भगवान् शिव के विभिन्न मन्त्र ॥ भगवान् शिव के विभिन्न मन्त्र ॥ एकाक्षरीमंत्र – ‘हौं’ । हिन्दी तन्त्रसार में ऋषि वामदेव, छन्द पंक्ति, देवता सदाशिव कहे गये है । शारदा तिलक में ‘हं’ बीज औं’ शक्ति बतलाया गया है । एकाक्षर चिंतामणि – ‘क्ष्रौं’ । शारदा तिलक के अनुसार यह भगवान शिव के उत्तरवक्त्र से सम्बन्धित है । ऋषि काश्यप,… Read More
गुह्यकाली दैनिककर्म सन्ध्या मन्त्राः ॥ अथ गुह्यकाली दैनिककर्म सन्ध्या मन्त्राः ॥ १. दन्तधावन मन्त्रः — आयुर्बलं यशो वर्चः प्रजाः पशुवसूनि च । ब्रह्मप्रज्ञां च मेघां च तन्नो धेहि वनस्पते ॥ क्लीं फट् । २. मुखप्रक्षालनार्थ जलदानमन्त्रः — ॐ जूं सः । ३. आचमन मन्त्रः — ऐं अमृताय हूं फट् ।… Read More
गुह्यकाली विविध मन्त्र 02 ॥ गुह्यकाली विविध मन्त्र 02 ॥ See Also :- गुह्यकाली विविध मन्त्र 01 ३३ – शिवोपास्यायुताक्षर मन्त्रः —… Read More
कामकलाकालि पूजाऽर्चा विधानम् ॥ अथ कामकलाकालि पूजाऽर्चा विधानम् ॥ पूर्वोक्त ध्यान मन्त्रों से देवी का आवाहन कर षोडशोपचार से पूजन कर बलि प्रदान करें । आवाहन – ॐ ह्रीं क्लीं आं कामकलाकालि देवि आगच्छ आगच्छ तिष्ठ तिष्ठ पूजां गृहाण गृहाण स्वाहा । आवाहन कर पुष्पांजलि प्रदान करें – एष पुष्पाञ्जलिः क्लीं कामकलाकाल्यै नमः । अर्घ्यादि प्रदान करें –… Read More
कामकलाकाल्याः विविध मन्त्राः ॥ कामकलाकाल्याः विविध मन्त्राः ॥ १. मरीचिसमुपासिताया सप्तदशाक्षर मन्त्रः- ओं ऐं ह्रीं श्रीं क्रीं क्लीं हूं छ्रीं स्त्रीं फ्रें क्रों हौं क्षौं आं स्फ्रों स्वाहा । २. कपिलोपास्याया षोडशाक्षर मन्त्रः – ह्रीं फ्रें क्रों ग्लूं छ्रीं स्त्रीं हूं स्फ्रों खफ्रें हसफ्रीं हसखफ्रें क्ष्रौं स्हौः फट् स्वाहा ॥ ३. हिरण्याक्षोपासिताया नवाक्षर मन्त्रः- खफ्रें रह्रीं रज्रीं रक्रीं… Read More
कामकला काली ॥ कामकलाकाली ॥ गुह्यकाली का ही प्रतिपादित रूप कामकलाकाली है । कामकलाकाली आद्या शक्ति के भयङ्कर स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती है । कामकलाकाली में कामकला तत्त्व एवं कामाख्य योग की परिभावना है । राम, रावण, हनुमानादि उपासकों ने इस विद्या की उपासना की थी । इसकी उपासना श्मशान प्रिय तथा पञ्चमकारयुक्त कही गई है ।… Read More
गुह्यकाली विविध मन्त्र 01 महाकालसंहिताया गुह्यकालीखण्डस्य प्रथमभागे समागताः मूलमन्त्राः १–भरतोपास्यगुह्याल्याः षोडशाक्षरः कीलितमन्त्रः (१।११-१४) ‘ओं ॐ सिद्धिकरालि ह्रीं हूं क्रीं स्त्रीं ॐ नमः स्वाहा’। २- तस्या एवाकीलितः षोडशाक्षरमन्त्रः (१।१५) ‘ओं फ्रें सिद्धि करालि ह्रीं छ्रीं हूं स्त्रीं फ्रें नमः स्वाहा’ । ३–रामोपास्यायाः सप्तदशाक्षरः कीलितमन्त्रः (१।१६-२०) ‘ओं फ्रें सिद्धि हस्ख्फ्रें हस्फ्रें ख्फ्रें करालि ख्फ्रें हस्ख्फ्रें ख्फ्रें फ्रें ओं स्वाहा’ ।… Read More
गुह्यकाली मन्त्रभेदाः तथा विभिन्न गायत्री मंत्राः ॥ गुह्यकाली मन्त्रभेदाः ॥ (१) नवाक्षर विद्या – क़्रीं गुह्ये कालिके क्रीं स्वाहा । (२) चतुर्दशाक्षरी मन्त्र – क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं गुह्ये कालिके स्वाहा । (३) पञ्चदशाक्षरी मन्त्र – हूं ह्रीं गुह्ये कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा । (४) षोडशाक्षरी मन्त्र – क्रीं हूं ह्रीं गुह्ये कालिके क्रीं… Read More
“ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा” श्रीराधा-उपासना – देवी भागवत अनुसार ॥ ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा ॥ श्रीराधा-उपासना – देवी भागवत अनुसार भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! सुनो, यह वेदवर्णित रहस्य तुम्हें बताता हूँ । यह सर्वोत्तम एवं परात्पर साररहस्य जिस किसी के सम्मुख नहीं कहना चाहिये । इस रहस्य को सुनकर दूसरों से कहना उचित नहीं है; क्योंकि यह अत्यन्त गुह्य रहस्य है ।… Read More
युगलशरणागति-मन्त्र युगलशरणागति-मन्त्र सारस्वत कल्प से पच्चीसवें कल्प पूर्व की बात है, उस समय नारदजी कश्यपजी के पुत्र होकर उत्पन्न हुए थे । उस समय भी उनका नाम नारद ही था । एक दिन वे भगवान् श्रीकृष्ण का परम तत्त्व पूछने के लिये कैलास पर्वत पर भगवान् शिव के समीप गये । वहाँ उनके प्रश्न करने पर… Read More