्ठ गमन, परशुराम का पार्वती की स्तुति करना श्रीनारायण कहते हैं — नारद! इस प्रकार पार्वती को समझा-बुझाकर भगवान् विष्णु परशुराम से हितकारक, तत्त्वस्वरूप, नीति का साररूप और परिणाम में… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 44 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 44 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौवालीसवाँ अध्याय पार्वती की शिव से प्रार्थना, परशुराम को देखकर उन्हें मारने के लिये उद्यत होना, परशुराम द्वारा इष्टदेव का ध्यान, भगवान् का वामनरूप से पधारना, शिव-पार्वती को समझाना और नामाष्टक-गणेश-स्तोत्र को प्रकट करना पार्वती ने कहा — प्रभो ! जगत् में सभी… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 43 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 43 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय परशुराम के न मानने पर गणेश द्वारा उन्हें स्तम्भित करके अपनी सूँड़ में लपेटकर सभी लोकों में घुमाते हुए गोलोक में श्रीकृष्ण का दर्शन कराकर भूतल पर छोड़ देना, होश में आने पर परशुराम का कुपित होकर गणेश पर फरसे का… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 42 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 42 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बयालीसवाँ अध्याय परशुराम का शिव के अन्तःपुर में जाने के लिये गणेश से अनुरोध, गणेश का उन्हें समझाना परशुराम ने कहा — भाई ! मैं ईश्वर को प्रणाम करने के लिये अन्तःपुर में जाऊँगा और भक्तिपूर्वक माता पार्वती को नमस्कार करके तुरंत ही… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 41 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 41 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इकतालीसवाँ अध्याय परशुराम का कैलास-गमन, वहाँ शिव-भवन में पार्षदों सहित गणेश को प्रणाम करके आगे बढ़ने को उद्यत होना, गणेश द्वारा रोके जाने पर उनके साथ वार्तालाप श्रीनारायण कहते हैं — नारद! श्रीहरि का कवच धारण करके जब परशुराम ने पृथ्वी को क्षत्रियों… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 40 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 39 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चालीसवाँ अध्याय परशुराम द्वारा पुत्र सहित राजा सहस्राक्ष का वध, कार्तवीर्य- परशुराम-युद्ध, परशुराम की मूर्च्छा, शिव द्वारा उन्हें पुनर्जीवन दान, कार्तवीर्य-परशुराम संवाद, आकाशवाणी सुनकर शिव का विप्रवेष धारण करके कार्तवीर्य से कवच माँग लेना, परशु द्वारा कार्तवीर्य तथा अन्यान्य क्षत्रियों का संहार, ब्रह्मा… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 39 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 39 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उनतालीसवाँ अध्याय दुर्गा कवच का वर्णन नारदजी ने कहा — प्रभो ! महालक्ष्मी के मनोहर कवच का वर्णन तो आपने कर दिया। ब्रह्मन् ! अब दुर्गतिनाशिनी दुर्गा के उस उत्तम कवच को बतलाइये, जो पद्माक्ष के प्राणतुल्य, जीवनदाता, बल का हेतु, कवचों का… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 38 ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 38 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अड़तीसवाँ अध्याय सुचन्द्र-पुत्र पुष्कराक्ष के साथ परशुराम का युद्ध, पाशुपतास्त्र छोड़ने के लिये उद्यत परशुराम के पास विष्णु का आना और उन्हें समझाना, विष्णु का विप्रवेष से पुत्र सहित पुष्कराक्ष से लक्ष्मीकवच तथा दुर्गाकवच को माँग लेना, लक्ष्मीकवच का वर्णन श्रीनारायण कहते हैं… Read More