कुंजिका स्तोत्र और ‘बीसा यन्त्र’ का अनुभूत अनुष्ठान कुंजिका स्तोत्र’ और ‘बीसा यन्त्र’ का अनुभूत अनुष्ठान प्राण-प्रतिष्ठा करने के पर्व चन्द्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण, दीपावली के तीन दिन (धन तेरस, चर्तुदशी, अमावस्या), रवि-पुष्य योग, रवि-मूल योग तथा महानवमी के दिन ‘रजत-यन्त्र’ की प्राण प्रतिष्ठा, पूजादि विधान करें। इनमे से जो समय आपको मिले, साधना प्रारम्भ करें। 41 दिन तक विधि-पूर्वक पूजादि करने से… Read More
हनुमत्-मन्त्र-चमत्कार-अनुष्ठान श्रीहनुमत्-मन्त्र-चमत्कार-अनुष्ठान (प्रस्तुत विधान के प्रत्येक मन्त्र के ११००० ‘जप‘ एवं दशांश ‘हवन’ से सिद्धि होती है। हनुमान जी के मन्दिर में, ‘रुद्राक्ष’ की माला से, ब्रह्मचर्य-पूर्वक ‘जप करें। नमक न खाए तो उत्तम है। कठिन-से-कठिन कार्य इन मन्त्रों की सिद्धि से सुचारु रुप से होते हैं।) १॰ ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय, वायु-सुताय, अञ्जनी-गर्भ-सम्भूताय, अखण्ड-ब्रह्मचर्य-व्रत-पालन-तत्पराय, धवली-कृत-जगत्-त्रितयाय,… Read More
मनोवांछित वर-प्राप्ति प्रयोग मनोवांछित वर-प्राप्ति प्रयोग १॰ भगवती सीता ने गौरी की उपासना निम्न मन्त्र द्वारा की थी, जिसके फलस्वरुप उनका विवाह भगवान् श्रीराम से हुआ। अतः कुमारी कन्याओं को मनोवाञ्छित वर पाने के लिये इसका पाठ करना चाहिए। “ॐ श्रीदुर्गायै सर्व-विघ्न-विनाशिन्यै नमः स्वाहा। सर्व-मङ्गल-मङ्गल्ये, सर्व-काम-प्रदे देवि, देहि मे वाञ्छितं नित्यं, नमस्ते शंकर-प्रिये।। दुर्गे शिवेऽभये माये, नारायणि सनातनि,… Read More
दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र शाण्डिल्य मुनि ने एक दरिद्र पुत्र की माता से कहा- ‘शिवजी की प्रदोषकाल के अन्तर्गत की गयी पूजा का फल श्रेष्ठ होता है। जो प्रदोषकाल में शिव की पूजा करते हैं, वे इसी जन्म में धन-धान्य, कुल-सम्पत्ति से समृद्ध हो जाते हैं। ब्राह्मणी ! तुम्हारा पुत्र पूर्व-जन्म में ब्राह्मण था। इसने… Read More
रोग एवं अपमृत्यु-निवारक प्रयोग रोग एवं अपमृत्यु-निवारक प्रयोग ।। श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्र प्रयोग ।। किसी प्राचीन शिवालय में जाकर गणेश जी की “ॐ गं गणपतये नमः” मन्त्र से षोडशोपचार पूजन करे । तदनन्तर “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र से महा-देव जी की पूजा कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्रस्य श्री कहोल ऋषिः, विराट् छन्दः,… Read More
आपदुद्धारक श्रीबटुक-भैरव-अष्टोत्तर-शत-नामावली के प्रयोग आपदुद्धारक श्रीबटुक-भैरव-अष्टोत्तर-शत-नामावली के प्रयोग “भैरव-तन्त्र” के अनुसार आपदुद्धारक श्रीबटुक-भैरव-अष्टोत्तर-शत-नामावली के कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं – १॰ रात्रि में तीन मास तक प्रति-दिन ३८ पाठ करने से (कुल ११४० पाठ) विद्या और धन की प्राप्ति होती है। २॰ तीन मास तक रात्रि में नौ अथवा बारह पाठ प्रति-दिन करने से ‘इष्ट-सिद्धि’ प्राप्त होती है ।… Read More