श्रीमद्‌देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ तृतीयोध्यायः श्रीमदेवीभागवत के माहात्म्य के प्रसंग में राजा सुद्युम्न की कथा नवाहश्रवणाद् इलायाः पुंस्त्वप्राप्तिवर्णनम् ॥ सूत उवाच ॥ अथेतिहासमन्यच्च शृणुध्वं मुनिसत्तमाः । देवीभागवतस्यास्य माहात्म्यं यत्र गीयते ॥ १ ॥ एकदा कुम्भयोनिस्तु लोपामुद्रापतिर्मुनिः । गत्वा कुमारमभ्यर्च्य पप्रच्छ विविधाः कथाः ॥… Read More


श्रीमद्‌देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ द्वितीयोऽध्यायः श्रीमद्देवीभागवत के माहात्म्य के प्रसंग में स्यमन्तकमणि की कथा अथ द्वितीयोऽध्यायः ॥ ऋषय ऊचुः ॥ वसुदेवो महाभागः कथं पुत्रमवाप्तवान् । प्रसेनः कुत्र कृष्णेन भ्रमताऽन्वेषितः कथम् ॥ १ ॥ विधिना केन कस्माच्च देवीभागवतं श्रुतम् । वसुदेवेन सुमते वद सूत… Read More


श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्यम् अध्याय 01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ प्रथमोऽध्यायः सूतजी के द्वारा ऋषियों के प्रति श्रीमद्देवीभागवत के श्रवण की महिमा का कथन सृष्टौ या सर्गरूपा जगदवनविधौ पालनी या च रौद्री संहारे चापि यस्या जगदिदमखिलं क्रीडनं या पराख्या । पश्यन्ती मध्यमाथो तदनु भगवती वैखरी वर्णरूपा सास्मद्वाचं प्रसन्ना विधिहरिगिरिशा-राधितालङ्करोतु… Read More


श्रीमद्देवीभागवत की पाठविधि देवीभागवतं नाम पुराणं परमोत्तमम् । त्रैलोक्यजननी साक्षाद् गीयते यत्र शाश्वती ॥ श्रीमद्भागवतं यस्तु पठेद्वा शृणुयादपि । श्लोकार्थं श्लोकपादं वा स याति परमां गतिम् ॥ श्रीमद्देवीभागवत नामक पुराण सभी पुराणों में अतिश्रेष्ठ है, जिसमें तीनों लोकों की जननी साक्षात् सनातनी भगवती की महिमा गायी गयी है। जो श्रीमद्देवीभागवत के आधे श्लोक या चौथाई… Read More


॥ चतुःश्लोकी भागवत ॥ अहमेवासमेवाग्रे नान्यद् यत् सदसत् परम् । पश्चादहं यदेतच्च योऽवशिष्येत सोऽस्यहम् ॥ १ ॥ ‘सृष्टि के पूर्व केवल मैं-ही-मैं था । मेरे अतिरिक्त न स्थूल था न सूक्ष्म और न तो दोनों का कारण अज्ञान । जहाँ यह सृष्टि नहीं है, वहाँ मैं-ही-मैं हूँ और इस सृष्टि के रूप में जो कुछ… Read More