श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-08 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय धृतराष्ट्र आदि का दावाग्नि में जल जाना, प्रभासक्षेत्र में यादवों का परस्पर युद्ध और संहार, कृष्ण और बलराम का परमधामगमन, परीक्षित् को राजा बनाकर पाण्डवों का हिमालय- पर्वत पर जाना, परीक्षित् को शाप की प्राप्ति, प्रमद्वरा और… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-07 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय धृतराष्ट्र का युधिष्ठिर से दुर्योधन के पिण्डदान हेतु धन माँगना, भीमसेन का प्रतिरोध; धृतराष्ट्र, गान्धारी, कुन्ती, विदुर और संजय का वन के लिये प्रस्थान, वनवासी धृतराष्ट्र तथा माता कुन्ती से मिलने के लिये युधिष्ठिर का भाइयों के… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-06 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठवाँ अध्याय दुर्वासा का कुन्ती को अमोघ कामद मन्त्र देना, मन्त्र के प्रभाव से कन्यावस्था में ही कर्ण का जन्म, कुन्ती का राजा पाण्डु से विवाह, शाप के कारण पाण्डु का सन्तानोत्पादन में असमर्थ होना, मन्त्र-प्रयोग से कुन्ती और… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-05 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-पँचमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय मत्स्यगन्धा ( सत्यवती )-को देखकर राजा शन्तनु का मोहित होना, भीष्म द्वारा आजीवन ब्रह्मचर्य-व्रत धारण करने की प्रतिज्ञा करना और शन्तनु का सत्यवती से विवाह देवव्रतप्रतिज्ञावर्णनम् ऋषिगण बोले — हे लोमहर्षणतनय सूतजी ! आपने शापवश अष्टवसुओं के… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-04 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय गङ्गाजी द्वारा राजा शन्तनु का पति रुप में वरण, सात पुत्रों का जन्म तथा गङ्गा का उन्हे अपने जल में प्रवाहित करना, आठवें पुत्र के रुप में भीष्म का जन्म तथा उनकी शिक्षा-दीक्षा देवव्रतोत्पतिवर्णनम् सूतजी बोले —… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-03 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय राजा शन्तनु, गंगा और भीष्म के पूर्वजन्म की कथा प्रतीयसकाशाच्छन्तनुजन्मवर्णनम् ऋषिगण बोले — हे सूतजी! हे अनघ! यद्यपि आपने परम तेजस्वी व्यास तथा सत्यवती के जन्म की कथा विस्तारपूर्वक कही तथापि हम लोगों के चित्त में एक… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीय: स्कन्धः-अध्याय-02 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीय: स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीय: स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय व्यासजी की उत्पत्ति और उनका तपस्या के लिये जाना व्यासजन्मवर्णनम् सूतजी बोले — एक बार तीर्थयात्रा करते हुए महान् तेजस्वी पराशरमुनि यमुनानदी के उत्तम तट पर आये और उन धर्मात्मा ने भोजन करते हुए निषाद से कहा… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीय: स्कन्ध:-अध्याय-01 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीय: स्कन्ध:-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीय: स्कन्ध:-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय ब्राह्मण के शाप से अद्रिका अप्सरा का मछली होना और उससे राजा मत्स्य तथा मत्स्यगन्धा की उत्पत्ति मस्त्यगन्धोत्पत्तिवर्णनम् ऋषिगण बोले — [हे सूतजी!] आपकी यह बात आश्चर्यजनक एवं रहस्यपूर्ण है। इस सम्बन्ध में हम सब तपस्वियों को… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-प्रथमःस्कन्धः-अध्याय-20 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-प्रथमःस्कन्धः-अध्याय-20 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-प्रथमःस्कन्धः-विंशोऽध्यायः बीसवाँ अध्याय सत्यवती का राजा शन्तनु से विवाह तथा दो पुत्रों का जन्म, राजा शन्तनु की मृत्यु, चित्रांगद का राजा बनना तथा उसकी मृत्यु, विचित्रवीर्य का काशिराज की कन्याओं से विवाह और क्षयरोग से मृत्यु, व्यासजी द्वारा धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-प्रथमःस्कन्धः-अध्याय-19 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-प्रथमःस्कन्धः-अध्याय-19 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-प्रथमःस्कन्धः-एकोनविंशोऽध्यायः उन्नीसवाँ अध्याय शुकदेवजी का व्यासजी के आश्रम में वापस आना, विवाह करके सन्तानोत्पत्ति करना तथा परम सिद्धि की प्राप्ति करना शुकस्य विवाहादिकार्यवर्णनम् ॥ शुक उवाच ॥ सन्देहोऽयं महाराज वर्तते हृदये मम । मायामध्ये वर्तमानः स कथं निःस्पृहो भवेत् ॥ १ ॥… Read More